ई-स्वामी

यहां पर "कुछ" लिखा है!

  • किस्सा-गो-ई
  • खलील-ई
  • खाम-खयाल-ई
  • दिखा-ई
  • लिखा-ई
  • स्माइल-ई
  • Subscribe
कटी-छँटी सी लिखा-ई

कटी-छँटी सी लिखा-ई

By eswami on February 3, 2012

सोच बात पूरी नही होती खयाल छोड देते हैं साथ अध-बीच कोई सिरा जुडता नहीं कोई शैतान है भीतर फ़ूंक कर बिखेर देता है ताना-बाना और कहता है देखा? गर पैसे होते बादाम दूध पिया होता सोच यूं गुम ना होती तेरी बनिये को देख सबका हिसाब याद है उसे मूंह-ज़बानी     अनकही पुराने [...]

Full Story »

Posted in लिखा-ई | Tagged अनकही, सोच | 6 Responses

सपना आगे जाता कैसे?

सपना आगे जाता कैसे?

By eswami on November 22, 2011

छोटा सा इक गाँव था जिसमें दीये थे कम और बहुत अंधेरा बहुत शज़र थे थोडे घर थे जिनको था दूरी ने घेरा इतनी बडी तन्हाई थी जिसमें जागता रहता था दिल मेरा बहुत कदीम फ़िराग था जिसमें एक मुकर्रर हद से आगे सोच ना सकता था दिल मेरा ऐसी सूरत में फ़िर दिल को [...]

Full Story »

Posted in लिखा-ई | Tagged उर्दू शायरी, features | 5 Responses

पेश-ए-खिदमत है ‘हर्बल माल’– स्व. नुसरत की एक विरली कव्वाली!

पेश-ए-खिदमत है ‘हर्बल माल’– स्व. नुसरत की एक विरली कव्वाली!

By eswami on May 11, 2011

पुराना खयाल, पुरानों का पुरानों के लिये! कुछ भी नया नही हैं इस कव्वाली में, जैसे मिट्टी में सब पुराना-धुराना! बस ये मिट्टी मावठे की पहली बूंद से सौंध जाती है.. पहली बारिश में लौंध  जाती है.. पहली ऊष्मा में कौंध जाती है. यह कव्वाली मुझे पसंद है इसके लफ़्ज़ों से, इस खयाल से पुरानी [...]

Full Story »

Posted in दिखा-ई | Tagged कव्वाली, नुसरत | 4 Responses

अपने अपने राम, अपनी अपनी रामायण!

अपने अपने राम, अपनी अपनी रामायण!

By eswami on April 19, 2011

बॉलीवुड के निर्देशकों मे से एक, रामगोपाल वर्मा ने रामनवमी पर ट्वीट की “अपनी पत्नि के लिये रावण से व्यक्तिगत युद्ध लडने के अलावा राम ने अयोध्या के लोगों के लिये क्या किया?” (निश्चित रूप से रामगोपाल ने उत्तरकाण्ड नही पढा है जिसमे राम-राज्य का विस्तृत वर्णन है. ) इसके बाद उन्होने रामायण के अलग [...]

Full Story »

Posted in लिखा-ई | Tagged राम, रामगोपाल वर्मा, रामायण | 17 Responses

ए फ़ॉर अखाडा, बी फ़ॉर बखेडा सी फ़ॉर क्रिकेट!

ए फ़ॉर अखाडा, बी फ़ॉर बखेडा सी फ़ॉर क्रिकेट!

By eswami on April 11, 2011

टीवी हैं. टीवी पे टीवीजीवी हैं. अखाडे हैं. अखाडों में बखेडे हैं. (टीवी पर दृश्य पहला) क्रिकेट विश्वकप सेमी-फ़ाईनल भारत-पाक भिडंत! उपमहाद्वीप के स्वादिष्ट पकवानों का आनन्द उठाने के बाद सरदारजी और गिलानी मैच देखने बैठ गए हैं. चेहरे की खुशी बता रही है की भोजन के बाद, परंपराओं के अनुसार दोनो पंजाबियों के बीच [...]

Full Story »

Posted in लिखा-ई | Tagged क्रिकेट, भारत, भ्रष्टाचार | 12 Responses

Previous Pause Next
बढते चिट्ठाकार और सिमटती चिट्ठाकारी

बढते चिट्ठाकार और सिमटती चिट्ठाकारी

By eswami on November 1, 2010

चिट्ठाकारी अपनी आईडेंटिटी बनाने के बाद अब आईडेंटिटी क्राईसिस के दौर से गुज़र रही है. समस्या ये है कि अच्छे-बुरे हर एक की शेल्फ़ लाईफ़ एक जैसी हो गई है…

Posted in लिखा-ई | Tagged चिट्ठाकारी, Blogging | 8 Responses

नास्तिकों को धर्म की अधिक जानकारी होती है; लेकिन…

नास्तिकों को धर्म की अधिक जानकारी होती है; लेकिन…

By eswami on September 28, 2010

टाईम पत्रिका के अलावा तमाम बडे बडे प्रकाशकों ने आज एक खबर प्रकाशित की है. एक सर्वे के मुताबिक नास्तिकों को धर्म के बारे में श्रद्धालुओं से अधिक जानकारी होती है. लेकिन बात यहीं खत्म नही होती!

Posted in लिखा-ई | Tagged ईश्वर, डार्विन, धर्म, नास्तिक | 7 Responses

बॉलीवुड सिनेमा में बढता क्लास डिवाईड

बॉलीवुड सिनेमा में बढता क्लास डिवाईड

By eswami on September 20, 2010

आज भारत में एक नवधनाढ्यवर्ग का जन्म हुआ है, जो पश्चिमोन्मुखी है. इस नये समाज के लिये टेलर-मेड मनोरंजन, विचारों और उत्पादों का एक नया बाज़ार बन गया है. अगर इनकी अण्टी ढीली करवानी है तो ‘ओल्डस्कूल मिड्डिल क्लास मेंटेलिटी’ पर अटैक जरूरी है ताकी ये “वान्ना बीज़” खुद ही की नज़र में टुच्ची से गुच्ची; और बेमानी से अरमानी हो लें.

Posted in लिखा-ई | Tagged बॉलिवुड, सिनेमा, फ़िल्में, Bollywood, Cinema, Films | 5 Responses

कौन देस के बासी? कौन देस के बासी तुम??

कौन देस के बासी? कौन देस के बासी तुम??

By eswami on September 3, 2010

“कौन देस के बासी?…कौन देस के बासी? यूं पूछते होंगे वो!” दादाजी ने पिताजी से कहा. “तुम बताना कि कहां से आए हो, फ़लां पण्डे के पास जाना है, ये पुराना पता है पण्डे का. हमारा खानदानी पण्डा है, मिल जाएगा. और वहां उनकी बहियों में हमारे पुरखों के नाम दर्ज हैं.” बहुत बचपन की एक स्मृति [...]

Posted in लिखा-ई | Tagged अप्रवासी, अमरीका, भारत, हरिद्वार | 10 Responses

ई-मेल बाँची बाप ने पड रहा दिल का दौरा, पूत ट्विट्टतो जावे!

ई-मेल बाँची बाप ने पड रहा दिल का दौरा, पूत ट्विट्टतो जावे!

By eswami on May 29, 2010

इन्टरनेट पर अपने मनपसंद काम करने के चक्कर में यदि कोई परिवार के सदस्यों को तवज्जो नही दे रहे हैं तो ये याद रखना कि किसी दिन इसी पीसी के सामने ई-मेल पढते पिता दिल का दौरा पड रहा होगा और एक औलाद उसका यूट्यूब वीडियो बना रही होगी और दूसरी मित्रों को ट्विट्टर अपडेट दे रही होगी.

Posted in लिखा-ई | Tagged इन्टरनेट, कोलाहल | 14 Responses

किस्सा-गो-ई

  • राक्षसों का गुरु शुक्र शुभ है क्योंकि वह पार्वती का पुत्र है!
  • सावन में लग गई आग.. दिल मेरा हाऽऽय!
  • एक देसी, एक बीयर…एक किस्सा!
  • तुम्हारे यहां वालों ने ऐसी-तैसी कर दी!
  • वो बोली “इट्स ओके!”

खलील-ई

  • IIT की लिपस्टिक लगाओ प्रतियोगिता और सिगरेट के सुट्टे
  • मित्रता दिवस: खलील जिब्रान – मित्र से बातें
  • चिट्ठाचर्चा: ये दुरूह आत्मपीडक कर्म कर कैसे लेते हैं आप?
  • अंग्रेजी चिट्ठा उपलब्ध
  • पांच रुप्पैय्या बारा आना: चिट्ठे पर विज्ञापन, प्रायोजक या दानपेटी?

खाम-खयाल-ई

  • सबटरेनियन रीवर्स
  • हिन्दी दिवस: जडें तो मजबूत हैं निजभाषा की
  • सविता भाभी तक कैसे (न) पहुंचें?
  • अधिकतर जीनियस बंदों की आम परेशानी – लिखाई!
  • चार साल पूरे!

दिखा-ई

  • [वीडियो पोस्ट] अयोध्या फ़ैसले पर पाकिस्तानी मीडिया: ‘भारतीय जज खुसरे हैं!’
  • जौन एलिआ की याद में उन्ही की एक गज़ल
  • अजन्मे भूत की नज़र से भविष्य की कलाएं
  • गांधी के इफ़ेक्ट्स और साईड-इफ़ेक्ट्स
  • अतीत के प्रस्फ़ुटन –२: हैप्पीनेस टेक्स और चार्ली चेप्लिन के पोस्टर में सह-संबंध

लिखा-ई

  • दुआ है कि तुम्हें तुम जैसे अजीब लोग मिलें!
  • भाषा प्रवाह मतलब “मन का रेडियो बजने दे ज़रा!”
  • सचिन!
  • ‘ओबामा को शान्ति नोबल’ अमरीकी नेतृत्व का छवि प्रबंधन?
  • हाल में पढी उल्लेखनीय पुस्तकें: अघोरा – भाग १,२ और ३

स्माइल-ई

  • इलाहबाद चिट्ठाकार संगोष्ठी: बधाईयां! शर्म तो बेच खाई, ये तो लफ़्फ़ाजियों का समय है!
  • ट्विट ट्विट..फ़िल्म समीक्षा..ट्विट ट्विट ट्विट!
  • प्रस्तुत है टंकी चालीसा और टंकी नामावली भी!
  • साईबर टोटका (फ़ुरसतिया की लोकप्रियता का अंक-विज्ञान)
  • ज्योतिषी अक्सर बदहाल क्यों होते हैं?
  • हिंदिनी कडियाँ
  • नये लेख
  • श्रेणियाँ
  • फुरसतिया
  • हिंदिनी
  • e-Swami's e-Tranra
  • कटी-छँटी सी लिखा-ई
  • सपना आगे जाता कैसे?
  • पेश-ए-खिदमत है ‘हर्बल माल’– स्व. नुसरत की एक विरली कव्वाली!
  • अपने अपने राम, अपनी अपनी रामायण!
  • ए फ़ॉर अखाडा, बी फ़ॉर बखेडा सी फ़ॉर क्रिकेट!
  • सबटरेनियन रीवर्स
  • IIT की लिपस्टिक लगाओ प्रतियोगिता और सिगरेट के सुट्टे
  • बढते चिट्ठाकार और सिमटती चिट्ठाकारी
  • [वीडियो पोस्ट] अयोध्या फ़ैसले पर पाकिस्तानी मीडिया: ‘भारतीय जज खुसरे हैं!’
  • नास्तिकों को धर्म की अधिक जानकारी होती है; लेकिन…
  • किस्सा-गो-ई
  • खलील-ई
  • खाम-खयाल-ई
  • दिखा-ई
  • लिखा-ई
  • स्माइल-ई

माह के सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त आलेख

  • None found

माह के लोकप्रिय आलेख

  • सविता भाभी तक कैसे (न) पहुंचें?सविता भाभी तक कैसे (न) पहुंचें? 26 comment(s)
  • कर्णपिशाचिनी साधना कैसे करूं?कर्णपिशाचिनी साधना कैसे करूं? 16 comment(s)
  • राक्षसों का गुरु शुक्र शुभ है क्योंकि वह पार्वती का पुत्र है!राक्षसों का गुरु शुक्र शुभ है क्योंकि वह पार्वती का पुत्र है! 6 comment(s)
  • नास्तिकों को धर्म की अधिक जानकारी होती है; लेकिन…नास्तिकों को धर्म की अधिक जानकारी होती है; लेकिन… 7 comment(s)
  • अपने अपने राम, अपनी अपनी रामायण!अपने अपने राम, अपनी अपनी रामायण! 17 comment(s)

इससे बढिया भी कुछ मिला?

No related posts.

ऐसे अन्य लेख

    None Found

नई टिप्पणियाँ

  • Mohini on कर्णपिशाचिनी साधना कैसे करूं?
  • Mohini on कर्णपिशाचिनी साधना कैसे करूं?
  • Mohini on हाल में पढी उल्लेखनीय पुस्तकें: अघोरा – भाग १,२ और ३
  • ognizkmuphkl on पत्रकारों की बेशर्मी या बेवकूफ़ी?
  • cbmofvluiorm on ये दिल्ली है मेरे यार: तांत्रिक, किताबें, सडकें और… चिडियां!

RSS हिंदिनी पर ताज़ा लेख

  • नया iPhone 4 पाने की होड! एप्पल स्टोर्स के बाहर बडे जमघट eswami
  • आपके काम पर ध्यान बढाने में मददगार सॉफ़्टवेयर्स (२०१० की सूची १) eswami
  • वीडियो: ब्लाग्स सोशियल नेटवर्किंग के लिये नाकाफ़ी हैं eswami
  • एग्रीगेटर्स के जमाने में पाठकों को आत्मीय स्पर्श दें! eswami
  • चिट्ठाकारी, आपका व्यक्तिगत शब्द-भंडार और शब्दाडंबर का भय eswami

Tags

America Amish Blogging feature features India Politics procrastination Sachin Tendulkar Sports अमर चित्र कथा अमरीका अर्थव्यवस्था अर्थशास्त्र आतंकवाद आमिश उपभोक्ता ऐतिहासिक ओबामा कार किरदार किस्सा कॉमिक्स क्रिकेट खलील-ई खुशी चिट्ठाकारी जादू तंत्र नर्स पत्रकारिता पौराणिक बाजार भारत मंत्र मनोविज्ञान मीडिया यादें राजनीति रामायण रुचि संस्मरण समाज स्कूटर फ़लसफ़े

Copyright © 2013 ई-स्वामी.

अ