By eswami on May 20, 2010
खलील जिब्रान कहता है कि ‘हम अपनी खुशियाँ और ग़म अनुभव करने के बहुत पहले ही उनका चुनाव कर चुकते हैं!’ ऐसा लगता नहीं की यूँ मैने किया हो लेकिन शायद ऐसा होता हो या इस सत्य का भावार्थ अनुभव करना बाकी हो!
हाँ, हर प्रेम करने वाले ने इस बात का चुनाव ज़रूर किया होता है, कि किसी और का खुश होना उसकी अपनी खुशी के लिये लाज़मी है!
खुशी प्रेम से मिला हुआ वो हैरत-अंगेज़ एहसास जिसे हम नहीं धरते, बल्कि वो हमें धर लेती है और हमारे गमों को रुखसत कर देती है.
जीवन की सबसे बडी खुशी इस विश्वास में है कि हमें प्रेम किया जाता है – हम जैसे हैं उस वजह से, या बल्कि जैसे हम हैं उसके बावजूद.
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By eswami on November 7, 2008
सास भी कभी बहू थी. कुत्ता भी कभी पिल्ला था. बीफ़-बर्गर भी कभी गैया था. मुर्गी भी कभी अंडा थी. कुछ चीजों के बारे में तो पता है की क्या होता है पहले! .. मसलन आमतौर पे औरत पहले बहू होती है फ़िर सास! (ये किसी भी स्टेटमेंट के आगे आमतौर लिखना कलयुग में जरूरी है, वर्ना लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चा पैदा [...]
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