By eswami on October 10, 2009
आज ओबामा की आस्तीन पर नोबल शान्ति पुरुस्कार का बिल्ला चमकाना एक कूटनीति जरूरत है अन्यथा इनके बढाए हाथों से कोई मरहम तो क्या जहर ना ले!
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By eswami on September 29, 2008
अमरीका की सरकार ने लोगों को शेर-आया शेर-आया का डर दिखा दिखा कर बहुत बेवकूफ़ बनाया.
झूठ के बाद झूठ और उसके बाद झूठ!
कभी आतंकवाद का डर.
कभी इराक का.
कभी आर्थिक परिस्थितियों का.
डर में जीती हुई जनता से हर मन माफ़िक काम करवा लेना आसान था.
लेकिन आज जो हुआ वो जनता के पक चुकने की पराकाष्ठा [...]
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By eswami on September 28, 2008
मेरी पिछली प्रविष्ठी थी फ़ेडरल रिजर्व के बारे में. उसी को आगे बढाता हूं.
जो संस्था किसी देश की मुद्रा की तरलता को नियंत्रित करती है, वह संस्था उस देश के सारे व्यापार-विनिमय को अनाधिकारिक रूप से नियंत्रित कर सकती है. अमरीका में यह अधिकार फ़ेडरल रिजर्व के पास है. यानी की प्राईवेट बैंकर्स के एक समूह [...]
Posted in लिखा-ई | Tagged अमरीका, अर्थव्यवस्था, bear market, features, federal reserve
By eswami on July 20, 2008
(हे खास-आदमी, ज़रा इत्मिनान से पढ…नहीं तो आगे बढ!)
(दृश्य १)
कभी ज़मीन होती थी.
ज़मीन पर, आम-आदमी होते थे; घांसाहारी जीव थे.
मांसाहारी नेता, इन घांसाहारी जीवों का भेजा खाते थे.
जब आदमी का भेजा खाने के लिये नेता जमीन पर आते थे, तब उन्हें ‘जमीन से जुडा हुआ नेता’ कहा जाता था.
भेजा खाए जाने की प्रक्रिया में, आदमी, चट कर भी अनुग्रहित महसूस करता था.
*_*_*
(दृश्य २)
अब जमीन नहीं बची है.
माल्स,मल्टिप्लैक्स और इन्टरनेट कैफ़े जमीन [...]
Posted in खाम-खयाल-ई | Tagged America, अमरीका, ब्लॉगिंग, राजनीति, Blogging, features, Politics
By eswami on July 5, 2008
अमरीका के आमिश समाज पर एक लेख.
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged Amish, अमरीका, आमिश, features
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