खाम-खयाल-ई

Musings

चार साल पूरे!

हिंदी चिट्ठाकारी से जुडे हुए चार साल पूरे हुए! एक उल्टी रवायत सी है - बल्लेबाज सैकडा मारने पर बल्ला ऊंचा कर के उन्मादे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करता है जबकि चिट्ठेबाज पहले हाथ ऊंचे कर के घोषणा करता है - ”फ़लां साल पूरा” फ़िर कस्टमरी टिप्पणी प्रसाद पाता है – “जमाए रहियेगाजी”, “लगे रहो जी”! इस उलट परंपरा से सापेक्षित वरिष्ठता [...]