गोरे रंग का ज़माना… टिंग… टिडीं‍ग टिंग

आज एक अमरीकी लडकी का ब्लाग पढा, वो देसी मरदों से परेशान है इतनी की ब्लाग पेल मारा!

एक ही पोस्ट है इस ब्लाग में, आज ही लिखा गया है. टेक्नोराती पे सर्च मारी इन्डिया पे, ये मिल गया.
ब्लाग की कडी आगे देता हूं पहले ये जान कर बहुत दुख हुआ की –

१) भारतीय मर्दों ने अपने तौर तरीके नही बदले जिसका नुकसान उन्हे खुद उठाना पड रहा है – उनकी शारीरिक जरूरते‍ पूरी नही होतीं, हवस शान्त नही होती क्योंकि हमारे यहां विवाह पूर्व दैहिक संबंध बनाने पर स्त्रियों को चरित्रहीन समझा जाता है. यह समाज मे बुरा माना जाता है और बदनामी आदी का टंटा होता है. दोनो पार्टियों का नुकसान – क्या हासिल है बताईये?

२) चलो हवस शान्त नही होती माना, पर अशालीनता करने पर तो रहे-सहे आसार भी जाते रहेंगे, मूरख देसियों मे ये समझ भी नही है. मुझे लगता है सभ्यता से लडकियां पटाने का प्रशिक्षण हमारे लडकों को बाकायदा फ़ोकट में दिया जाना चाहिए. आदमी गरीब हो या अमीर कम से कम उसे प्रकृति प्रदत्त सुखों से सामाजिक तौर-तरीकों के चलते विमुख ना रहना पडे और बेहूदगी से बाज आए. बिना शोर-शराबा मचाए भी तो काम किया जा सकता है! धीरे-धीरे समाज “सुधरेगा”! काम-सूत्र वाले देश मे इस बात का फ़्रस्टेशन – नाइंसाफ़ी है .. साला तुर्कों का या मुगलराज चल रहा है क्या? तो हो ले हर हर वात्स्यायन!!
(कौन वात्स्यायन? उसी ने पेली थी काम-सूत्र, घोंचू!)

३) निरंतर का ताजा अंक गवाह है, गोरे रंग का मरकिट उपर है – इस मामले मे उदारता बरती जाए -जानता हूं मुश्किल काम है मगर फ़िर भी कोशिश की जाए!

४) ब्लाग पढ कर कई और फ़िक्रें ताजा हो गईं उन पर फ़िर कभी!

अब निरीह कन्या के ब्लाग की कडी ये लो!

3 responses to “गोरे रंग का ज़माना… टिंग… टिडीं‍ग टिंग”

  1. Pankaj Narula

    Another blog worth reading

    http://cvillalon.blogspot.com/

  2. अनूप शुक्ला

    पताकर भइये कन्याराशि का कष्ट दूर कर उधर ही अमेरिका में.

  3. फ़ुरसतिया » बदरा-बदरी के पिछउलेस

    [...] या था कि बदली चिट्ठा लिखेगी ये मुआकलुआ मुझे छेड़ रहा था। वो छेड़ने लगा ,ये [...]

Leave a Reply

गूगल ट्रांसलिटरेशन चालू है(अंग्रेजी/हिन्दी चयन के लिये Ctrl+g दबाएं)