बहुतेरे हिन्दी चिट्ठाकारों के अंग्रेजी चिट्ठे हैं.
महाजनो येन गत: स: पन्था का अनुसरण करते ऐसा करने का मन तो बन ही चुका था, समय रहते यह काम भी हो ही गया.
जैसा कि होता है, एक छोटी व्यक्तिगत पोस्ट से आगाज़ कर दिया है. विविधता बढने व कलेवर और निखरने मे ज्यादा समय नही लेगा. चिट्ठे का पता है http://hindini.com/e-swami इच्छु्क पाठक कृपया फ़ीड जोड लें.
मेरी पसंद:







यानी हिंदी का एक और ब्लॉगर अंग्रेजी की तरफ मुड़ गया. आपकी पोस्ट तो वैसे ही वंस इन अ ब्लू मून आती थीं, अब और ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा
वैसे अंग्रेजी में अच्छा लिखने वालों की कोई कमी नहीं है, पर हिंदी में आप जैसे जितने भी रह गए है सभी पलायन करते जा रहे हैं, कोई इस बहाने तो कोई उस बहाने.
चलो ठीक है, शुभकामनाएं नए ब्लॉग को सफलता के लिए.
हैलोविन को छोड़ भारतीय संस्कृति और दर्शन पर बात होती तो……….
वैसे, ab convinienti की बात से सहमत। अच्छा हो कि हिंदी ब्लागरों का प्रोत्साहन, मार्गदर्शन करते:)
अच्छा देखते हैं मगर क्या वहां आप नियमित रह पायेर्गें -यह भी देखते हैं !
आपको जितना जान पाए हैं, उससे विश्वास है कि हिन्दी से आपका नेह बना रहेगा। अंगरेजी चिट्ठे के लिए शुभकामनाएं।
naye chitthe ke liye shubhkamnaye.ab inconvinienti se sahmat………..
बधाई जी बधाई!
हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखने का अलग अलग आनन्द और फायदे हैं.
अंग्रेजी में लिखने से ग्लोबल पाठक मिलते हैं, हिंदी में सभी अपने भाई बंधु होते हैं, अनौपचारिक माहौल होता है.