खलील-ई

Talking with friends

पांच रुप्पैय्या बारा आना: चिट्ठे पर विज्ञापन, प्रायोजक या दानपेटी?

पांच रुप्पैय्या बारा आना: चिट्ठे पर विज्ञापन, प्रायोजक या दानपेटी?

एक पडताल – चिट्ठों पर विज्ञापन लगाने के क्या विकल्प हैं? इस माहौल में चिट्ठाकारी का औचित्य भी क्या है?

ल्यो, ई-छोरों का फ़ोटू लगैरिया हूं!

सबसे पहले मानोशी का धन्यवाद, विशिष्ट के आगमन कि यह खबर केनेडा से ब्लागमंडल में साझा करने के लिये! फ़िर इसका जिक्र गुरुदेव फ़ुरसतियाजी ने भी अपनी हाल-आफ़-फ़ेम क्लास लेटेस्ट पोस्ट में किया. वहां टिप्पणियों में पढा कि ज्ञानजी को छोरों का फ़ोटू भी होना.
तकरीबन सवा दो साल पहले शौनक, मेरे पहले [...]

प्रायोजक






  • WordPress Themes by StudioPress