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संस्मरण

अतीत के प्रस्फ़ुटन –३: “तू चल.. मै भी आऊंगा स्साले!”

By eswami on August 29, 2009

अतीत के पहले और दूसरे प्रस्फ़ूटन में ज़रा फ़र्क रहा – पहला प्रस्फ़ुटन स्वयं-स्फ़ूर्त था और दूसरा सुविचारित. मेरा मानना ये है कि लेखन का दौरा आना चाहिये – दौर नहीं! पाठक छूटें ना ये सोच कर या ‘अगली किस्त जल्दी लिखियेगा’ के दबाव तले चिट्ठाकारी में लगातार लिखने का दौर बनाए रखना आत्मघाती भी [...]

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अतीत के प्रस्फ़ुटन –२: हैप्पीनेस टेक्स और चार्ली चेप्लिन के पोस्टर में सह-संबंध

By eswami on July 29, 2009

एक कहानी दो लोगों के बीच की सबसे सरल राह होती है. एक दिन मैं और मेरा मित्र ऐसी ही राह पर टहल रहे थे यानी मैं उसे टंडीरा-कथा सुना रहा था- “एक बार पिताजी टंडिरा पर रात को कहीं से लौट रहे थे. शहर के मनहूस गड्ढे मानसून के बाद और गहराए हुए थे. [...]

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अतीत के प्रस्फ़ुटन –१: आध्यात्मिक टंडीराप्रेम व किशोरी ब्रूक शील्ड्स का पोस्टर

By eswami on July 26, 2009

शाम से मैं इन्तज़ार करता रहा हूं कि सब आराम से सोने जाएं, ताकि मैं इत्मिनान से यह लिख सकूं. आज का दिन अनायास ही कुछ एक खास दिन बन गया है. मैं, जो स्वयं को आमतौर पर भविष्योन्मुखी मानता हूं, आज के दिन को यादों के पुरालेखों में सहेज देना चाहता हूं – शायद [...]

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