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	<title>Comments on: भाषा प्रवाह मतलब “मन का रेडियो बजने दे ज़रा!”</title>
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	<description>यहां पर "कुछ" लिखा है!</description>
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		<title>By: गिरिजेश राव</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5769</link>
		<dc:creator>गिरिजेश राव</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Nov 2009 07:55:37 +0000</pubDate>
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		<description>हमें इतना समझ में आया कि हम कुछ कह नहीं सकते।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हमें इतना समझ में आया कि हम कुछ कह नहीं सकते।</p>
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		<title>By: Priyankar</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5768</link>
		<dc:creator>Priyankar</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 11:22:26 +0000</pubDate>
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		<description>वाह ! ईस्वामी ऑन ईस्वामी -- इन सेल्फ-सेलीब्रेटरी मोड .  नार्सीसस कॉम्प्लेक्स ?  या नारद मोह ?  या वस्तुनिष्ठ आकलन ?

जो भी हो ईस्वामी की शैली जानदार और शानदार है -- आत्यंतिक रूप से उनकी अपनी निजी शैली .  मानक हिंदी के बरक्स तमाम अर्जित अर्थ-छवियों से खदबदाती बोलती-बतियाती आक्रामक और अभिव्यंजक मर्दानी हिंदी जिसकी जडें गली-मुहल्ले की बोली-बानी से लेकर औपचारिक शिक्षा से अर्जित ज्ञान-विज्ञान तक मेँ ढूंढी जा सकती हैँ . इसमें क्या शक है कि अपने लेखन के लिए --  विषयवस्तु के वैविध्य तथा उसके उपयुक्त भाषिक स्थापत्य के लिए --  वे हिंदी ब्लॉग जगत के लिये उपलब्धि हैं .  

&#039;ह्यूमर&#039; और &#039;सटायर&#039; का अंतर अंग्रेज़ी की दो प्रेपजीशन &#039;विद&#039; और &#039;ऐट&#039; का अंतर है . यह फर्क &#039;वेन वी लाफ विद समबडी&#039; और &#039;लाफ ऐट समबडी&#039; का फर्क है . सुधार का उद्देश्य दोनों मेँ होता है.पर व्यंग्य मेँ कटुता होती है . इंजर्ड मैरिट होती है. वह चुभता है . उसका कोई निशाना होता है . जबकि हास्य-विनोद में --&#039;ह्यूमर&#039; में -- वह भी साथ हंसता है जो लक्षित है क्योंकि वह शामिल है. इसलिए हास्य शामिल बाजा है .

(ब्लॉगीय) हिंदी के शैलीविज्ञान पर अच्छा लेख . आत्मकथ्य कहां तक पहुंचा ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह ! ईस्वामी ऑन ईस्वामी &#8212; इन सेल्फ-सेलीब्रेटरी मोड .  नार्सीसस कॉम्प्लेक्स ?  या नारद मोह ?  या वस्तुनिष्ठ आकलन ?</p>
<p>जो भी हो ईस्वामी की शैली जानदार और शानदार है &#8212; आत्यंतिक रूप से उनकी अपनी निजी शैली .  मानक हिंदी के बरक्स तमाम अर्जित अर्थ-छवियों से खदबदाती बोलती-बतियाती आक्रामक और अभिव्यंजक मर्दानी हिंदी जिसकी जडें गली-मुहल्ले की बोली-बानी से लेकर औपचारिक शिक्षा से अर्जित ज्ञान-विज्ञान तक मेँ ढूंढी जा सकती हैँ . इसमें क्या शक है कि अपने लेखन के लिए &#8212;  विषयवस्तु के वैविध्य तथा उसके उपयुक्त भाषिक स्थापत्य के लिए &#8212;  वे हिंदी ब्लॉग जगत के लिये उपलब्धि हैं .  </p>
<p>&#8216;ह्यूमर&#8217; और &#8216;सटायर&#8217; का अंतर अंग्रेज़ी की दो प्रेपजीशन &#8216;विद&#8217; और &#8216;ऐट&#8217; का अंतर है . यह फर्क &#8216;वेन वी लाफ विद समबडी&#8217; और &#8216;लाफ ऐट समबडी&#8217; का फर्क है . सुधार का उद्देश्य दोनों मेँ होता है.पर व्यंग्य मेँ कटुता होती है . इंजर्ड मैरिट होती है. वह चुभता है . उसका कोई निशाना होता है . जबकि हास्य-विनोद में &#8211;&#8217;ह्यूमर&#8217; में &#8212; वह भी साथ हंसता है जो लक्षित है क्योंकि वह शामिल है. इसलिए हास्य शामिल बाजा है .</p>
<p>(ब्लॉगीय) हिंदी के शैलीविज्ञान पर अच्छा लेख . आत्मकथ्य कहां तक पहुंचा ?</p>
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		<title>By: dr.anurag</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5767</link>
		<dc:creator>dr.anurag</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 08:55:19 +0000</pubDate>
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		<description>निंदा /स्तुति के भद्र झोंके हिंदी  चिट्ठाकारो  के लिए बेलेंस के लिए जरूरी है ....चिट्ठकारी में जब आया तो ऑरकुट से उब कर...यहाँ वहां कुछ पढ़ा .प्रमोद जी की विलक्षण भाषा थी....फिर  एक पोस्ट पढ़ी अब तो याद नहीं किसकी थी ..उसमे पूरा डिस्क्रिप्शन था ....ट्रको के पीछे लिखे जुमलो का ....मसलन बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला .....रामकली तुम्हारी है .......  हम मोहित हो गए .हमें लगा दिमाग की प्यास इधर कुछ तालाबो से बुझ सकती है ....खंगालने शुरू किये ...फिर नज़र आयी मनीषा जी कोई पोस्ट सावलेपन  ओर  शहर में अकेली लड़की के रहन सहन पर .हमें लगा ....कमाल की चीज  है ये ब्लॉग .....बरसो से जमा कर रखा सामान यहाँ डाल देते है ...सूचनाओ की आंधी में  एक  पड़ाव ओर सही ......सो टेंट गाड दिया ....प्रतिक्रियाओं का भी अपना एक चरित्र होता है .....ओर कभी कभी तटस्थ रहना भी अपराध .....आपमें ,अमर कुमार जी ओर अनूप जी में एक सेन्स ऑफ़ ह्यूमर दिखा ....जैसा हम मनोहर श्याम जोशी में देखते थे ...सो कह दिया .....जब असहमत होगे तो भी खुल कर कहेगे....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>निंदा /स्तुति के भद्र झोंके हिंदी  चिट्ठाकारो  के लिए बेलेंस के लिए जरूरी है &#8230;.चिट्ठकारी में जब आया तो ऑरकुट से उब कर&#8230;यहाँ वहां कुछ पढ़ा .प्रमोद जी की विलक्षण भाषा थी&#8230;.फिर  एक पोस्ट पढ़ी अब तो याद नहीं किसकी थी ..उसमे पूरा डिस्क्रिप्शन था &#8230;.ट्रको के पीछे लिखे जुमलो का &#8230;.मसलन बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला &#8230;..रामकली तुम्हारी है &#8230;&#8230;.  हम मोहित हो गए .हमें लगा दिमाग की प्यास इधर कुछ तालाबो से बुझ सकती है &#8230;.खंगालने शुरू किये &#8230;फिर नज़र आयी मनीषा जी कोई पोस्ट सावलेपन  ओर  शहर में अकेली लड़की के रहन सहन पर .हमें लगा &#8230;.कमाल की चीज  है ये ब्लॉग &#8230;..बरसो से जमा कर रखा सामान यहाँ डाल देते है &#8230;सूचनाओ की आंधी में  एक  पड़ाव ओर सही &#8230;&#8230;सो टेंट गाड दिया &#8230;.प्रतिक्रियाओं का भी अपना एक चरित्र होता है &#8230;..ओर कभी कभी तटस्थ रहना भी अपराध &#8230;..आपमें ,अमर कुमार जी ओर अनूप जी में एक सेन्स ऑफ़ ह्यूमर दिखा &#8230;.जैसा हम मनोहर श्याम जोशी में देखते थे &#8230;सो कह दिया &#8230;..जब असहमत होगे तो भी खुल कर कहेगे&#8230;.</p>
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		<title>By: कुश</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5766</link>
		<dc:creator>कुश</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 07:46:15 +0000</pubDate>
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		<description>लगता है सब गल्ली क्रिकेट वाले आ गए यहाँ.. हम भी उन्ही में से है..
ट्रिक्स तो सारी की सारी मज़ेदार है..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लगता है सब गल्ली क्रिकेट वाले आ गए यहाँ.. हम भी उन्ही में से है..<br />
ट्रिक्स तो सारी की सारी मज़ेदार है..</p>
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		<title>By: Lovely</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5765</link>
		<dc:creator>Lovely</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 07:29:10 +0000</pubDate>
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		<description>आज की पोस्ट कुछ &quot;खास&quot; पसंद नही आई.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज की पोस्ट कुछ &#8220;खास&#8221; पसंद नही आई.</p>
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		<title>By: सुरेश चिपलूनकर</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5764</link>
		<dc:creator>सुरेश चिपलूनकर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 06:16:28 +0000</pubDate>
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		<description>स्वामी जी आपके इस प्रवचन से काफ़ी कुछ सीखने को मिला… ऐसा तो हम कभी भी नहीं लिख सकते…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>स्वामी जी आपके इस प्रवचन से काफ़ी कुछ सीखने को मिला… ऐसा तो हम कभी भी नहीं लिख सकते…</p>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5763</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 04:45:54 +0000</pubDate>
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		<description>फूरसतियाजी से थोड़ी दूरी बनाए रखें, रेडियो ज्यादा देर तक बजा :) मगर संगीत मधूर था, अतः माफ किया जा सकता. 

मेरा लिखा अमूमन क्रिया न हो कर प्रतिक्रिया जैसा होता है. जब भी ठोक बजा कर लिखा ज्यादा पसन्द नहीं किया गया. बिना अभ्यास के दो मिनट में लिखी पोस्ट सबसे ज्यादा पसन्द की गई. माने ब्लॉग में अनघड़ता चलेगी. :) 

मन एक कलाकार का है अतः आपकी तस्वीरों को चयन करने की क्षमता की सदा प्रसंशा करता हूँ. मुझे पोस्ट से ज्यादा वे पसन्द आती है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फूरसतियाजी से थोड़ी दूरी बनाए रखें, रेडियो ज्यादा देर तक बजा <img src='http://hindini.com/eswami/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  मगर संगीत मधूर था, अतः माफ किया जा सकता. </p>
<p>मेरा लिखा अमूमन क्रिया न हो कर प्रतिक्रिया जैसा होता है. जब भी ठोक बजा कर लिखा ज्यादा पसन्द नहीं किया गया. बिना अभ्यास के दो मिनट में लिखी पोस्ट सबसे ज्यादा पसन्द की गई. माने ब्लॉग में अनघड़ता चलेगी. <img src='http://hindini.com/eswami/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  </p>
<p>मन एक कलाकार का है अतः आपकी तस्वीरों को चयन करने की क्षमता की सदा प्रसंशा करता हूँ. मुझे पोस्ट से ज्यादा वे पसन्द आती है.</p>
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		<title>By: Arvind Mishra</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5762</link>
		<dc:creator>Arvind Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 02:05:48 +0000</pubDate>
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		<description>&quot;लेखन &quot; पर अच्छा  लेखन !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8220;लेखन &#8221; पर अच्छा  लेखन !</p>
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		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5760</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Nov 2009 01:28:39 +0000</pubDate>
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		<description>बड़ा मुश्किल होता है ऐसे रेडियो बजाना। तुमने बजा ही दिया। अपनी लेखन प्रक्रिया का कच्चा चिट्ठा खोल के धर दिया।

व्यंग्य के बारे में परसाई जी कहा करते थे कि व्यंग्य में करुणा की अंतर्धारा होती है। कटु और तिलमिलाने वाला तो यह उसके लिये होता है जिसके ऊपर व्यंग्य किया जाता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बड़ा मुश्किल होता है ऐसे रेडियो बजाना। तुमने बजा ही दिया। अपनी लेखन प्रक्रिया का कच्चा चिट्ठा खोल के धर दिया।</p>
<p>व्यंग्य के बारे में परसाई जी कहा करते थे कि व्यंग्य में करुणा की अंतर्धारा होती है। कटु और तिलमिलाने वाला तो यह उसके लिये होता है जिसके ऊपर व्यंग्य किया जाता है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: amit</title>
		<link>http://hindini.com/eswami/archives/324/comment-page-1#comment-5759</link>
		<dc:creator>amit</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Nov 2009 19:19:31 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/eswami/?p=324#comment-5759</guid>
		<description>वाह-२, आज तो मूड में लगे पूरे, लंबा ही रेडियो बजा दिया मन का!! :D

&lt;blockquote&gt;स्वीकारता हूं की इस प्रकार का की चीज़ पढना  मुझे आनंद देता है – चूंकी ये कल्पनाशील, ऊर्जावान और गतिमान कथ्य है!&lt;/blockquote&gt;
क्यों भूल रहे हैं, इस तरह के कथनों में हास्य रस भी तो होता है, कल्पनाशीलता के साथ ही तगड़ा मज़ा इन कथनों में मौजूद हास्य भी देता है, तभी तो बहुतया ऐसे कथनों को पढ़ एक मुस्कान अधरों पर आ जाती है!! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह-२, आज तो मूड में लगे पूरे, लंबा ही रेडियो बजा दिया मन का!! <img src='http://hindini.com/eswami/wp-includes/images/smilies/icon_biggrin.gif' alt=':D' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>स्वीकारता हूं की इस प्रकार का की चीज़ पढना  मुझे आनंद देता है – चूंकी ये कल्पनाशील, ऊर्जावान और गतिमान कथ्य है!</p></blockquote>
<p>क्यों भूल रहे हैं, इस तरह के कथनों में हास्य रस भी तो होता है, कल्पनाशीलता के साथ ही तगड़ा मज़ा इन कथनों में मौजूद हास्य भी देता है, तभी तो बहुतया ऐसे कथनों को पढ़ एक मुस्कान अधरों पर आ जाती है!! <img src='http://hindini.com/eswami/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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