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By eswami on June 29, 2009
संदर्भ: अरविंद मिश्राजी ने अपने ब्लॉग पर उत्सुकता जताई थी की राक्षसों का गुरु शुक्राचार्य शुभ क्यों माना जाता है? इसके उत्तर में ज्योतिष दर्शन वाले सिद्धार्थ जोशी जी नें एक पोस्ट भी लिखी थी. उन्होंने इस पोस्ट में शुक्र के शुभ माने जाने के सामाजिक संदर्भ का विश्लेषण किया था. दर असल मैंने सिद्धर्थ वाली [...]
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged पुराण, शुक्र |
By eswami on November 16, 2008
समंदर का गहरा नीला पानी, मनोहारी सूर्यास्त, तटों पर डॉल्फ़िन्स की आवाजाही, रेतीले बीच, खुशनुमा मौसमों के पाले हुए वो-वो वनस्पति और जीव-जन्तु जो कहीं और ना मिलें, विश्वस्तरीय खाने के अड्डों को सजाए ऐतिहासिक शहर में ख्यातिप्राप्त लोगों की बसाहट .. एक ऐसा जिप कोड जिसमें बसने के लिये लोग जान दें. कुदरत का दिया क्या नहीं [...]
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged ग्लोबल वार्मिंग, यात्रा वृत्तांत, features |
By eswami on November 10, 2008
सुरक्षा पडताल से दरवाजा नंबर ४२ तक की सामान खींच कदमताल काफ़ी लंबी थी. मुझे डर हुआ की मेरे डीओ की परतों के नीचे से पसीना अपनी उपस्थिती ज़ाहिर ना करने लगे. गर्मी लग रही थी, शरीर का तापमान कम करने के अलावा आगे लंबी दूरी की उडान के लिये खुद को तैयार करना था. [...]
Posted in किस्सा-गो-ई, खलील-ई | Tagged मजेदार, beer, features, funny |
By eswami on November 3, 2008
आप भारत माता के आंचल तले उसके लालों के साथ क्या-क्या होते देखना बर्दाश्त कर सकते हैं? विदर्भ में कर्ज़ग्रस्त किसानों की आत्महत्याएं या दलाल स्ट्रीट पर खून की नदीयां! दोनो ही हमारी नव-अर्थव्यवस्था की देन हैं! अब, जब विदेशी संस्थागत निवेशकों नें अपनी पुरानी गंदी चाल चल दी है और मार्केट से पैसा खींचना [...]
Posted in किस्सा-गो-ई, लिखा-ई | Tagged ग्लोबलाईजेशन, features, globalization |
By eswami on August 11, 2008
वो कार्पोरेट सेल्स के काम से जुडी हुई औरत थी. प्रोफ़ाईल गढूं? किसी गोरी महिला के हिसाब से औसत से कम ऊंचाई, लगभग पांच फ़ुट पांच इंच. इकहरी से कुछ औंस उपर. आंखें चमकीली, कत्थई और शरारती. करीने से किये गए मेक-अप में छुपाए साल जोड कर उम्र मुझसे ज़रा अधिक. बातचीत का सिलसिला उसी ने शुरु किया, वर्ना जैसा की अक्सर होता आया, पूरी फ़्लाईट के दौरान मेरा हैडफ़ोनग्रस्त सिर पुस्तक में ही घुसा रहता. कुछ आधारभूत [...]
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged किस्सा, सहयात्री, features |
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