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अगर हम बनाएं उनकी शक्लें?

अगर हम बनाएं एक फ़िल्म, अमरीका के एक छोटे से झूठ... 

अगर हम बनाएं उनकी शक्लें?

तुम्हारा प्यार, प्यार और हमारा प्यार लफ़डा?

एक बहुत करीबी मित्र से फोन... 

तुम्हारा प्यार, प्यार और हमारा प्यार लफ़डा?

ये दिल्ली है मेरे यार: तांत्रिक, किताबें, सडकें और… चिडियां!

एक तांत्रिक से भेंट और कन्फ़्यूजन्निज़्म:

किसी काम से दिल्ली गया था. एक तांत्रिक से खास तौर पे मिलवाया गया.

मेरी तरह आप भी शायद सोच रहे होंगे की श्मशानों में रहने वाला भस्म मले दिगंबर अघोरी होगा.

या काला चोगा और ढेर सारे रूद्राक्ष पहने घूमने वाला कोई दढियल होगा लेकिन ये तो सफ़ारी सूट पहनने वाला, फ़र्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने वाला गृहस्थ था. मेरे पिता की उम्र का व्यक्ति.

ये छोटा मोटा टोना-टोटका करने वाला…

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अगर हम बनाएं उनकी शक्लें?

अगर हम बनाएं एक फ़िल्म, अमरीका के एक छोटे से झूठ पर, जिसके दम पे नेस्तनाबूद कर दिया गया एक बसा बसाया मुल्क, लूट ली गई उनकी मिल्कियतें और मार दिये गए लाखों मासूम ईराकी. फ़िल्म में हों खालिस अमरीकी और ब्रिटिश किरदार - गोलियां चलाते सैनिक, गोले बारूद बेचते मौत के सौदागर और उनके पीछे हाथ में बाईबल थामे साफ़ेदपोश. कितने ऑस्कर जीतेगी वो फ़िल्म? युद्ध में घायल अपनी नेत्र ज्योति गंवाए सैनिक के लौटते ही उसे पत्नि दे…

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स्माईली: बहार आई तो खुल गए हैं नए सिरे से हिसाब सारे!

अगर देखने को फ़ैज़ की नज़र ना मिलती उधार, तो वैसा नहीं आता, जैसा खूबसूरत आया है बसंत.

ज़रा ग्लोबलवार्मिंगग्रस्त इस सुंदर बसंत में अच्छी भली साहित्यिकता मौज लेने वालों की तत्काल सृजनशीलता की शिकार हो रही है!
चलिए तो हम क्यों पीछे रहें.. एकाध नज़्म का शिकार तो हम भी कर ही सकते हैं. कठिन कंसेप्ट से आसान की ओर का एक छोटा सफ़र और फ़िर ज़रा तरन्नुम में ..

बहार आई तो जैसे इक बार

बहार आई तो जैसे इक बार

लौट आए…

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चूडियाँ ला दो प्रियतम.. और हां, मेरी गर्दन मत मरोडो प्लीज़!

इधर इंटरनेट पर बिखरे ज्ञान के डबरों में हर-हर गंगे करते लोग उधर  इन्टरनेट की गटर-गंगा मे मनचाहा उत्सर्जित करने की स्वछंदता का मजा लेते लोग. 

ये जो पूछ जाएं कम, वो जो लिख जाएं कम!

मामला खतरनाक होता है जब बंदर के हाथ तलवार लग जाए या आदमी के हाथ की-बोर्ड! कॉमेडी ऑफ़ एरर्स - त्रुटियों का हास्य - गलतियों पर गलतियां और उस पर गलतियां.. पढने-सुनने वाला हंसते हंसते जब कुढ जाए तो ब्लाग लिख मारे.

अंग्रेजी का एक शब्द है मॉन्डेग्रीन…

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सविता भाभी तक कैसे (न) पहुंचें?

भारत से इन्टरनेट सेवाओं का प्रयोग करने वाले सुधी पाठक जानते ही होंगे की भारतीय भाषाओं की प्रथम सॉफ़्ट-पॉर्न कॉमिक चरित्र पर आधारित सविता भाभी [savitabhabhi.com] नामक साईट को भारत सरकार नें बैन कर दिया है – अर्थात भारत में रहने वाले लोग इस साईट को अपने बेब ब्राऊज़र में नहीं खोल पाएंगे.

डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलिकम्यूनिकेशन ने इस आशय का तुगलकी आदेश भारतीय इन्टरनेट सेवा प्रदाताओं को दे मारा है.

वैसे नर्डी…

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अधिकतर जीनियस बंदों की आम परेशानी - लिखाई!

दुनिया कें सबसे ज्यादा टेलेन्टेड लोग बाएं हाथ का प्रयोग करने वाले लोग हैं. ये संयोग नही है. सिकन्दर से ले कर गांधी तक और आईंस्टाईन से ले कर ओबामा तक लिस्ट इतनी लंबी है की आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे. अधिकतर जीनियस लोग खब्बू हैं या यूं कहें की जब जीनियस लोगों की बात हो तो खब्बू लोग बहुसंख्यक हो जाते हैं. खब्बू होना जीनियस होने की ग्यारंटी नहीं है लेकिन एक परेशानी से ताउम्र…

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फुरसतियाजी, कृपया भूल सुधारें!

मुझे बहुत दु:ख हुआ है आज..जिस प्रकार का और जितना सन १९८७ में हुआ था उससे भी
अधिक.

वैसे तो ये बात टिप्पणी में कही जानी थी लेकिन लेख लिख रहा हूं ताकी सनद रहे!

 

सन १९८७ में सिंदूर नामक एक फ़िल्म आई थी, फ़िल्म का गीत था

पतझड सावन बसंत बहार

एक बरस के मौसम चार

पांचवा मौसम प्यार का

 

गाना हिट हो गया था, इस तकनीकी गलती के बावजूद की बसंत में बहार आती है. बहार
नाम का कोई मौसम नहीं…

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एक देसी, एक बीयर…एक किस्सा!

सुरक्षा पडताल से  दरवाजा नंबर ४२ तक की सामान खींच कदमताल काफ़ी लंबी थी. मुझे डर हुआ की मेरे डीओ की परतों के नीचे से पसीना अपनी उपस्थिती ज़ाहिर ना करने लगे. गर्मी लग रही थी, शरीर का तापमान कम करने के अलावा आगे लंबी दूरी की उडान के लिये खुद को तैयार करना था.

मैं बैठा कुछ देर तक प्रथम श्रेणी सीट की आरामदायक चौडाई महसूस करता रहा. “मैं इस…

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सविता भाभी तक कैसे (न) पहुंचें?

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डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलिकम्यूनिकेशन ने इस आशय का तुगलकी आदेश भारतीय इन्टरनेट सेवा प्रदाताओं को दे मारा है.

वैसे नर्डी…

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राक्षसों का गुरु शुक्र शुभ है क्योंकि वह पार्वती का पुत्र है!

संदर्भ: अरविंद मिश्राजी ने अपने ब्लॉग पर उत्सुकता जताई थी की राक्षसों का गुरु शुक्राचार्य शुभ क्यों माना जाता है? इसके उत्तर में ज्योतिष दर्शन वाले सिद्धार्थ जोशी जी नें एक पोस्ट भी लिखी थी. उन्होंने इस पोस्ट में शुक्र के शुभ माने जाने के सामाजिक संदर्भ का विश्लेषण किया था. दर असल मैंने सिद्धर्थ वाली पोस्ट पहले पढी थी फ़िर दूसरी वाली पढी.

मैं इस का उत्तर एक पौराणिक कथा में पाता हूं की शुक्र…

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ये दिल्ली है मेरे यार: तांत्रिक, किताबें, सडकें और… चिडियां!

एक तांत्रिक से भेंट और कन्फ़्यूजन्निज़्म:

किसी काम से दिल्ली गया था. एक तांत्रिक से खास तौर पे मिलवाया गया.

मेरी तरह आप भी शायद सोच रहे होंगे की श्मशानों में रहने वाला भस्म मले दिगंबर अघोरी होगा.

या काला चोगा और ढेर सारे रूद्राक्ष पहने घूमने वाला कोई दढियल होगा लेकिन ये तो सफ़ारी सूट पहनने वाला, फ़र्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने वाला गृहस्थ था. मेरे पिता की उम्र का व्यक्ति.

ये छोटा मोटा टोना-टोटका करने वाला…

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स्माईली: बहार आई तो खुल गए हैं नए सिरे से हिसाब सारे!

अगर देखने को फ़ैज़ की नज़र ना मिलती उधार, तो वैसा नहीं आता, जैसा खूबसूरत आया है बसंत.

ज़रा ग्लोबलवार्मिंगग्रस्त इस सुंदर बसंत में अच्छी भली साहित्यिकता मौज लेने वालों की तत्काल सृजनशीलता की शिकार हो रही है!
चलिए तो हम क्यों पीछे रहें.. एकाध नज़्म का शिकार तो हम भी कर ही सकते हैं. कठिन कंसेप्ट से आसान की ओर का एक छोटा सफ़र और फ़िर ज़रा तरन्नुम में ..

बहार आई तो जैसे इक बार

बहार आई तो जैसे इक बार

लौट आए…

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अधिकतर जीनियस बंदों की आम परेशानी - लिखाई!

दुनिया कें सबसे ज्यादा टेलेन्टेड लोग बाएं हाथ का प्रयोग करने वाले लोग हैं. ये संयोग नही है. सिकन्दर से ले कर गांधी तक और आईंस्टाईन से ले कर ओबामा तक लिस्ट इतनी लंबी है की आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे. अधिकतर जीनियस लोग खब्बू हैं या यूं कहें की जब जीनियस लोगों की बात हो तो खब्बू लोग बहुसंख्यक हो जाते हैं. खब्बू होना जीनियस होने की ग्यारंटी नहीं है लेकिन एक परेशानी से ताउम्र…

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