
मिर्ची सेठ की चाय-लैब वाली पोस्ट बहुत बढिया लगी.
हमारे मालवा में चाय की ‘टोक’ होती है. वहम है की घर से किसी काम के लिये निकलते बंदे को गलती से ‘चाय पीयेंगे?’ पूछ लिये जाने पर, चाहे देर हो रही हो, चाय पी कर ही निकलना चाहिए अन्यथा मंतव्य पूरा नही होता. कुछ भी ऊट-पटांग हो सकता है. गरज़ ये की ज़िक्र से ही तलब शुरु.
भारत वाली टेटली चाय-पत्ती हाल ही में भारत से आया एक मित्र लाया है! भारत में तौल(वजन) से खुल्ली बिकने वाली, विशिष्ट दुकानों पर मिलने वाली खास अनुपात में मिलाई गई चाय-पत्तीयों की बात ही अलग होती है. जब भी भारत जाता हूं , ज़रूर लाता हूं.
कालेज की कटिंग चाय की याद दिला देने वाले संकरे और लंबे कांच के गिलास ढूंढ लाया हूं, इनमें चाय का मज़ा दुगुना हो जाता है. शक्कर के डब्बे को लेबल करने की जरूरत इसलिये महसूस की गई की हमनें एक बार शक्कर को नमक समझ कर सब्जी में डाल दिया था. यहां शक्कर भारतीय दानेदार चीनी से महीन होती है. ये बादशाह चाय मसाला एकदम बेकार है. अभी भी एक अदद पैक्ड मसाले की तलाश में हूं. ताज़ो चाय, जो स्टारबक्स वाले २ डालर में एक कप बना कर बेच रहे हैं, उस का मुफ़्त सेंपल आया था कहीं से! ब्लैक टी ”अवेक” वाला फ़्लेवर ठीक है, जब तक मुफ़्त आता रहेगा! दालचीनी और इलायची कूटने की ओल्ड-स्कूल खरल प्रयोग कर रहा हूं, पेप्पर मिल्ल वाला मिर्ची सेठ का आईडिया नोट कर लिया है!
चायछन्नी/चलनी इंडिया से लाई गई है! चित्र में चाय का पानी गर्म होता दिखाई दे रहा है. चाय जल्दी बने इसलिये साथ ही माईक्रोवेव ओवन में में दूध १.३५ मिनट में गर्म!
ये सुनहरी टीप मुझे फ़ूड नेटवर्क से मिली थी की अदरक कतरनी पर प्लास्टिक रैप की एक लेअर लगा कर अगर अदरक को कतरा जाए तो उसे ग्रेट के छेदों और उपर नीचे से निकालना नही पडता – सफ़ाई का झंझट नहीं, सीधे पन्नी पर से एक चम्मच में ले कर डाल दो पतेली में.
मेरी पसंद – मसाला चाय!






इन्दौर में नेहरू मार्केट में शंकर सुगंधी नाम से एक दुकान हैं, दूध व चाय मसाला शानदार मिलता है वहां, वैसे M D H का चाय मसाला इस्तेमाल करके देखें, अच्छा है।(आजकल मैं वही कर रहा हूं)
आप दूध को माइक्रोवेवे में गरम कर लेते हैं, वैसे चाय जितना ज्याद अच्छे से उबलेगी दूध के साथ, उतना ही मजा आता है, और हाँ, अदरक भी कतरने के बजाय कूट कर डालकर देखें
आ…हा….चाय की महक यहाँ तक महसुस कर रहा हूँ.
पढ ली पोस्ट . खुश!!
अब चाय हो जाए.
Abe kitchen to bahut saaf suthri rakhe ho, lagta istemaal mein nahi aati.
Aajkal Khana hotel se mangwa rahe ho ka?
-jitu
यूँ तो मैं हमेशा पत्ती वाली चाय पाँच मिनट ब्रू करके पीती हूँ पर ये मसाला चाय तस्वीर में कडक दिख रही है ।
आज सब भाई लोग चाय पिलाने पर तुले हैं, अच्छा है पिछले दिनों के चिट्ठों के हेडिंग पढ़कर सर में दर्द होने लगा था पर……यह क्या मैं भी कितना भुलक्कड़ हूँ मैं तो चाय पीता ही नहीं….:(
चाय से एक बात याद आई आजकल छोटे नवाब सैफ एक चाय के विज्ञापन में कहते हैं, ” इस चाय पत्ती को पानी में नहीं पत्ती पर पानी डालो” भाई समझ में नहीं आता कि इससे चाय के स्वाद पर क्या फर्क पड़ता होगा। कुछ समझाओ जरा हमें भी और सैफ को भी।
पोस्ट ने वाकई तलब जगा दी है। अपने लिए मानो चाय नहीं देसी ढाँचे का पैट्रोल हो गई ये तो। चाय की महक मिलते ही एक ताज़गी आ जाती है। अब तो अभी के अभी चाय पीना ही पड़ेगी।
बहुत अच्छे। आपका अदरक वाला सुझाव कॉपी में नोट कर लिया है।
बढिया चाय राजवाड़े वाली!!
बिलकुल सुपर चाय बनाई है। पीने का मन कर रहा है।
आज मालूम पड़ा कि आप मालवी है। वाकई मालवा में चाय की टोक को बहुत ही खराब, शनि की साढ़ेसाती से ख़राब माना जाता है। इंस्टेंट असर होता है ना इसलिए। वैसे आजकल लोगों ने एक उपाय खोज लिया है यदि चाय की टोक लगी तो एक चम्मच शकर फाँक कर घर से निकलो, टोक बेअसर हो जाएगी।
यहाँ तो नितिनजी बागला भी इन्दौर की बात कर रहे हैं। इन्दौरी हैं क्या?
अब अपन को चाय अच्छी नहीं लगती, अपन तो कॉफ़ी के रसिया हैं। कोई कॉफ़ी वगैरह का नुस्खा बताईये ताकि अपन भी लाभ उठा सकें।
क्या बात स्वामीजी जीतू की बात का जवाब तो दे देते, चाय तो एकदम जायकेदार लग रही है
जीतु जी के सवाल का जवाब दिया जाये !
अब तो मै भी अपने किचन की तस्वीर लगाने की सोच रहा हूं।
feeling fresh after this cup of tea.
भईया हम ने तो तीन साल से चाय ही पीनी छोड़ दी। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।
भाई मज़ा आ गया चाय पी के। लगता है आप भी
हमारी तरह टेट्ले पीते हैं। टेट्ले मेरी भी फ़ेवरिट चाय है।