समंदर का गहरा नीला पानी, मनोहारी सूर्यास्त, तटों पर डॉल्फ़िन्स की आवाजाही, रेतीले बीच, खुशनुमा मौसमों के पाले हुए वो-वो वनस्पति और जीव-जन्तु जो कहीं और ना मिलें, विश्वस्तरीय खाने के अड्डों को सजाए ऐतिहासिक शहर में ख्यातिप्राप्त लोगों की बसाहट .. एक ऐसा जिप कोड जिसमें बसने के लिये लोग जान दें. कुदरत का दिया क्या नहीं है यहां.. इसीलिये मैं इधर बार-बार आना पसंद करता हूं .. ये है अमरीकन रिवियेरा .. सैंटा बारबरा, केलिफ़ोर्निया!
आज तीसरा दिन था..शाम को काम से निपट कर इधर के दफ़्तर से निकला.. १० मिनट बाद, मैंनें नीली कन्वर्टिबल सीबरिंग पार्क की, और होटल के पीछे वाली पहाडी की ओर नज़र डाली! कमरे में जाने से पहले एक बार और पहडी पर टिमटिमाती रौशनियां और उस पे चमचमाता चांदी का पूरा चांद देखना चाहता था. लेकिन इस कोण से मुझे जो दिखा उसके लिये मैं तैयार नही था – तेज़ लाल आग की एक धार पहाडी से नीचे की ओर तेजी से बहती आ रही थी.
अगले क्षण में तो जैसे मुझे सन्नीपात मार गया.. “गए बेटा..अपनी भूरी पिछाडी इसकी पहूंच से बचाने में बहुत देर हो गई अब?” ”बाकी लोग कहां हैं?… क्या चल्ल रियाए बाबा??”
हालांकि मैं चमक गया था, मुझे जल्दी ही एहसास हुआ की मैं जंगली आग देख रहा, कोई ज्वालामुखी का धधकता लावा नहीं था .. और मैं सुरक्षित दूरी पर भी था! मैंने एक जोडे को उसी दिशा में देखता पाया. उनकी तरफ़ हाथ हिलाने पर वे बोले “ये टीवी पर भी दिखा रहे हैं .. उपर घर भी जल रहे हैं!”
मैं अपने कमरे में गया और टीवी चलाई. अब मुझे दूर से सायरनों, फ़ायर फ़ाईटर वाहनों के हॉर्न, आकाश में हेलिकॉप्टर्स का शोर सब सुनाई दे रहा था. दुनिया के सबसे महंगे इलाके में से एक में बने मल्टी-मिलियन्स के घर मेरी आंखों के सामने फ़ैलती जंगल की आग में जल रहे थे. टीवी वालों ने इसे टी फ़ायर का नाम दिया था. मैंने लॉस एन्जिलीस में बसे मित्रों मे से एक को फ़ोन लगाया -
“अबे पहाडी पे आग लगी है.. सेलेब्रिटी रिवियेरा जल रहा है!”
“हा हा.. इस तरह की आग तो केलिफ़ोर्निया के जंगली इलाकों में लगती रहती है यार!” उसे खबर से कोई फ़र्क नहीं पडा. ये एक बहुत दु:खद परिस्थिती लगी मुझे. वो और उसके जैसे केलिफ़ोर्निया में रहने वाले लाखों अब इन जंगली आगों के बारे में सुन-सुन कर अभ्यस्त हो चुके! वे अब इस नाटकीय परिवेश परिवर्तन के लिये असंवेदनशील हो गए हैं! ये दुनिया के सर्वाधिक साधन सम्पन्न और पढे लिखे लोगों में से हैं – तब ये हाल है!
मैं कार में वापस आया. धूंए का एक गहरा काला बादल पहाडी के हिस्से को ढंक चुका था. चांदी का चमचमाता चांद अब नारंगी नज़र आने लगा था. “ये आग तो हर पल फ़ैलती जा रही है!” सोचते हुए मैं डाऊनटाऊन में ठहरे अपनी टीम के दूसरे लोगों से मिलने निकल पडा.
रास्ते में मैंने नोटिस किया की लोग काफ़ी शांत थे. वो कोई टीवी से चिपके हुए नहीं थे .. रेस्टोरंट्स में बैठे लोग बातचीत के बीच बीच में राहत कार्य की प्रगति का जायजा ले रहे थे. अब हम लोग एक थाई रेस्टॉरंट में बैठे थे, सिंगापुर से इन्दौर मूल का एक बंदा मेरे समूह में आया हुआ था .. हम दोनो में जल्दी ही दोस्ती हो गई!
खास प्रतिष्ठानों को छोड, थोडी देर के लिये शहर भर की रौशनी बंद कर दी गई थी. लोग इस पावर-आऊटेज का शोर मचा कर स्वागत कर रहे थे. एक दो बार की लपक-झपक के बाद अब अंधेरे में हम कैंडल लाईट डिन्नर कर रहे थे .. उतना बुरा हाल नहीं था.. बस ये था की लोग क्रेडिट कार्ड के बजाय कैश पेमेंट कर रहे थे.
मैं दोबारा होटल की ओर कार चला रहा था… इस बार मेरे साथ सिंगापुर वाला इन्दौरी भी था! मेरे कमरे की बालकनी जैसा आग का “व्यू” हमें डाऊनटाऊन से नहीं दिख रहा था. सिंगापुरवाला इन्दौरी अपनी वाली पे आ गया -
“स्सालों नें जित्ती हराम की कमाई घुसाई घर में .. उप्पर वाले ने बोला ले बेटा एश करो.. अब तो लग गई इनकी!”
“यह देश के सबसे संपन्न इलाकों मे से एक है इनके पास तमाम इन्श्योरेंस हैं.” मैंने कहा!
बालकनी से हम पहाडी से अपनी कारों में उतरे लोगों को होटल के कमरों में जाता देख रहे थे. हमने कुछ से बात की, वे खडे अपने इलाकों की ओर बढती आग से परेशान थे.
“वहां उपर हम जो छोड आए, सामान है… हमारे पूरे परिवार, कुत्तों समेत सुरक्षित हैं और यही महत्वपूर्ण है…काफ़ी समय से इधर बारिश नहीं हुई.. घास इतनी सूख चुकी थी की सूरज की तेज़ रोशनी में ही आग शुरु हो जाए.. साल के इस समय तो हमें कुछ बारिश की आस होती है!”
रात भर इस डर से सो नहीं सका की कहीं हवा का रुख बदला तो हमें भी रातों रात इलाका छोडना ना पडे
“सावन में लग गई आग…दिल मेरा हाऽऽय .. सोया ना सारी रात .. दिल मेरा हाऽऽय के अर्थ नए हो गए” मैंने मन ही मन सोचा!
तो मैं वैश्विक ताप बढने के असर अपनी आंखों से देख कर आ रहा हूं. यहां संजोये गए वीडियो और चित्र शब्दों से अधिक अच्छा बोल लेते हैं..एक नज़र देखियेगा जरूर जो मैंने भी देखा. कल मेरे उस इलाके से निकलने के बाद वहां की आग पर तो काबू पा लिया गया लेकिन लास एंजिलीस उत्तर में एक और इलाके में आग लगी..सुबह खबर पढने तक ५००० और अपने घर छोड के भागे! धरती जल रही है!




खाण्डवतट है, खाण्डवप्रस्थ या खाण्डववन! कौन है अर्जुन जो जला रहा है सब!
क्या आग लगी है ..मैं तो सुरक्षित दुरी से भी देख कर भाग खड़ी होती ..डर लग रहा है
मामला डेंजरात्मक है!
आग देख लगता है कि नुकसान काफ़ी हुआ होगा, पहले ही इंश्योरेन्स वालों की लगी पड़ी है, अब और वाट लगेगी उनकी!!