साण्डिया हाईकू


जैसा की हिंदिनी के सुधी पाठक जानते ही हैं, जब भी जीवन मौका देता है, अण्ड-सण्ड-प्रचण्ड जीवधारी साण्ड महिमा का पाठ कर लेता हूं. नई पेल हायकू की ट्राई मारी है!



साण्डिया हाईकू

गधों के सिर सींग नहीं
साण्ड सजाए होते हैं
सच!

साण्ड द्वंद्व बराबरी पर लें
वरना मस्त, मौन धर लें
कुत्ते भौंकें!

गीदड गीदड है गिद्ध गिद्ध
खोटा खोटा है सिद्ध सिद्ध
साण्ड मस्त!

पूंछ पकडी साण्ड की, खेलें
दन्न-दिनी औंधियाए
वो भी खेला!

5 responses to “साण्डिया हाईकू”

  1. फ़ुरसतिया » मोहब्बत में बुरी नीयत से कुछ भी सोचा नहीं जाता

    [...] लसिया गये. आज जब स्वामीजी की कविता हायकूनुमा पढ़ी तो लगा कि इनकी हालत ठीक ह [...]

  2. फ़ुरसतिया » मोहब्बत में बुरी नीयत से कुछ भी सोचा नहीं जाता

    [...] टिया दिये आज जब स्वामीजी की कविता हायकूनुमा पढ़ी तो लगा कि इनकी हालत ठीक ह [...]

  3. रवि

    आपकी कविता पढ़ कर बरबस हँसी आ गई. और सांड का चित्र तो जोरदार है. हमारे समाज में ऐसे सांडों की भरमार हो गयी है. लगाम लगाने वाला दूर तक कोई नहीं…

  4. मेरी चाय लैब | मिर्ची सेठ

    [...] 3. बरकले फॉर्म वालों का दूध हैप्पी काउज कम फराम कैलिफोरनिया। स्वामी जी के सांड की गाय हैप्पी नहीं होती अगर विश्वास नहीं होता तो यह वीडियो देख लें – [...]

  5. ई-स्वामी » अपरंपरागत(ऊटपटांग) हिंदी में साण्ड, सांड और साँड!

    [...] तीसरा लेख [...]

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