By eswami on September 4, 2009
हाल ही में मैने अघोरा १,२ और ३ ये तीनो पुस्तकें पढीं. अंग्रेजी में लिखी डॉ. रॉबर्ट ई. स्वोबोदा की यह पुस्तकमाला अपने आप में अनूठी हैं. लेखक एक अमरीकी हैं, भारत से आयुर्वेदाचार्य बनने वाले पहले विदेशी व्यक्ति भी और पठनीय भी. उनकी कई पुस्तकों मे से ये अस्सी के दशक में लिखी गईं थीं. किताव पढ लेना [...]
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By eswami on May 31, 2009
एक तांत्रिक से भेंट और कन्फ़्यूजन्निज़्म: किसी काम से दिल्ली गया था. एक तांत्रिक से खास तौर पे मिलवाया गया. मेरी तरह आप भी शायद सोच रहे होंगे की श्मशानों में रहने वाला भस्म मले दिगंबर अघोरी होगा. या काला चोगा और ढेर सारे रूद्राक्ष पहने घूमने वाला कोई दढियल होगा लेकिन ये तो सफ़ारी सूट पहनने [...]
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By eswami on July 19, 2008
कहने की बात नहीं है, पर पत्रिकाओं और पोर्टल पर लिखने वाले कई बार खुद को, विषयवस्तु को और अपने पाठकों की जरूरतों को परिपक्वता से नहीं लेते - शराफ़त से मूड बना कर जब लिखते हैं, तब तथाकथित ‘टाईम-पास’ ब्लागर्स इनसे कहीं बेहतर लिखते हैं. पाठक को हिंदी से विमुख करने में गैर-पेशेवर शैली का बहुत हाथ है, और दु:ख की बात [...]
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