By eswami on September 1, 2008
पिछली प्रविष्ठी थी टाल-मटोल करने वालों के मनोविज्ञान पर. इस प्रविष्ठी का आधार व स्त्रोत किसी पुस्तक से नहीं लिया था वो यहां है. टाल-मटोल करना एक पैदाईशी समस्या नहीं है! यह एक सीखी हुई आदत या जीवनशैली है. ये एक अच्छी खबर है. जो सीखा है उसे विगत किया जा सकता है और नई चीज़ सीखी जा सकती है. जैसा की [...]
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By eswami on August 29, 2008
नुसरत फ़तेह अली खान साहब का गाया एक पंजाबी गीत है – तेरे लारेयां ते उमर गंवाई, वे माहिया लारे लान वालेया आक्ख लाई ना, जदों दी अक्ख लाई, वे माहिया लारे लान वालेया (मोटा मोटा अनुवाद: तेरी टाल-मटोल पे उम्र गंवाई ओ झूठे वादे करने वाले/आंख लगाई[सोई] ना जबसे आंख लगाई[प्रीत की] ओ झूठे [...]
Posted in लिखा-ई | Tagged आलस, टाल मटोल, मनोविज्ञान, procrastination, psychology |
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