By eswami on April 11, 2011
टीवी हैं. टीवी पे टीवीजीवी हैं. अखाडे हैं. अखाडों में बखेडे हैं. (टीवी पर दृश्य पहला) क्रिकेट विश्वकप सेमी-फ़ाईनल भारत-पाक भिडंत! उपमहाद्वीप के स्वादिष्ट पकवानों का आनन्द उठाने के बाद सरदारजी और गिलानी मैच देखने बैठ गए हैं. चेहरे की खुशी बता रही है की भोजन के बाद, परंपराओं के अनुसार दोनो पंजाबियों के बीच [...]
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By eswami on September 3, 2010
“कौन देस के बासी?…कौन देस के बासी? यूं पूछते होंगे वो!” दादाजी ने पिताजी से कहा. “तुम बताना कि कहां से आए हो, फ़लां पण्डे के पास जाना है, ये पुराना पता है पण्डे का. हमारा खानदानी पण्डा है, मिल जाएगा. और वहां उनकी बहियों में हमारे पुरखों के नाम दर्ज हैं.” बहुत बचपन की एक स्मृति [...]
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By eswami on August 6, 2008
बैजू बावरा में मो. रफ़ी के गाने “ओ दुनिया के रखवाले” के पार्श्वसंगीत में ट्याऊंऽऽऽ..ट्याऊंऽऽ..टूँऽऽऊँऽऽ..ऊँऽऽ गली के आवारा पिल्ले को नुक्कड के पंसारी की लात पडते ही उसकी काऊंऽऽ..काऊंऽऽ…ऊँऽऽऽ..ऊँऽऽ लोटपोट कॉमिक्स में रोते हुए मोटू-पतलू की बूऽऽऽहूऽऽहूऽऽहूऽऽ.. इन सभी में क्या एक सा है? करुण रुदन और उसको दर्शाता एक दर्दिला साऊंड इफ़्फ़ेक्ट! ढेर सारे [...]
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By eswami on August 3, 2008
हिंदिनी पर शुरु में भारत से सेक्स,संभोग,नग्न आदी पर सर्च करते हुए ‘दर्शक’ पहुंचा करते थे. आजकल गीत, कविता, सुर आदी पर सर्च भी बढी है और पाठक भी. मुझे ये खुशफ़हमी होने लगी थी की भारतीय इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की बिरादरी में इन्टरनेट प्रयोग को लेकर परिवर्तन आ रहे हैं! यकायक लगने लगा की इन्टरनेट पर सुधि, जागरूक, देसी जीवों की ऑन-लाईन बाढ आ गई है. हाल ही में स्पष्ट [...]
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By eswami on July 3, 2008
गंभीर लेखन से परहेज नहीं है लेकिन ..
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