मै समानतावादी हूं – छोटे बडे का फ़र्क नही करता, अपने लेखों की वर्तनी या मात्राओं मे भी नहीं. ये बडी “ई” है वो छोटी “इ” है ऐसी बातें संतो को शोभा नही देती, अपने लिए सब समान हैं – बडी छोटी दोनो को एक सा सम्मान दो, एक की जगह दूसरे को रख के देखो, मात्राओं का भाईचारा बना रहे!
मुझे दु:ख होता है जब मेरी फ़ीलिंग को बाकी लोग नही समझते और इन छोटी-छोटी चीजों को नियमो मे बांधते रहते हैं. इन के ही दबाब मे तकनीशियन लोग सुलेमानी मूड मे आ जाते है और हो जाता है नया बखेडा, या बोलें की जुगत का प्रपंच! मेरी समानतावादी फ़िलासाफ़ी के चलते मुझे स्पेलचेकर की कोई जरूरत नही है मगर फ़िर भी …
हजारो ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फ़िर भी कम निकले
तो मेरे नही, पंकज भाई के अरमानों की बात कर रहा हूं यार! हिंदी वाला वर्ड-प्रेस, चौपालें, पत्रिकाएं, ओन लाईन एग्रीगेटर हर चीज हिंदी मे पा लेने के या बना लेने के बाद भाई को स्पेल चेकर की जरूरत महसूस होने लगी है. कारण हैं अनूपजी और रमन भाई जैसे शुद्धतावादी!
ठीक है तो जो पंकज भाई को जरा कम जानते हैं उन्हे बता दूं की भाई की स्ट्रेटेजी का फ़्लो चार्ट कुछ एईसन है -
१) ऐसा कोई काम नही जो अपन ने ट्राई मारा हो और वो किसी और ना सोचा हो तो सबसे पहले मुफ़्त का ओपनसोर्स माल जो नायाब हो, ढूंढ कर, परख कर ठोक-बजा के देख कर फ़िर उसका देवनागरी युनिकोडन करो.
२) फ़िर उस उत्पाद का लूक-एन्ड-फ़ील ऐसा कर दो की अपनी देसी फ़ेक्टरी मे ही बना है और उस को बाकी जनता को दे दो. अब सारे करो बल्ले-बल्ले याहूं-याहूं!!
३) अगर उत्पाद बनाने वाला ओपन सोर्स नही देता पर सेवा मुफ़्त की देता है जैसे की गूगल तो उसे अपना यार मानो पर साथ ही उसे मेलें भेज-भेज के तंग करवात रहो के आपकी सेवा जब तक हिंदी मे नही हम आपको अपना हितैषी नही मानता हूं, देखिए हमे आप एलियनेटेड महसूस करवा रहे हैं. बेचारे रो-धो के कुछ करेंगे ही.
४) माल अगर सरकारी है जैसे की भारत सरकार के उत्पाद – तो बच के निकल लो – काहे से की बिंदू एक मे डाला गया शब्द “नायाब” बहुत मायने का है!
सफ़ल स्ट्रेटेजी है!
पंकज भाई स्पेल चेकर की जरूरत (बाकियों को) तो है, एक आदर्श स्पेल चेकर कैसा हो? इस पर अभी अक्षरग्राम पर नही लिखा की इस बारे मे ज्यादा सोचने का चांस नही मिला! इधर तो गैर तकनीकी विचार सा कुछ औघड पेल रहा हूं. आदर्श स्पेल चेकर वो हो जो कहीं भी चले जैसे बरहा डाईरेक्ट टूल कहीं भी, किसी भी एप्लीकेशन मे चलता है और आसान है! मगर ये करना उतना आसान नही है क्योंकी ये की स्ट्रोक्स को ट्रेप करने जैसा नही है, स्पेल चेकिंग के लिए जहां टेक्स्ट लिखा हो उस विंडो और टेक्स्ट एरिया के कांटेक्स्ट मुहैया होना चाहिए. तो शायद इस का प्लग-इन बनाना सबसे सही होगा – IE plug-in या ऐसा कुछ तो कम से कम ये IE / firefox मे चले. या कोई सर्वर साईड स्क्रिप्ट जिसे हिंदी डिक्शनरी के साथ मे ब्राउजर बेस्ड ओफ़-लाईन प्रयोग के लिए भी दिया जा सके!
वैसे बरहा से याद आया, हाल ही मे फ़ुरसतिया जी जैसे अधीर को चैट कर के बरहा डाईरेक्ट इस्तेमाल करना सिखाया. इन्होंने इन्सटाल करते ही दनादन हर वो बटन दबा-दबा के देखा की घबरा के कंप्युटर हिल गया. फ़िर स्वामी करे आफ़-श्योर सपोर्ट की धक्कमपेल, जैसे तैसे गाडी आगे चली. देखा अगले दिन वही माल दिखा के जीतू को इम्प्रेस किए, ब्लाग छपे टिप्पणियां छपीं “साड्डे नाल रवोगे ते ऐश करोगे .. ” हद हो गई यार स्वामी को कोई क्रेडिट नही! मेरा भरोसा करो या कडियां खुद ढूंढ लो जीतू के ब्लाग पर.
तो खैर, जैसा की कहा, कम जानकारीयों के चलते अभी “कच्चे खयाल” यहीं लिखा हूं वो भी गैर तकनीकी वाले मूड मे – एक बने बनाए ओपनसोर्स जुगत् का प्रयोग करना बताया है इधर जुगत की कडी शायद कभी काम आए!




जनाब-ए-आला
आप का जलवा बरकरार रहे और ऐसे ही भौंकचों से दुनिया को रंगबिरंगी रखें। मेरी कार्यशैली का प्रवाह आपने बखूबी पकड़ा है। कोई तो है जो हमें पहचानता है। स्पैलचेकर के लिए दिमाग की नसें खुल चुकी हैं। अगली शिवरात्रि पर भांग का भोग तभी करेंगे जब तक की वर्तनी जाँच नहीं हो जाती।
पंकज
spel checkor for is grammor nazis. Mirchi seth Bhang has weed , pleaze pas arund. In hindi Spel checkor fix you.
स्वामीजी,ये तकनीकी मामला तो तुम जानों.पहले तो बात जीतू के ब्लाग पर लिखे कमेँट पर.मैँने लिखा था हमारे साथ रहोगे तो ऐश करोगे.हमारे बहुवचन होता है.और बंधु अगर हम कहेँ कि हमारे मेँ हमारे सारे आदमी शामिल थे तो तुम कहाँ बचते हो.सो यह तो मिला क्रेडिट.बाकी तुम्हारी समाजवादी सोच की
सराहना करते हुये अपने एक सीनियर अधिकारी का किस्सा सुनाता हूँ.उनका
हिँदी तथा अँग्रेजी दोनोँ मेँ हाथ तँग था.हम कहा करते थे कि साहब का हिँदी तथा अँग्रेजी पर समान अधिकार था-जैसे तुम छोटी/बडी ‘ई’ मेँ भेदभाव नहीँ
करते .करोगे भी कैसे? तभी न जब अँतर कर पाओगे.बहरहाल स्पेलचेक पर
काम करने के लिये शुभकामनायेँ.
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