By eswami on August 11, 2008
वो कार्पोरेट सेल्स के काम से जुडी हुई औरत थी. प्रोफ़ाईल गढूं? किसी गोरी महिला के हिसाब से औसत से कम ऊंचाई, लगभग पांच फ़ुट पांच इंच. इकहरी से कुछ औंस उपर. आंखें चमकीली, कत्थई और शरारती. करीने से किये गए मेक-अप में छुपाए साल जोड कर उम्र मुझसे ज़रा अधिक. बातचीत का सिलसिला उसी ने शुरु किया, वर्ना जैसा की अक्सर होता आया, पूरी फ़्लाईट के दौरान मेरा हैडफ़ोनग्रस्त सिर पुस्तक में ही घुसा रहता. कुछ आधारभूत [...]
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged किस्सा, सहयात्री, features |
By eswami on July 14, 2008
“मैंने तुम जैसी कोई और औरत नहीं देखी! क्या मैं तुम्हें गले से लगा सकता हूं?” मैंने उससे कहा और उसने तहे दिल से अपनी दोनो बांहें हंसते हुए खोल दीं. मेरी पत्नि यह देख कर मुस्कुरा दी. इंसानियत जहां भी जिस भी रूप में मिले उसकी बांहे हमारे लिये खुली होती हैं. वो एक [...]
Posted in किस्सा-गो-ई | Tagged किरदार, किस्सा, खुशी, नर्स, features |
माह के सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त आलेख