खलील-ई

Talking with friends

मित्रता दिवस: खलील जिब्रान – मित्र से बातें

खलील जिब्रान के विचार मित्रता पर- सुन्दर और आदर्श!

पांच रुप्पैय्या बारा आना: चिट्ठे पर विज्ञापन, प्रायोजक या दानपेटी?

पांच रुप्पैय्या बारा आना: चिट्ठे पर विज्ञापन, प्रायोजक या दानपेटी?

एक पडताल – चिट्ठों पर विज्ञापन लगाने के क्या विकल्प हैं? इस माहौल में चिट्ठाकारी का औचित्य भी क्या है?