By eswami on October 10, 2009
आज ओबामा की आस्तीन पर नोबल शान्ति पुरुस्कार का बिल्ला चमकाना एक कूटनीति जरूरत है अन्यथा इनके बढाए हाथों से कोई मरहम तो क्या जहर ना ले!
Posted in लिखा-ई | Tagged अमरीका, ओबामा, नोबल पुरुस्कार, राजनीति, शान्ती |
By eswami on July 20, 2008
(हे खास-आदमी, ज़रा इत्मिनान से पढ…नहीं तो आगे बढ!) (दृश्य १) कभी ज़मीन होती थी. ज़मीन पर, आम-आदमी होते थे; घांसाहारी जीव थे. मांसाहारी नेता, इन घांसाहारी जीवों का भेजा खाते थे. जब आदमी का भेजा खाने के लिये नेता जमीन पर आते थे, तब उन्हें ‘जमीन से जुडा हुआ नेता’ कहा जाता था. भेजा खाए जाने की प्रक्रिया में, आदमी, चट कर भी अनुग्रहित महसूस करता था. *_*_* [...]
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