4 Comments

  1. समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले

    बेहतरीन आलेख…

    हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    कृप्या अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य का एक नया हिन्दी चिट्ठा शुरू करवा कर इस दिवस विशेष पर हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार का संकल्प लिजिये.

    जय हिन्दी!

  2. संजय बेंगाणी

    समीरलालजी की बात मान लें.

    पीछे जाना मुश्किल हो सकता है. वर्तमान को ही समृद्ध करें….

  3. cmpershad

    “बहुत से चिट्ठाकारों के लेखन मे जबरदस्त बदलाव देखा है, अच्छा लिखने और अच्छे से लिखने का आग्रह बढा है. ”

    तो अब, चिट्ठों को साहित्य कहा जाएगा कि नहीं? यह प्रश्न तो अभी बना हुआ है ना:)

  4. dr.anurag

    हम तो कब से कह रहे है जी……आपकी इस बात में दम है …..”जडें तो मजबूत हैं निजभाषा की, खाद-पानी देना हमारा फ़र्ज़ है.”

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