By eswami on February 3, 2012
सोच बात पूरी नही होती खयाल छोड देते हैं साथ अध-बीच कोई सिरा जुडता नहीं कोई शैतान है भीतर फ़ूंक कर बिखेर देता है ताना-बाना और कहता है देखा? गर पैसे होते बादाम दूध पिया होता सोच यूं गुम ना होती तेरी बनिये को देख सबका हिसाब याद है उसे मूंह-ज़बानी अनकही पुराने [...]
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By eswami on November 22, 2011
छोटा सा इक गाँव था जिसमें दीये थे कम और बहुत अंधेरा बहुत शज़र थे थोडे घर थे जिनको था दूरी ने घेरा इतनी बडी तन्हाई थी जिसमें जागता रहता था दिल मेरा बहुत कदीम फ़िराग था जिसमें एक मुकर्रर हद से आगे सोच ना सकता था दिल मेरा ऐसी सूरत में फ़िर दिल को [...]
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By eswami on April 19, 2011
बॉलीवुड के निर्देशकों मे से एक, रामगोपाल वर्मा ने रामनवमी पर ट्वीट की “अपनी पत्नि के लिये रावण से व्यक्तिगत युद्ध लडने के अलावा राम ने अयोध्या के लोगों के लिये क्या किया?” (निश्चित रूप से रामगोपाल ने उत्तरकाण्ड नही पढा है जिसमे राम-राज्य का विस्तृत वर्णन है. ) इसके बाद उन्होने रामायण के अलग [...]
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By eswami on April 11, 2011
टीवी हैं. टीवी पे टीवीजीवी हैं. अखाडे हैं. अखाडों में बखेडे हैं. (टीवी पर दृश्य पहला) क्रिकेट विश्वकप सेमी-फ़ाईनल भारत-पाक भिडंत! उपमहाद्वीप के स्वादिष्ट पकवानों का आनन्द उठाने के बाद सरदारजी और गिलानी मैच देखने बैठ गए हैं. चेहरे की खुशी बता रही है की भोजन के बाद, परंपराओं के अनुसार दोनो पंजाबियों के बीच [...]
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By eswami on November 1, 2010
चिट्ठाकारी अपनी आईडेंटिटी बनाने के बाद अब आईडेंटिटी क्राईसिस के दौर से गुज़र रही है. समस्या ये है कि अच्छे-बुरे हर एक की शेल्फ़ लाईफ़ एक जैसी हो गई है…
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