दिशा वो जिधर चल पडो

जर्मनी में अठारहवी सदी में हेगेल (hegel) नामक एक जबरदस्त फ़िलासाफ़र हुआ है – मार्क्स से लेकर तो बुश के चुनावी आर्किटेक्ट सारे आज तीन दशक बाद भी उस के जबरदस्त फ़ैन हैं. ये खुराफ़ती दिमाग आज भी मंजे हुए राजनेताओं का दिशा निर्देश करता है – राज्य, तंत्र, जुगत सब पर हेगेलियन डायलेक्ट का प्रभाव है, कॊस्पीरसी थ्योरियां पेलने वाले तो हेगेल के पीछे हाथ धो कर पडे हैं – आइन्स्टाईन की रिलेटिविटी कभी मेरे पल्ले नही पडेगी और हेगेल का डायलेक्ट भी पूरी तरह नही – क्या है से ज्यादा किस बारे में है वहीं तक समझ जा पाती है. इन्टरनेट भरा पडा है, गूगल मारिए फ़ुरसत में “hegelian controlled conflict ” “hegelian dialect” “hegel” आदी पर. कांस्पीरेसी की सनसनी का मजा लेना हो तो “new world order” या “one world order” और जोड देखिए!

हेगेल का फ़ंडा है हलचल होती है फ़िर प्रवर्धन होता है – conflict between thisis and antithisis yields synthesis – मोटे शब्दों में! साथ ही हेगेल सिखाता है – अपना स्वारथ सिद्ध करना हो तो हलचल खडी करना और उस पर नियंत्रण करना – उसके संतुलन की दिशा बदलते रहना आना चाहिए! controlled conflict बोलते हैं विदेशी, conflict should not ger resolved!

थोडे दिन पहले अतुल ब्लागिंग के ध्येय को ले कर परेशान थे, अनूप जी का हिंदिनी पर प्रथम आमंत्रण लेख ब्लाग लेखन की सामजिक जिम्मेदारी पर था – एक हलचल जिससे हिंदी ब्लाग जगत अछूता नही था. उन्ही दिनों में मुझे भी जीवनहीन कविताओं पर खीज थी.

ज्यादा दिन नही बीते कल अतुल ने अंग्रेजी ब्लागियों के साथ मुशर्रफ़ के खिलाफ़ कमर कस ली – आज रमण भाई साथ हो लिए! महीनों बाद जिस तेज-तर्रोरी का कायल हूं दीख पडी – कहीं किसि को ध्येय मिल गया(!) खुशी होती है! आज जब यह् बोला जाता है की समूह व्यक्ति से ज्यादा चतुर है – सुनने में अजीब लगता है पर ब्लागिंग का सच तो यही है.

खैर, हेगेल को और उस के पहले बाद के धुरंधरों को समझने में खोपडी खपाता रहूंगा – अमेरिका का काम समझने को, इराक का तेल लेना है, इरान और पाकिस्तान से होती हुई पाईप लाईन बिछानी है, कोई आतंकी पाईपलाईन उडा ना दे इस लिए भारत-पाक को शांत रखना है साथ ही अपने f-16 बिक जाएं इस लिए पूरी मित्रता भी नही होने देनी controlled conflict जय हो हेगेल की – द्वैत साधन इसे बोलते हैं – सीखो कुछ देसि मना सीखो कुछ!

मुशर्रफ़ से ले कर राम लला का मंदिर बनाने वाले भगवा ब्रिगेड सारे हेगेल का अनुसरण करते हैं – मुद्दा खडा करो फ़िर उसका तोड फ़िर करो जोड-तोड – USA, Inc. भी यही करता है, पर अपन क्या करते हैं? अपन तो पेल मचाते हैं! देखना ये है कि, अगर समूह सचमुच व्यक्ति से ज्यादा समझदार है और अपनी दिशा जल्दी पा लेता है तो उसका परिणाम भी जल्दी दिखना चाहिए – खुद हेगेल ने कहा है – जो तत्थ्य है वो तार्किक है – जो तार्किक है वो तत्थ्य है (“The real is rational and the rational real”)

10 responses to “दिशा वो जिधर चल पडो”

  1. anunaad

    meraa dimaag thodaa kamajor hai | rusee prachaar saahitya padh-padh ke thak gayaa | marx aur hegel kee ek baat palle nahee padee | USSR me communism ke patan ke baad aisaa lagataa hai ki wah sab kuchha vaak-aadambar thaa , propagandaa thaa |

  2. eswami

    आश्चर्य! मुझे पता नही था की रूसियों ने भी इस का जिक्र किया है, जर्मनी मे यह बहुत प्रभावशाली रहा था, पूँजीवादी देशों मे तो इस पर काफी मसाला है ही!

  3. देबाशीष

    >मुशर्रफ़ से ले कर राम लला का मंदिर बनाने वाले भगवा ब्रिगेड
    >सारे हेगेल का अनुसरण करते हैं – मुद्दा खडा करो फ़िर उसका
    >तोड फ़िर करो जोड-तोड

    यह तो अखंड सत्य कहा है स्वामीजी, इतिहास में बारंबार दोहराया गया है फार्मुला। मुर्शरफ के खिलाफ यह मुहीम वैसे भेड़ नहीं मानता मैं। डिप्लोमेसी के नाम पर कश्मीर की तो माँ भैन हो गई अब ये लोग क्रिकेट का नाटक खेल कर क्या जताना चाहते हैं। मुर्शरफ की जगह कोई चुना हुआ नुमाईंदा हो तो बात भी है। कई बार बिना हल्ला मचा बात सुनी नहीं जाती तो बस यह बलॉगल्ला कुछ यों ही है, बात सियासी कानों तक तो न पहूंची है न पहुँचेगी, पर लोग तो जागें।

  4. देबाशीष

    माफ करना भाई! मैं भेड़ नहीं उनकी चाल का ज़िक्र करना चाहता था मुई नज़र धोखा दे गई :)

  5. पंकज नरुला

    स्वामी जी,

    गर आप ऐसी चाणक्यनीति सरीखी किताबें पढ़ने के कायल हैं तो कभी निकोलो मचियावली की The Prince पढ़िएगा। एक समय तो मैं इस पुस्तक का हिन्दी अनुवाद तक करने की सोच रहा था।

  6. विजय ठाकुर

    मैकियावेली की पुस्तक का हिन्दी अनुवाद एक से ज्यादा बार किया जा चुका है

  7. Raman Kaul

    स्वामी जी मै सीधे आप टेक्स्ट बाक्स मे हिन्दी लिख पा रहा हूँ बधाई यह एक बहुत बडा कदम है

  8. अनूप शुक्ला

    स्वामी जी हम खुश हुये यह कमेन्ट हम सीधे लिख पा रहे हैँ अभी कुछ सुधार
    जरुरी होगे वे भी हो जायेगे मै तकनीकी मदद कुछ न कर सकू शायद जो दूसरे
    सहयोग कर सकता हूँ वह बताओ रेडिफ मेल के हिन्दी वर्जन से मिलता जुलता
    है यह लिखना देखो वहाँसे कुछ सहयोग मिल सके शायद बधाई शुभकामनायेँ

  9. Debashish

    वाह वाह, शानदार :)

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