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खुशी

किस्से हैं किरदारों के: अब मैं खुश हूँ!

By eswami on July 14, 2008

“मैंने तुम जैसी कोई और औरत नहीं देखी! क्या मैं तुम्हें गले से लगा सकता हूं?” मैंने उससे कहा और उसने तहे दिल से अपनी दोनो बांहें हंसते हुए खोल दीं. मेरी पत्नि यह देख कर मुस्कुरा दी. इंसानियत जहां भी जिस भी रूप में मिले उसकी बांहे हमारे लिये खुली होती हैं. वो एक [...]

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