सीन देवदास फ़िल्म से है :
चंद्रमुखी: “क्यूं पीते हो इतना की बर्दाश्त ही ना कर पाओ?” (अर्थात्: सदती नहीं है तो पीता क्यों है बेवडे?)
देवदास: “कौन कम्बख्त बर्दाश्त करने के लिये पीता है, हम तो पीते हैं कि यहां बैठ सकें, तुम्हें देख सकें, तुम्हें बर्दाश्त कर सकें!” (अर्थात: हम पी नहीं रहा हूं चिरयौवने माधुरी दीक्षिते, तुम से प्रेरणा पा कर फ़्रेंच पेराडॉक्स पर रीसर्च कर रहा हूं!)
फ़्रेंच पेरॉडॉक्स उस आवलोकन को कहते हैं जिसमें यह सिद्ध हुआ है कि फ़्रेंच लोगों को काफ़ी वसे वाला खाना खाने के बावजूद बाकी दुनिया के लोगों कि तुलना में दिल की बीमारियां कम होती हैं और वे अपेक्षाकृत स्वस्थ्य बुढापा जीते हैं. इसका श्रेय दिया जाता है रेड वाईन को – चूंकी वे रेड वाईन बहुत अधिक मात्रा में पीते हैं. वैसे तो फ़्रेंच पेराडॉक्स पर उंगली उठाने वाले भी बहुत हैं और शराब पीना स्वास्थ्य के लिये हानीकारक माना जाता है, लेकिन अंगूर से बनी शराब को अब इसका अपवाद माना जाने लगा है.
अंगूर से बनी शराब ही क्यों?
अंगूर के छिलके में एक खास किस्म के वानस्पतिक एंटिबायोटिक की उपस्थिती होती है, जिसकी मदद से वे बिमारियों के आक्रमण से फ़लों की सुरक्षा करते हैं. इस एंटीबायोटिक का नाम है रिज़्वेरट्रॉल (Resveratrol). पता लगाया गया है कि रिज्वेरट्राल आयू बढने की गति को कम कर देता है!
रिज्वेर्ट्राल आयू बढने की गति को कम कैसे करता है?
यह मानव शरीर की एक खास जीन जो आयू बढने की गति को कम करती है, उसे सक्रीय कर देता है! दावा तो ये भी किया जा रहा है कि रिज्वेरट्राल एक से दो दशक तक की अवधी तक मानव की आयू बढाने मे सक्षम हो सकता है. रिज्वेट्राल प्राकृतिक और कृत्रिम तरीके से बनाया जाता है और इसे केंसर से बचाने वाला आयूवर्धक माना जाता है.

यह पढ कर मुझे कुछ अजीब भी लगा चूंकि, भारतीय आयुर्वेद में भी द्राक्षासव के आयूवर्धक गुणों का जिक्र आता है और ऐसी रीसर्च हमारे यहां होनी चाहिए थी.
लेकिन क्या आप विश्वास करेंगे कि रिज़्वेरट्राल पर रीसर्च करने वाली कंपनी सिर्ट्रिस(Sirtris) को हाल ही में ग्लेक्सो स्मिथ क्लाईन ने .७५ बिलियन डॉलर्स में खरीदा है! इस पर जबरदस्त रीसर्च जारी है चूंकि सिर्ट्रिस का कहना है कि वर्तमान उपलब्ध रिज्वेर्ट्राल आधारित दवा से से अधिक तेज दवा वे बना रहे हैं – उसमें इतना अधिक रिज़्वेरट्राल होगा जो १००० रेड वाईन की बोतलों को पीने पर मिलता. चिरयौवन के लिये पगलाए अमरीका वाले इस वंडर-ड्रग की बाट जोह रहे हैं. शायद उन्हें लगता है कि अब
लहरा के झूम झूम के ला
फूलों के रस में चांद कि किरणें मिला के ला
कहते हैं उम्रे रफ़्ता कभी लौटती नहीं
जा मैकदे से मेरी जवानी उठा के ला
इन पंक्तियों को नए मायने मिलने वाले हैं.
क्या इसका अर्थ यह भी है कि किसी दिन आधूनिक च्यवनप्राश भी बना लिया जाएगा?
जो होगा वोतो वक्त बताएगा, फ़िलहाल इस विषय पर एक बहुत दिलचस्प वीडियो आपके साथ साझा करना चाहता हूं.
“कौन कम्बख्त बर्दाश्त करने के लिये पीता है? हम तो पीता हूं कि इट्स गुड फ़ार हेल्थ!”
ना समझो के हम पी गए पीते पीते
के थोडा सा हम जी गए पीते पीते – (लिट्रल्ली?)






सुदीर्घ और निरापद जीवन का स्वामी का आशीर्वचन -झूम झूम ,झूम बराबर झूम शराबी !
बढ़ती उम्र को रोक देने और चिर यौवन के लिए चमत्कारी गोलियों के दावे पश्चिमी जगत अक्सर करता रहा है -कभी लीनस पौलिंग ने मुट्ठी पर विटामिन सी खाने की हिदायत दी थी ,फिर किसी ने शहद का नाम लिया और अब बात रिज्वेर्त्राल की जा रही है -और उस प्रणाली को समझा जा रहा है जो शरीर की उम्र घटाने की जेनेटिक प्रक्रिया को चालू कर दे ! बढियां रिपोर्ट और वीडियो भी -शुक्रिया !
हम तो पीता हूँ कि झूम कर नींद आये…
और तू मेरे सपनों में ना आये..
लहरा के झूम झूम के ला
फूलों के रस में चांद कि किरणें मिला के ला
कहते हैं उम्रे रफ़्ता कभी लौटती नहीं
जा मैकदे से मेरी जवानी उठा के ला
-वाकई, जानकारी पूर्ण पोस्ट में झूम गये.
स्वामी जी की जै हो।
Fully enjoy & creativity.
upendra
पीना चालू कर दूँ क्या?
वाह-२ क्या खबर सुनाई (मतलब पढ़वाई) है, धन्य हो!
अपने को तो रेड वाइन काफ़ी पसंद है, अंगूर की बेटी ज़िन्दाबाद, ही ही ही!!
संजय भाई, रोज़ रात के खाने के साथ एक गिलास लेना शुरु कर दो!
सही कहते हैं संजय जी, पीना शुरू करना पड़ेगा अगर ज्यादा जीना है
पीना ही है तो बहाना क्यों?
१. ऑर्गेनिक अंगूर सबसे बढ़िया और पौष्टिक होता है, वाइन जिनसे बनाई जाती है उन्हें पैदा करने में कई संदिग्ध और खतरनाक कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है.
२. ताजे अंगूर में कई विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट (रिवर्सीटॉल सहित), घुलनशील फाइबर, अघुलनशील फाइबर, फ्लेव्नोइड्स , फाइटोकैमिकल्स होते हैं. अंगूर का ताज़ा रस फल से कुछ कम गुणकारी होता है इसमें से फल के पोषक बीज और फाइबर निकाल लिए जाते हैं; शर्करा की मात्रा अधिक होती है जिससे इसे पीने पर खून में इंसुलिन का स्तर एकदम से बढ़ जाता है. वाइन इसी रस का फर्मन्टेड रूप है, इसमें अल्कोहल के साथ खमीर यानि यीस्ट होती है, यह यीस्ट और अल्कोहल का खतरनाक मिश्रण आंतों में कैंडीडा की समस्या पैदा कर सकता है (इन्तेस्ताइनल कैंडीडा लगभग सभी शराबियों और शक्कर के शौकीनों के पाचन तंत्र में पाई जाती है). फर्मन्ट करने पर अधिकतर विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट निष्क्रिय हो जाते हैं, और अल्कोहल के कारण जो अतिरिक्त कैलोरी और इंसुलिन असंतुलन होता है वह अलग.
रिवर्सीटॉल ताजे अंगूर खाकर भी पाया जा सकता है, वह भी सोबर रहकर.
३. यह तथाकथित शोध वाइन लॉबी की एक कोशिश है की शराब को भी ‘स्वस्थ्य आहार’ के एक भाग के रूप में मान्यता दी जाए. कुछ ही दिनों पहले तक डार्क चॉकलेट के फायदों और एंटीऑक्सीडेंट के बारे में कई प्रायोजित शोध निष्कर्ष मीडिया में थे, जबकि कड़वे कोकोआ में मिल्क सौलिड्स और शक्कर मिलाए जाने पर यह भी एम्प्टी कैलोरी से ज्यादा कुछ नहीं है.
४. मुझे यह समझ नहीं आता की ताजे अंगूर से ज्यादा उसके महीनों सड़ाए गए रस में अधिक पोषक तत्त्व कैसे हो सकते हैं, क्या फर्मन्टेशन विटामिन और एंटीओक्सिडेंट की मात्रा नाटकीय रूप से बढा देता है?
५. या फिर यह वाइन लॉबी का नया मार्केट सेगमेंट बनाने का प्रयास है?
फ्रांस के साथ साथ सारे योरोप में औसत जीवन प्रत्याशा 75 वर्ष के आस पास है, अगर फ्रेंच पैराडोक्स की बात में दम होता तो ब्रिटेन, इटली, स्पेन, स्वीडन और डेनमार्क की लाइफ एक्स्पेक्तेंसी फ्रांस से कहीं कम होनी चाहिए थी.
मैं हफ्ते में पांच छः बार ट्रांस फैट में तला मांस और जी भर के फास्ट फ़ूड खाता रहूं, काउच पटेटो बना चेन स्मोकिंग करता रहूं, और रोज़ दो पैग पीकर संतुष्ट हो लूँ की मेरे सारे पाप रेड वाइन ने धो दिए?
यह शोध अभी विज्ञान के अटल सत्य नहीं बने हैं; फिर भी मान लें अगर कंसनट्रेटेड रिवार्सितोल में सचमुच भी कोई फायदा है तो यह कैप्सूल कभी भी आम आदमी की पहुंच में नहीं आने वाला, फर्मेस्युतिकल और मेडिकल लॉबी आने ही नहीं देगी. और अगर आ जाता है तो निश्चित समझिए की यह ह्रदय रोग रोकने में बियर से ज्यादा मददगार नहीं है.
@vivek:
१. विडियो को ३:२५ मिनट पर ले जा देखिये. शोध वाईन के बारे में नहीं है. रिसर्चर्स ने साफ़ कहा है. रीसर्च का फ़ोकस इस बात पर है की रेज्विर्ट्राल आयू के प्रभावों का तेजी से बढना कम कर सकती है यह एक तत्थ्य है – अत: फ़्रेंच पेराडॉक्स आधारहीन गप्प नहीं है! यही बात इतालवी लोगों के लिये भी सच है, वे भी खान-पान में वाईन का बहुत प्रयोग करते हैं.
२. जैसा कहा, ये फ़्रेंच पेराडॉक्स एक आवलोकन का नाम भर है – जैसे फ़्रेंच कट दाडी(goaty) या क्रिकेट का फ़्रेंच कट – फ़्रांसिसी लोग क्रिकेट खेलते तक नहीं!
३. आप एक पौण्ड अंगूर से तकरीबन चार ग्लास रेड वाईन में उपलब्ध मात्रा जितना रिज्वेरट्राल प्राप्त कर सकते हैं.
४. एक ही खबर का अलग-अलग लोगों के लिये अलग अलग मतलब होता है पश्चिमी दृष्टीकोण से इस खबर का मतलब है कि व्हिस्की या वोद्का मत पियो देवदासों, रेड वाईन भले पी लो!
५. संबद्ध जीन को एक्टिवेट करने के लिए कितनी मात्रा में इसे खाना होगा? १००० बोतल रेडवाईन (यानी ५०० पौंड अंगूर) में उपलब्ध मात्रा जितना रेज्विर्ट्राल बिना सिंथेटिक सोर्स के कैसे बनेगा? कीमत क्या होगी? आदी सवाल बाद के लिये ही हैं!