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	<title>Comments on: राक्षसों का गुरु शुक्र शुभ है क्योंकि वह पार्वती का पुत्र है!</title>
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	<description>यहां पर "कुछ" लिखा है!</description>
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		<title>By: िद्धार्थ जोशी</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5429</link>
		<dc:creator>िद्धार्थ जोशी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jul 2009 08:36:19 +0000</pubDate>
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		<description>ई स्‍वामी जी आप तो वास्‍तव में सबके स्‍वामी हैं। यह संदर्भ तो मुझे पता नहीं था। एक पुस्‍तक है नवग्रहों की जन्‍मकथा। पता नहीं किसने लिखी है लेकिन उसकी लिमिटेड प्रतियां बिकी थीं। बाद में बंद भी हो गई। मैं उस पुस्‍तक को खोज रहा हूं। लेकिन अब लगता है पुराणों में मुझे ये सब कहानियां मिल जाएंगी। 

इस कहानी के लिए एक बार फिर आभार।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ई स्‍वामी जी आप तो वास्‍तव में सबके स्‍वामी हैं। यह संदर्भ तो मुझे पता नहीं था। एक पुस्‍तक है नवग्रहों की जन्‍मकथा। पता नहीं किसने लिखी है लेकिन उसकी लिमिटेड प्रतियां बिकी थीं। बाद में बंद भी हो गई। मैं उस पुस्‍तक को खोज रहा हूं। लेकिन अब लगता है पुराणों में मुझे ये सब कहानियां मिल जाएंगी। </p>
<p>इस कहानी के लिए एक बार फिर आभार।</p>
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		<title>By: amit</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5428</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 19:22:12 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;देवता का गण दानवों का गुरू&lt;/blockquote&gt;
यह एक आम भ्रम है कि हिन्दू मान्यता में देवता और ईश्वर एक ही होते हैं, यानि कि इंद्र, पवन, अग्नि आदि भी ईश्वर और ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश भी ईश्वर। तभी लोग कहते हैं कि इतने सारे भगवान! लेकिन ऐसा नहीं है।

मूल रूप में पहले शिव थे, उन्होंने अपनी सहायता के लिए अपनी शक्ति के एक रूप को विष्णु के रूप में निकाला और विष्णु से ब्रह्मा निकले। यानि कि ईश्वर यही तीन त्रिदेव हैं जो कि वास्तव में एक ही शक्ति हैं, यानि कि परमात्मा एक हैं।

हम जिनको देवताओं के रूप में जानते हैं, जैसे कि इंद्र, पवन, अग्नि, वरूण आदि, ये सब कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे और ये आदित्य अपने सद्‌कर्मों और सद्‌बुद्धि के कारण सुर अथवा देव कहलाए। वहीं कश्यप ऋषि और उनकी दूसरी पत्नी दिति के पुत्र यानि कि दैत्य अपने कुकर्मों और कुबुद्धि के कारण असुर अथवा राक्षस कहलाए।

मोटे तौर पर आप इस सबको यदि किसी कंपनी के तौर पर देखें तो शिव कंपनी के प्रेज़िडेन्ट यानि कि प्रधान हैं, विष्णु चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव ऑफिसर हैं जिनका काम कंपनी को चलाना है, ब्रह्मा चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं जिनका काम कंपनी के ऑपरेशन्स को देखना है (यानि कि सृष्टि में सृजन करना)। देवता लोग अपने-२ विभागों के प्रधान हैं, यानि कि डिपार्टमेन्ट हैड और उनके राजा इंद्र जनरल मैनेजर हैं जिनको सभी डिपार्टमेन्ट हैड रिपोर्ट करते हैं। मैनेजर इंद्र फिर आगे ब्रह्मा अथवा विष्णु को रिपोर्ट करते हैं और यदि आवश्यकता हो तो ब्रह्मा अथवा विष्णु के कहने पर शिव शंकर को भी रिपोर्ट करते हैं।

ईश्वर सभी के लिए एक है, चाहे वे सुर हों या असुर, सभी त्रिदेव के किसी न किसी रूप को पूजते हैं और शक्ति हासिल करते हैं, पुराण इस सब का विस्तृत व्याख्यान करते हैं! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>देवता का गण दानवों का गुरू</p></blockquote>
<p>यह एक आम भ्रम है कि हिन्दू मान्यता में देवता और ईश्वर एक ही होते हैं, यानि कि इंद्र, पवन, अग्नि आदि भी ईश्वर और ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश भी ईश्वर। तभी लोग कहते हैं कि इतने सारे भगवान! लेकिन ऐसा नहीं है।</p>
<p>मूल रूप में पहले शिव थे, उन्होंने अपनी सहायता के लिए अपनी शक्ति के एक रूप को विष्णु के रूप में निकाला और विष्णु से ब्रह्मा निकले। यानि कि ईश्वर यही तीन त्रिदेव हैं जो कि वास्तव में एक ही शक्ति हैं, यानि कि परमात्मा एक हैं।</p>
<p>हम जिनको देवताओं के रूप में जानते हैं, जैसे कि इंद्र, पवन, अग्नि, वरूण आदि, ये सब कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी अदिति के पुत्र थे और ये आदित्य अपने सद्‌कर्मों और सद्‌बुद्धि के कारण सुर अथवा देव कहलाए। वहीं कश्यप ऋषि और उनकी दूसरी पत्नी दिति के पुत्र यानि कि दैत्य अपने कुकर्मों और कुबुद्धि के कारण असुर अथवा राक्षस कहलाए।</p>
<p>मोटे तौर पर आप इस सबको यदि किसी कंपनी के तौर पर देखें तो शिव कंपनी के प्रेज़िडेन्ट यानि कि प्रधान हैं, विष्णु चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव ऑफिसर हैं जिनका काम कंपनी को चलाना है, ब्रह्मा चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं जिनका काम कंपनी के ऑपरेशन्स को देखना है (यानि कि सृष्टि में सृजन करना)। देवता लोग अपने-२ विभागों के प्रधान हैं, यानि कि डिपार्टमेन्ट हैड और उनके राजा इंद्र जनरल मैनेजर हैं जिनको सभी डिपार्टमेन्ट हैड रिपोर्ट करते हैं। मैनेजर इंद्र फिर आगे ब्रह्मा अथवा विष्णु को रिपोर्ट करते हैं और यदि आवश्यकता हो तो ब्रह्मा अथवा विष्णु के कहने पर शिव शंकर को भी रिपोर्ट करते हैं।</p>
<p>ईश्वर सभी के लिए एक है, चाहे वे सुर हों या असुर, सभी त्रिदेव के किसी न किसी रूप को पूजते हैं और शक्ति हासिल करते हैं, पुराण इस सब का विस्तृत व्याख्यान करते हैं! <img src='http://hindini.com/eswami/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: eswami</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5427</link>
		<dc:creator>eswami</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 18:13:10 +0000</pubDate>
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		<description>@ज्ञान दत्त पाण्डेय: हां इसका डीटेल वामनावतार की कथा में है. 
जब विष्णु वामनावतार ले कर बाली से उसका राज्य लेने के लिये पहुंचते हैं तो शुक्र उन्हें पहचान लेते हैं. शुक्र बाली को चेतावनी देते हैं कि वे उस वामन को बाहर निकाल दें, क्योंकि वो विष्णु का ही अवतार है. तथा उसे कुछ भी दान आदी देने का संकल्प ना करें. बाली शुक्र की बात नहीं मानता. बाली के राज्य को बचाने के लिये वे बाली दान देने के लिये जिस बर्तन में संकल्प का जल ले कर छोडने वाले होते हैं उस जल को गिरने से रोकने के लिये उस बर्तन में चले जाते हैं. विष्णु एक तिनका इस बर्तन में गए शुक्र की आंख में चुभो देते हैं तब से वे एक आंख वाले हो जाते हैं.
वैसे ज्योतिष में शुक्र से आंखों के गुण भी ज्ञात किये जाते हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ज्ञान दत्त पाण्डेय: हां इसका डीटेल वामनावतार की कथा में है.<br />
जब विष्णु वामनावतार ले कर बाली से उसका राज्य लेने के लिये पहुंचते हैं तो शुक्र उन्हें पहचान लेते हैं. शुक्र बाली को चेतावनी देते हैं कि वे उस वामन को बाहर निकाल दें, क्योंकि वो विष्णु का ही अवतार है. तथा उसे कुछ भी दान आदी देने का संकल्प ना करें. बाली शुक्र की बात नहीं मानता. बाली के राज्य को बचाने के लिये वे बाली दान देने के लिये जिस बर्तन में संकल्प का जल ले कर छोडने वाले होते हैं उस जल को गिरने से रोकने के लिये उस बर्तन में चले जाते हैं. विष्णु एक तिनका इस बर्तन में गए शुक्र की आंख में चुभो देते हैं तब से वे एक आंख वाले हो जाते हैं.<br />
वैसे ज्योतिष में शुक्र से आंखों के गुण भी ज्ञात किये जाते हैं.</p>
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	<item>
		<title>By: Dr.Arvind Mishra</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5426</link>
		<dc:creator>Dr.Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 16:19:22 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत बहुत आभार इस मिथकीय संदर्भ के लिए -दरअसल पुरा (न ) कथाओं में इतना घाल्मेल है  की कभी कभी बात की मर्म तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जता है -आपने मोती निकाल ही लिया -शुक्र और वीर्य की व्युत्पत्ति भी बताई ! ग्रेट !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत बहुत आभार इस मिथकीय संदर्भ के लिए -दरअसल पुरा (न ) कथाओं में इतना घाल्मेल है  की कभी कभी बात की मर्म तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जता है -आपने मोती निकाल ही लिया -शुक्र और वीर्य की व्युत्पत्ति भी बताई ! ग्रेट !</p>
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		<title>By: ज्ञान दत्त पाण्डेय</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5425</link>
		<dc:creator>ज्ञान दत्त पाण्डेय</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 16:09:59 +0000</pubDate>
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		<description>सुना है शुक्राचार्य सब को एक आंख से देखते थे। पुराणों में क्या लिखा है?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुना है शुक्राचार्य सब को एक आंख से देखते थे। पुराणों में क्या लिखा है?</p>
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	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/224/comment-page-1#comment-5420</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2009 08:46:12 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/eswami/?p=224#comment-5420</guid>
		<description>कुल मिला कर शिव के गण है शुक्र. बड़ा भारी लोकतंत्र है. देवता का गण दानवों का गुरू.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कुल मिला कर शिव के गण है शुक्र. बड़ा भारी लोकतंत्र है. देवता का गण दानवों का गुरू.</p>
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