By eswami on November 2, 2010
लडकियाँ अगर मेलों में यानी सार्वजनिक स्थल पर मेंहदी वालों से मेंहदीं लगवा सकती हैं, गोदने गुदवा सकती हैं तो भई लिपस्टिक क्यों नही लगवा सकतीं.. लगाने वाले को अगर मूंह में लिपस्टिक पकडना आसान पड रहा है तो आप बीच में बोलने वाले कौन?
Posted in खलील-ई | Tagged समाज, IIT |
By eswami on August 14, 2008
“अधिकतर लोगों के लिये महाविद्यालय की पढाई समय की बरबादी है. ” ये मैं नहीं कह रहा, कोई श्रीमान चार्ल्स मर्री कह रहे हैं. कौन चार्ल्स मर्री? मुझे भी नहीं पता लेकिन उनका यह लेख वाल स्ट्रीट जर्नल में छपा है और हाल ही में काफ़ी पढा गया और सराहा गया है, तो वे ज्ञानी [...]
Posted in लिखा-ई | Tagged गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा, समाज, Guru-Shisya |
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