7 Comments

  1. संजय बेंगाणी

    भाग्य का धनी है बन्दा.

  2. Gyan Dutt Pandey

    ये जो गोबर किया है नोबल प्राइज वालों ने, उसे पोंछना कठिन काम होगा।
    बाकी, चौधराहट के चलते बिना धोये-पोंछें चलें, उनकी मर्जी!

  3. vivek

    चलो अच्छा हुआ… कुछ ज्यादा ही हाइप हो गए थे नोबेल पुरस्कार. इस गोबर से समझदार लोगों को नोबेल की असलियत समझ में आ जायेगी.

  4. Ashish

    मुझे क्या मालूम था कि झक (मक्खी) मारने से नोबेल मिल जाता है ! हम तो कब का दावा ठोँक देते ! कम से कम १० नोबेल तो मिल ही जाते अब तक !

  5. विवेक सिंह

    हो सकता है अब उन्हें बम बरसाने में स्वयं ही लज्जा आये, सोचेंगे मैं कैसा शान्तिपुरुष हूँ जो बम बरसाता हूँ ?

  6. Ghost Butser

    And the next noble for literature goes to “Mills and Boon”.

  7. ePandit

    ये बोत गलत बात है जी. शांति का नोबल तो मनमोहन और कॉँग्रेस सरकार को मिलना चाहिए था. चीन पाकिस्तान आदि जितना मर्जी खून बहा लें, वे कुछ नहीं करते.

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