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कर्णपिशाचिनी साधना कैसे करूं?

By eswami on July 19, 2008

कहने की बात नहीं है, पर पत्रिकाओं और पोर्टल पर लिखने वाले कई बार खुद को, विषयवस्तु को और अपने पाठकों की जरूरतों को परिपक्वता से नहीं लेते - शराफ़त से मूड बना कर जब लिखते हैं,  तब तथाकथित ‘टाईम-पास’ ब्लागर्स इनसे कहीं बेहतर लिखते हैं. पाठक को हिंदी से विमुख करने में गैर-पेशेवर शैली का बहुत हाथ है, और दु:ख की बात [...]

Posted in लिखा-ई | Tagged जादू, तंत्र, पत्रकारिता, मंत्र, वेबदुनिया, features | 14 Responses

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