By eswami on November 17, 2009
अगस्त २००८ में सचिन एक दिवसीय बल्लेबाजों की सूची में नीचे खिसकते-खिसकते २३वें क्रमांक तक जा पहुंचे थे. तब उनके लगातार गिरते प्रदर्शन के चलते मैने हताश और निराश ही हो कर एक लेख लिखा था “सचिन तेंडुलकर, अब बस कर!” जिसमें कहा था की लगातार खराब प्रदर्शन से बेहतर है वे एकदिवसीय में ना खेलें ताकी उस समय बेहतर प्रदर्शन कर रहे नयों को मौका मिले.
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By eswami on August 13, 2008
कहते हैं की बहुत पहले, एक बार क्रौंच पक्षीयों का एक जोडा मस्त हॉर्नी-हॉर्नी खेल रहा था. तब एक बहेलिये नें उन दोनो में से नर पक्षी का वध कर दिया, मादा क्रौंच के विलाप का ट्रेजिक सीन देख वाल्मिकी इत्ते सेंटी हो गए, की एक झटके में दस्यू से महाकाव्य के रचयिता महर्षि हो [...]
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