क्योंकी शकीरा के पुट्ठे झूठ नहीं बोलते!

ये हिंदुस्तान को क्या हो रेला है भई? इन्डिया से शादीशुदा बालबच्चेदार मित्र चैटिया रहे हैं. शकीरा अपने इंडिया मे आ रेली बाबा! उसका वो गाना देखाना है “हिप्स डोंट लाई!” अर्थात नितंब असत्य नहीं बोलते. हम बोले -

अबे आती है तो आने दे तेरे को क्या?
अबे पता है एक टिकट कित्ते की?
कित्ते की?
३६५० रुपये की!
क्या? चरया गया है क्या साईं?
बंदा ज्यादा बकझक करने के बज़ाए कडी थमा देता है -
देख ले भई!
अबे रुक.
मैं दनाक से केल्कुलेटर खोल के ४३.९३ आजकल के कंवर्जन रेट से भाग दे कर देखता हूं ताकी मामला अपनी डिफ़ाल्ट करंसी मे समझ में आए  -

अबे ८३ डालर!!
हव्व
कौन जाएगा देखने?
जनता जाएगी
देसी जनता?
हव्व!
इत्ता पैसा है उनके कने?
हव्व!
क्या बोल रिया है बे?
सही बोल रिया हूं यार!!

शकीरा मेरी फ़ेवरेट पॉप कलाकार हैं, लेकिन इस भाव में तो मैं उनका कंसर्ट कतई ना देखूं!

*-*-*

कल अंतर्यामिणी बता रही थीं की शहर में ‘लायन किंग’ कंसर्ट हाल में शो करने आएंगे. शायद दफ़्तर वालों की कंसर्ट हाल को दी जाने वाली कार्पोरेट स्पांसरशिप के चलते मिलने वाली मुफ़्त टिकटें पाने का मौका हाथ लगे तो देख आएं.

पत्नी: और अगर टिकटें ना मिलें तो?
स्वामी: हमऊं खरीद के देख लेंगे!
पत्नी: हे हे पता है एक टिकट कितने की है?
स्वामी: कित्ते की?
पत्नी: ८० डालर
स्वामी: रहने दे भई, ये ज़रा महंगी है. हम बिना लायन किंग के ही भले.

भईये अपने इंडिया की महंगाई देख कर तो यहां बैठ के पसीना आ जाता है उससे ज्यादा वहां का उपभोक्तावाद देख कर. मेरे हाई थिंकिंग सिंपल लिविंग वाले इंडिया को अमरीका की हवा लग गई है. लगता है ये नव-भोक्ता चलते दुनिया को पीछे छोड देंगे!

*-*-*

मैं अपने से जरा दूर वाले दफ़्तर में बैठी अमरीकी महिला से पूछता हूं – औसत कंसर्ट का टिकट कितने का होता है? वो बोली “५०-६०.. लेकिन मैं काफ़ी समय से किसी कंसर्ट में नही गई!”

मैं मुस्कुरा देता हूं – मैं भी नहीं गया! लेकिन मेरे भारतीय मित्र शकीरा के कंसर्ट में जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं भारत में – अस्सी डालर का टिकट ले कर!
पागल हो गए हैं क्या? वो पूछती है!
उन्हें प्रत्यक्ष कंफ़र्म करना है की शकीरा के ’हिप्स डोंट लाई’!

इस भाव में?
हां!
सचमुच पागल हो गए हैं – इस प्रकार के कंसर्ट पर यहां वो बच्चे पैसा खर्च करते हैं जो खुद कमाते हैं फ़िर भी माता-पिता के साथ उनके घर में रहते हैं और अपनी कमाई से ऐश करते हैं वहां कौन करेगा ऐसी चीज़ पर पैसा खर्च?
भारत की जनता करेगी!
इतना पैसा है जनता के पास?
पता नहीं!

मुझे समझ नहीं आया हां बोलू या ना! अभी भी पशोपेश में हूँ! :(

4 responses to “क्योंकी शकीरा के पुट्ठे झूठ नहीं बोलते!”

  1. अनूप शुक्ला

    हम तो न जायेंगे शकीरा का सच-झूठ देखने। बात खाली पैसे की नहीं है भाई। अब देखों पुट्ठों की गवाही में मुंह से आवाज निकलने में कितना दम लगाना पड़ रहा है। हम ऐसा दुख नहीं देख सकते!

  2. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'

    दुनिया बावली हो गई लगती है अमां इतना बेकार का खर्च काहे करते हैं, सच-झूठ से आगे भी सब अंतर्जाल पर दिख सकता है बस गूगल देव की शरण में जाइए, वो एकदम सही जगह पहुँचा देंगे। ;)

  3. तरूण

    जनता हो सकता है देखने जा रही हो कि आखिर किसी के पुट्ठे बोल कैसे सकते हैं ;) लेकिन इतना पता चल रहा है कि आने वाली पीढी बावरी होती जा रही है

  4. gourav kumar soni

    bahut hi shandar bhai saheb.kya khoob likha h aapne.

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