By eswami on October 10, 2008
हवा में नए नए शब्द बिखर गए हैं. सबप्राईम मार्टगेज़ के बाद टीवी पर क्रेडिट डिफ़ाल्ट स्वाप का स्यापा शुरु हो चुका है! ये है धंधा अमरीकन स्टाईल यानी करे कोई और भरें सारे! इस से पहले मैं हालिया संकट में फ़ेडरल रिज़र्व और अमरीकी सरकार की भूमिकाओं को कोस चुका हूं. अब देखते हैं की बैंकों नें अपारदर्शिता [...]
Posted in लिखा-ई | Tagged अर्थव्यवस्था |
By eswami on September 28, 2008
मेरी पिछली प्रविष्ठी थी फ़ेडरल रिजर्व के बारे में. उसी को आगे बढाता हूं. जो संस्था किसी देश की मुद्रा की तरलता को नियंत्रित करती है, वह संस्था उस देश के सारे व्यापार-विनिमय को अनाधिकारिक रूप से नियंत्रित कर सकती है. अमरीका में यह अधिकार फ़ेडरल रिजर्व के पास है. यानी की प्राईवेट बैंकर्स के एक [...]
Posted in लिखा-ई | Tagged अमरीका, अर्थव्यवस्था, bear market, features, federal reserve |
By eswami on July 3, 2008
गंभीर लेखन से परहेज नहीं है लेकिन ..
Posted in लिखा-ई | Tagged अर्थव्यवस्था, उपभोक्ता, बाजार, भारत, features |
माह के सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त आलेख