14 responses to “अतीत के प्रस्फ़ुटन –१: आध्यात्मिक टंडीराप्रेम व किशोरी ब्रूक शील्ड्स का पोस्टर”

  1. संजय बेंगाणी

    एक बाप के रूप में अब बोलने (लताड़ने) से पहले ज्यादा सतर्क रहूँगा….

  2. Ghost Buster

    अगर आप कभी आत्मकथा लिखने का निर्णय लें तो मैं “किसी भी” कीमत पर खरीदना चाहुंगा.

    मीट्रिक सिस्टम को य़ुनिवर्सली लागू हुए काफ़ी समय हो गया. सिर्फ़ दस वर्ष पुरानी कार में MPH देखना अजीब लगा. क्या ये रॉल्स-रॉयस है? (या फ़िर आप ब्रिटेन में हैं?)

  3. अनूप शुक्ल

    ये वाली पोस्ट और इसके पहले वाली पोस्ट भी पढ़ी। क्रमश: का इंतजार है। :)

  4. dr.anurag

    ऐसा लगा जीवन के कई फ्लेश बेक एक साथ कतार बद्ध अलग अलग जगह पर एक साथ चलते है .कभी कभी कुछ सालो के अन्तराल पे ….ब्रुक शील्ड का पोस्टर हमने भी अपने दोस्त के बड़े भाई के यहाँ पहली बार देखा था बचपन में तब हमें पता नहीं की की ये जंगल में हंगामा मचाने वाली लड़की है पर मन को भा गयी थी ….बाद में किसी टेनिस स्टार से इनका तगड़ा अफेयर चला ये भी सुना .अपने दिल के अरमान में हमने भी अपने कमरे में इनके पोस्टर लगाये ….गेब्रिला सबतानी ओर दो तीन सुंदरिया…
    आप नोस्तेल्जिक ओर भावुक होकर सही ठेल देते है….वैसे अगर सचमे प्लान बना रहे है आत्मकथा लिखने का तो हमें भी अगला खरीदार मानिए…तब तक अगली रात का इंतज़ार करते है .जब सब सो जायेंगे .

  5. anil kant

    एक सांस में पढ़के चैन मिला…आगे का इंतज़ार रहेगा

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

  6. ashish

    कार का मीटर स्वामीजी की यायावरी की दास्तान दिखा रहा है ! बधाई !

    ये हमारे ऊपर भी लागु होता है
    मैं प्रोग्रामर क्यों बना, पाईलेट क्यों नहीं! पाईलेट बनने के लिये हवाईजहाज खरीदना होता!.. और फ़िर मेनफ़्रेम का प्रोग्रामर क्यों नहीं बना!

    ब्रुकशील्ड का पोष्टर (ब्लू लैगून) का लग रहा है ! पूरानी यादे ताजा हो आयी ! वैसे मेरी फैटीशीयो की सूची मे एक यह भी है किसी द्विप पर कुछ दिन एकांत मे रहा जाये !

    हार्ले डेवीडसन तो अपनी पंसदिदा रही है, अब भारत मे खरीदने की तो अपनी औकात अभी तक नही हुयी है इसलिये हमने इसकी भारतिय चचेरी बहन बजाज अवेंजर ली थी! लेकिन फुरसतिया जी की तरह का (अपग्रेडेड प्लान) फटफटीया पर भारत भ्रमण का अधुरा है!

  7. कुश

    लगता है ऊपर वाला हिंदी फिल्मो का रायटर है.. जिसने सिर्फ किरदार बदल दिए है.. पर कहानी एक ही है.. सबकी लाईफ कुछ इसी तरह क्यों होती है., पिता सारे एक से ही क्यों लगते है,,?
    अनूप जी लिंक नहीं देते तो वाकई कुछ मिस हो जाता.. अब तो अगली कड़ी का बेसब्री से इन्तेज़ार है.. और हाँ सर्वर स्पेस अनलिमिटेड ले लीजिये..

  8. Priyankar

    बेहतरीन आत्मकथ्य . ईमानदार और सांद्र . यह मध्यवर्गीय जीवन शैली और जीवन मूल्यों में गहरे धंसे पारम्परिक भारतीय पारिवारिक धरातल से टेक ऑफ़ करते उन सपनों की भी कहानी है जिसे कैद करने वाली जंजीर अभी बनी नहीं है . यह लैम्ब्रेटा और बजाज सुपर रूपी टंडीरों से निस्सान अल्टिमा होते हुए ऑडी आदि पर आरूढ होने की कहानी भी है . साथ ही ’मेरी खटारा स्कूटर पर पीछे बैठी, देखती किसी बाईक वाले को, और सपने किसी कार वाले के लेती ’ का वह सिनिसिज्म भी है जो कभी हमारा साथ नहीं छोड़ता .

    यदि यह आत्मकथा छपती है तो अपन भी अंटी ढीली करेंगे और इसकी समीक्षा भी लिखेंगे .

    रही बात ब्रुक शील्ड की तो अपने एक दोस्त हैं,भारत के नामी ’मरीन आर्केओलॉजिस्ट’ में गिनती है,वे और हम जब जवानी के दिनों में साथ थे तो वे स्टेफ़ी ग्राफ़ को देख कर अक्सर लंबी सांसें भरते हुए घोषणा करते थे कि वह अगर उन्हें घरेलू नौकर/परिचारक रख ले तो वे खुशी-खुशी तैयार हो जाएंगे . तो भइए उस उमर की फंडेबाजी और फ़िकरेबाजी के तो रबाब ही न्यारे हैं . तब कमरा तो कमरा, दिल की तख्ती पर देसी-बिदेसी न जाने कितने पोस्टर लगे रहते थे .

    अगली कड़ी का इन्तजार रहेगा .

  9. vijay gaur

    भाषा में रवानगी हो तो पाठक खुद ब खुद बहता चला जाता है। निश्चित ही एक ऎसा नमुना यहां देखने को मिल रहा है। आगे इंतजार तो रहेगा ही।

  10. रचना.

    अतीत के इस इमानदार वर्णन मे मुझे सबसे अच्छी लगी “पुंगी”!! कल नागपन्चमी थी और शायद आप अपने ______- की गलियों मे घूमते उन संपेरों ौर दिन भर उनकी पुंगी की आवाजों को भी मिस कर रहे हों शायद..:)

  11. कौतुक

    बहुत ही सुन्दर पोस्ट. पिछले पोस्ट में बजाज स्कूटर की तस्वीर देखी बड़े शान से खड़ी है.

    मैं अक्सर सोचता हूँ कि कॉर्डियोलोजिस्ट्स को दिल से ऐसा कुछ बहता दिखता है?

  12. विवेक सिंह

    वाकई समाँ बाँध दिया आपने . लगा जैसे यह मैं ही हूँ जिसकी कहानी आप सुना रहे हैं .

    पर मेरे पास अभी कार नहीं है . हाँ बाइक नौकरी लगने के बाद ही खरीदी और तब ही ड्राइविंग सीखी !

    मजाक : इस मरीज को इस अस्पताल तक अनूप जी लाए हैं , उनका कमीशन दे दिया जाए :)

  13. अतुल शर्मा

    अद्भुत है स्वामीजी, आत्मकथा तो हमने भी ख़रीदी समझो। वैसे कथा कुछ-कुछ हमारी अपनी भी लग रही है। नॉस्टेल्जिया गए हम भी।

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