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By eswami on January 7, 2011
जिओलॉजी बताती है कई बार सतह पे बहती कोई नदी किसी कंदरा में गुम जाती है और अंदर अपना सफ़र ज़ारी रखती है, फ़िर बहुत दूर कहीं से जाहिर हो बाहर को बह निकलती है. धरती की सतहों के नीचे जहाँ किसी की निगाहें, अक्सर कोई रौशनी नही पहुंच पाती थी; वहाँ इन कुनकुने दरियाओं का कोई किनारा नही होता!
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By eswami on September 14, 2009
१) हमसे एक परिचित दंपत्ति ने अपनी हाल ही मे जन्मी पुत्री का नाम रखा है ‘आरोही’. मुझे शक है, की नाम कन्या की गायनातुर संगीतमारी माता ने दिया है. जो भी है जी, नाम सुन्दर है. मेरे आस-पास के नवजात बच्चों के नाम हैं – प्रणव, अन्विता, युवना, यजुर – ये सभी अप्रवासी भारतीयों के बच्चो के नाम [...]
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By eswami on July 1, 2009
भारत से इन्टरनेट सेवाओं का प्रयोग करने वाले सुधी पाठक जानते ही होंगे की भारतीय भाषाओं की प्रथम सॉफ़्ट-पॉर्न कॉमिक चरित्र पर आधारित सविता भाभी [savitabhabhi.com] नामक साईट को भारत सरकार नें बैन कर दिया है – अर्थात भारत में रहने वाले लोग इस साईट को अपने बेब ब्राऊज़र में नहीं खोल पाएंगे. डिपार्टमेंट ऑफ़ [...]
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By eswami on March 5, 2009
दुनिया कें सबसे ज्यादा टेलेन्टेड लोग बाएं हाथ का प्रयोग करने वाले लोग हैं. ये संयोग नही है. सिकन्दर से ले कर गांधी तक और आईंस्टाईन से ले कर ओबामा तक लिस्ट इतनी लंबी है की आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे. अधिकतर जीनियस लोग खब्बू हैं या यूं कहें की जब जीनियस लोगों की बात हो तो खब्बू लोग बहुसंख्यक हो [...]
Posted in खाम-खयाल-ई | Tagged खब्बू, पेन, left handed, pen |
By eswami on December 30, 2008
हिंदी चिट्ठाकारी से जुडे हुए चार साल पूरे हुए! एक उल्टी रवायत सी है - बल्लेबाज सैकडा मारने पर बल्ला ऊंचा कर के उन्मादे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करता है जबकि चिट्ठेबाज पहले हाथ ऊंचे कर के घोषणा करता है - ”फ़लां साल पूरा” फ़िर कस्टमरी टिप्पणी प्रसाद पाता है – “जमाए रहियेगाजी”, “लगे रहो जी”! इस उलट परंपरा से सापेक्षित वरिष्ठता [...]
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