July 2005

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वैज्ञानिक नाम की खोज!

भारतीय संस्कृति और त्यौहारों पर एक अमरीकी मित्र की जिज्ञासा शांत करने की ट्राई मार रहा था जब भांग का ज़िक्र निकला! भई होली की बात हो और भांग की बात ना हो – इम्पासिबल! मुझे आंखन देखे और कानों सुने वो सभी मजेदार किस्से याद आने लगे जो “महाकाल के प्रसाद” की कृपा से [...]

नंगा करने (मात्र!) की कला

मानवदेह निःस‍ंदेह प्रकृति की सर्वोत्तम कृति है! स्वयंसेवी जनता को सार्वजनिक स्थानो पर हजारों की संख्या मे सामूहिक रूप से न‌ंगा कर के फ़ोटो खींचने की कलाकारी करते हैं समकालिक शैली के छायाकार स्पेंसर ट्युनिक. इसी के लिए बरसों से जाने जाते हैं और हाल ही में लंदन मे इन्होने नग्न मानव देहों को छायांकित [...]

काडी करने (मात्र!) की कला

रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है पर उसकी सीमाएं क्या हैं? जब किसी धर्म विशेष के भगवान/देवी/देवता के चित्र फ़ैशन के नाम पर जूतों पर छापे जाते हैं तो क्या वो सुरुचिपूर्ण कला है? कतई नहीं है! इस कमीनेपन से प्रचार पा कर सस्ती लोकप्रियता जरूर मिल सकती है मगर यह कला का ध्येय नही [...]

गोरे रंग का ज़माना… टिंग… टिडीं‍ग टिंग

आज एक अमरीकी लडकी का ब्लाग पढा, वो देसी मरदों से परेशान है इतनी की ब्लाग पेल मारा! एक ही पोस्ट है इस ब्लाग में, आज ही लिखा गया है. टेक्नोराती पे सर्च मारी इन्डिया पे, ये मिल गया. ब्लाग की कडी आगे देता हूं पहले ये जान कर बहुत दुख हुआ की – १) [...]