ब्लाग मस्ती – दूसरों का माल कैसे चुराएं?

 जमे जमाए ब्लागर्स, जो कभी भी ब्लाग चोरी के किसी भी जुर्म में पकडे नही गए वे लगातार नेट से दूसरों का माल चुराते हैं और उनकी वाह-वाही होती है! आप भी प्रोफ़ेशनल सफ़ाई से दूसरों का माल उडाईये और वाह वाही पाईये! रातों रात सफ़ल ब्लागर बनिये! कैसे? सूत्र याद रखिये -  

Copy from one, it’s plagiarism; copy from two, it’s research.

हर ब्लागर कुछ पुराना पडने पर मौलिकता से वैसे ही नाता तोड लेता है जैसे हवाई जहाज स्पीड पकडते ही हवाई पट्टी से! फ़िर उन्हें री-फ़्यूलिंग के लिये मात्र हवाईपट्टी की जरूरत पडती है और हिंदी में तो ये करना एकदम आसान है!

सबसे पहले थोक में ब्लाग लिखने के लिये अपनी स्टाईल और छवि विकसित करने की जरूरत होती है और उस पर वैसा भरोसा जैसे बुश को इराक पर की गई इंटेलिजेस में हो!

बीच-बीच में पाठकों को झटका देने के लिए कोई ना कोई स्टंट करते रहिए – विवाद गढना, विवाद में पडना, विवाद सुलझाना, बिलावजह राय देना, जब राय मांगी जाए मौन धर लेना आदी. तो सबसे पहले अपने ब्लाग की सरंचना तय कीजिये.

इसके लिये वो क्षेत्र पकड लीजिये जिनमें आप कच्चे हों और कोई एक काम जिसमे आप पक्के हो  फ़िर अपनी स्टाइल विकसित कीजिये -

१: डाईल्यूशन: गुलज़ार की तरह अगर आप सृजनात्मक हैं लेकिन आपकी सृजनात्मकता को किसी उत्प्रेरक की जरूरत लगती है – जनता की मांग लगती है. आपने ढेर सारा साहित्य पढ रखा है  विषयों/रसों/मूड्स/शेड्स के हिसाब से उसका वर्गिकरण कर के रखिये! फ़िर जहां जैसी जरूरत पडी वैसी कविता/उक्ती का टुकडा घुसा दिया. मन आया तो मनपसंद चीज को हाईलाईट करने के लिये ही पूरी रचना लिख डाली. ये गुरुदेव [फ़ुरसतियाजी] की स्टाईल है! हमेशा भारी भरकम बात को पच जाने की हद तक डाईल्यूट कर के लिखें. इस प्रकार का साहित्य घुसेडू लेखन, वाह! सब लोग तरीफ़ करते हैं – हम तक ये, वो लाने के लिये धन्यवाद – आदी! यही काम आप राजनैतिक/आर्थिक/पर्यावरण आदी में करें बहुत स्कोप है.

२. अनु-वादन:  मान लीजिये आप बहर, पहर, उर्दू और वज़न में कच्चे हैं लेकिन शायरी का शौक है. तकनीकी पत्र-पत्रिकाएं पढते हैं लेकिन प्रोग्रामिंग में हाथ तंग है दूसरे शब्दों में प्राकृतिक आलोचक हैं.  हिंदी व्याकरण में पक्के हैं - आप  अंग्रेजी में लिखे तकनीकी लेखों का हिंदी करते रहिए. किसी को आपकी प्रोग्रामिंग और अंग्रेजी कमजोर होने पर शक भी नही होगा और हिंदी की सेवा होती रहेगी. अंत में गज़ल की जगह व्यंजल लिखिये - ये रवि भाई का स्टाईल है!

३. फ़्री-स्टाईलिंग: आपका लेखन से वही रिश्ता है जो अश्वेत रैपर का शास्त्रीय संगीत से. बचपन गुंडे मवालियों के बीच खेलते बीता है, लेकिन घर वालों के दबाव में पढ-लिख गए हैं. पूरा व्यक्तित्व ८-१० संस्कृतियों की खिचडी है. वाह आप ई स्वामी के चेले बन जाईये! आप ऐसे विषय चुनिये जिनके बारे में कोई बात ना कर रहा हो – मसलन सब अगर क्रिकेट को रो रहे हों तो आप वन्यजीवन को रोने लगें. सब अगर विवादों मे पडे हों तो आप भरवां ऊंट बनाने की रेसिपी देने लगें. लोग गंभीर होने के मूड में आएं तो मस्ती करने लगें. आप को भी पता ना हो की आपकी अगली मूव क्या है! एक वाक्य की बात दो में लिख कर अतुकांतक कवि हो जाएं कोई वाह वाह करे तो  माल कहां से मारा भी बताएं - ऐसे में आपने कहीं  से कुछ चुराया-उठाया इस पर ध्यान ही नही जाता. आपके अस्तित्व के लिये बीच बीच में एक-आध हिट देना, जरूरत पडने पर तकनीकी स्टंट करते/कराते रहना जरूरी हैं. 

४.  मेटा-बीटा-ओपन-सोर्स रिसोर्स: किसी विदेसी का काम देखते ही आपको लगता है “अये स्साला, ये मैने क्यों नही सोचा? किसी और देसी से पहले कैसे चेपूं इसे?” आप फ़िट हैं इस कतार में.  ये दूसरों के काम की सीधी चोरी नहीं है लेकिन उसका चतुराईपूर्ण पुर्नप्रयोग है क्योंकी जो भी माल उठाया या तो वो फ़्री का था या ओपन-सोर्स का था- कोड तैयार था. किसी और ने जुगत लिखी – आपने लगा ली, किसी और नें कोई आईडिया अंग्रेजी में लगाया आपने हिंदी में लगा दिया. लेखन में हाथ जरा तंग है, मात्रा की गलतियां करते हैं - तकनीक ही आपका सहारा है! मेटा-ब्लागिंग, बीटा वर्जन्स, हिंदीकरण पर हाथ अजमाई जैसे काम – वाह वाही फ़ोकट की. हमारा ब्लागमंडल चलता ही ऐसे देसियों की कारस्तानी के दम पर है. सूची लंबी है – देबू, पंकज, जीतू कुछ उदाहरण है! नये लडके तैयार हो रहे हैं आशीष,अमित, श्रीश, पंकज बैंगानी इस मशाल को आगे ले जाएंगे पूरा भरोसा है.

५. रायचंदजी: आपका अपनी विद्बत्ता पर आत्ममोहित होना पहली शर्त है. आपको कुछ करना नहीं है – केवल दूसरों के क्रियाकलाप में मीनमेख निकालनी है. दार्शनिकों के अंदाज़ में फ़लसफ़े देने हैं – शब्दाडंबर करना है – समूह के भविष्य को लेकर चिंतित होना,  नीति/दिशा/राह/मंजिल/सरोकार की बातें करनी हैं. इसके लिये पहले आप पश्चिम के अपने किस्म के घोचूओं और घोंघों के लेख पढिये फ़िर उसे देसी परिपेक्ष्य में पेल दीजिये – अगर कोई आपकी बात पर ध्यान ना दे तो अंग्रेजी की कडियाँ भी डाल दीजिये ” भईये हम ही नही सारे बोल रहे हैं!” बताईये इसमें चोरी वाली क्या बात है? उदाहरण देने की जरूरत नही है इस प्रकार के तीन ब्लागर्स उपलब्ध हैं – दो बनने की कतार में हैं.

६. प्रश्नकर्ता-ईंटर्व्यूकर्ता: आप दिखाईये आप ब्लागिंग में नए हैं, विस्मित हैं, प्रभावित हैं! ऐसे प्रश्न कीजिये की सब आपको अनाडी समझने लगें! इसमे किसी और का लेखन चुराने ने बजाए उनसे अपने ब्लाग पर लेखन करवाने की कला का प्रयोग होता है! येडा बन के पेडा खाईये! विद्यार्थी/शोधार्थी/आवलोकी हो चुकने का प्रयास कीजिये. लेख के पहले दो पेराग्राफ़ में ब्लागिंग के चरित्र को ना समझ पाने की अपनी कठिनाईयों का रोना रोईये बीच वालों में कंफ़्यूजन का बयान कीजिये और अंत मे सवाल. अगर आप महिला ब्लागर हैं तो आपके ब्लाग से लंबी टिप्पणियों की कतार होगी. सफ़लता आपकी राह देख रही है. लोग अपना माल खुद आपके घर धर जाएंगे नही तो जीतू भाई जबरदस्ती धरवा लेंगे. पुरुष ब्लागर हैं तो दूसरों के इंटर्व्यू छापिये, उनसे लिखवाईये, बुलवाईये. प्रशंसा तो देवों को भी प्रसन्न करती है फ़िर ससुरे ब्लागर क्या चीज हैं. ये चोरी नहीं है व्यक्तित्व प्रबंधन है  – हींग लगी ना फ़िटकरी और रंग भी चोखा!

क्रमश: 

16 responses to “ब्लाग मस्ती – दूसरों का माल कैसे चुराएं?”

  1. तरूण

    अब लगे हाथ ऐसे ही बता दीजिये हम किस वाले में फिट बैठते हैं, कहीं बैठते भी हैं या आम जनता की भीड में आते हैं, लगता है आप चिट्ठे पढते ही नही उनका अच्छा अवलोकन भी करते हैं। ;)

  2. अनूप शुक्ला

    पिटोगे बबुआ, पिटोगे! सच ऐसे बयान नहीं किये जाते! वैसे एक बात काबिले संशोधन है। हम जो लिखते हैं वह बताकर लिखते हैं कि ये फलाने का है वो अलाने का है। ऐसा करना चोरी में तो नहीं आना चाहिये। ये डकैती हो सकती है चोरी नहीं। हम तो इस्टाइल तक बताके लिखते हैं। पिछले लेख में तकनीक पालकी लिखा तो बताया कि ये शब्द राकेश खंडेलवाल की इस्टाइल का है। बाकयदे आभार व्यक्त किया है। ये चोरी नहीं है, डकैती मान सकते हैं। वैसे तुमको बतायें कमलेश्वर कहा करते थे- मेरी उमर ५५५० साल है। इसमें ५० साल उनकी उमर ५५०० साल उनके पूर्वज लेखकों की उमर। अपने पूर्वजों का माल हमारे बाप का माल है। उसमें कैसी चोरी। भाई हमे चोरी के आरोप से बरी करो,भले ही डकैती का मुकदमा चलाओ। :)
    वैसे लेख चौकस है। आगे का इंतजार है। बहुत दिन बाद मौज-मजे के मूड में आये हो। इसे बनाये रखो। दुनिया में कुछ और है नहीं बस कुछ दिन की मौज है। ले लो! :)

  3. सृजन शिल्पी

    क्या सूक्ष्मावलोकन है, आपका! सूक्ष्मदर्शिता और दूरदर्शिता का अदभुत समन्वय!

  4. शशि सिंह

    हा हा हा… बहुत खुब। [:)] एक सवाल: उपरोक्त छह वर्गीकरण के बाहर क्या हिंदी ब्लॉगिंग का अस्तित्व है? यदि है तो आपका यह सिद्धांत उन्हें मौलिकता का प्रमाण पत्र बांट रहा है… [;)] तरूण भाई खुश हो जाइये स्वामीजी ने हमें मौलिक कहा।

  5. Pratik Pandey

    बहुत खूब स्वामी जी :)

  6. अभय तिवारी

    लगातार दूसरी प्रविष्टि में अनुभवजन्य ज्ञान..

  7. जगदीश भाटिया

    वाह! एकदम मौलिक लेख :)

  8. kakesh

    अभी तो बहुत सी श्रेणीयां शेष हैं.. आपका क्रमश: ढाढस बंधाता है कि आगे आप और लिखेंगे . वैसे आजकल एक ये क्रमश: वाली श्रेणी भी विकसित हो रही है..जो एक पोस्ट में अपनी बात नहीं रखते वरन क्रमश्: चस्पा कर गायब हो जाते हैं अब लोग इनके ब्लौग पर आकर खोजते रहते हैं कि क्या कुछ नया आया और नया न मिलने पर पुराना ही पढ़कर चले जाते हैं. इस श्रेणी में हम भी आते हैं.

  9. सागर चन्द नाहर

    मुझे भी अपना शिष्य स्वीकार करें, गुरुदेव :)

  10. Debashish

    होली तो आसपास नहीं पर इतनी धुलाई या फिर किसी का “परनिंदा द्वारा सफल ब्लॉगर कैसे बनें” का नुस्खा आजमाया जा रहा है। ;)

  11. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'

    बहुत खूब स्वामी जी, ये स्पैशल प्रवचन हमारे लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा, पक्का विश्वास है। आगे भी ये प्रवचन जारी रखा जाए। :)

    हमारा ब्लागमंडल चलता ही ऐसे देसियों की कारस्तानी के दम पर है. सूची लंबी है – देबू, पंकज, जीतू कुछ उदाहरण है! नये लडके तैयार हो रहे हैं आशीष,अमित, श्रीश, पंकज बैंगानी इस मशाल को आगे ले जाएंगे पूरा भरोसा है.

    हे हे आपका भरोसा टूटने नहीं देंगे। ;)

  12. पंकज नरुला

    स्वामी दादा

    बढ़िया चिपका रहे हो। देबू, पंकज, जीतू यह आपने तीन नाम लिए इसमें आप का शुमार भी है। साथ ही देबू दा ऑरिजनल प्रोग्रामर भी हैं। चिट्ठा विश्व अपने आप में एक बहुत सही प्रयोग है। छोटा सा CMS ही है और सारो कोड देबू दा और शायद पद्यजा ने लिखा है।

    बाकी बाबू अपनी रोटी तो COTS के जरिए चलती है तो वैसा ही स्टाईल होगा हाँ COTS की जगह FOTS जरुर हो गया हिन्दी के लिए।

    पंकज

  13. संजय बेंगाणी

    अपना लेखन (?) तो श्रेणीयों से बाहर रहा. राहत की साँस ली.
    जो बात हमें नहीं पता आपको कहाँ से होती :)

  14. रवि

    “…“परनिंदा द्वारा सफल ब्लॉगर कैसे बनें”…”

    मुझे भी ऐसेइच लग रहा है…..

  15. रवि

    :)

    ऊपर छूट जो गया था :)

  16. मसिजीवी

    सही अवलोकन और आपको तो कोई कन्फ्यूजन भी नहीं है।
    अच्‍छा वर्गीकरण अच्‍छी मौज

Leave a Reply

गूगल ट्रांसलिटरेशन चालू है(अंग्रेजी/हिन्दी चयन के लिये Ctrl+g दबाएं)