By eswami on November 1, 2010
चिट्ठाकारी अपनी आईडेंटिटी बनाने के बाद अब आईडेंटिटी क्राईसिस के दौर से गुज़र रही है. समस्या ये है कि अच्छे-बुरे हर एक की शेल्फ़ लाईफ़ एक जैसी हो गई है…
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By eswami on July 7, 2009
मैं देसी सृजनात्मकता के आगे नतमस्तक हूं. जो बवाल दुनिया में और कहीं आकार नहीं ले सका वो हमारे यहां साकार हो गया है. दुनिया भर की भाषाओं में साहित्य के बारे में ब्लाग बने, साहित्यकारों के ब्लाग बने; पर किसी ने ये सवाल नहीं किया की “जी ये ब्लाग भी साहित्य होता है क्या?” पश्चिम [...]
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