....जिंदगी का एक इतवार

….जिंदगी का एक इतवार

दो दिन पहले झमाझम बारिश हुई। दफ़्तर से घर आने के लिये उसके रुकने का इंतजार करते बारिश के जलवे देखते रहे। मन किया कि बारिश में भीगते हुये घर चला जाये। लेकिन यह सोचकर कि जेब मे कागज और मोबाइल भीग जायेंगे बरज दिये मन को। कपड़े भले सूख जायें एक दिन में लेकिन [...]

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...खोये आइडिये की तलाश में मगजमारी

…खोये आइडिये की तलाश में मगजमारी

एक दिन हम अपनी फ़टफ़टिया पर चले जा रहे थे। चले भी जा रहे थे, सोचते भी जा रहे थे कि इसकी सर्विंस करवानी है, ब्रेक कसवाने हैं, तेल बदलवाना है। अचानक सोच को फ़ांदता हुआ एक आइडिया आया और हमारी सोच के ऊपर छा गया। सोच के ऊपर आइडिया के छा जाने वाली बात [...]

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....देश बड़ी इस्पीड में चल रहा है

….देश बड़ी इस्पीड में चल रहा है

एक बार फ़िर हमें यात्रा पर निकलना पड़ा। दफ़्तर के काम से कोलकता जाना था। रेल में रिजर्वेशन मिला नहीं। सो उड़ते-उड़ाते गये। वैसे तो लखनऊ से कोलकता की सीधी उड़ान है लेकिन एयर इंडिया की नहीं है। उनसे जाने के लिये पूर्वानुमति जरूरी होती है। पिछली अनुमति चार महीना हुये नहीं मिली इसलिये कोलकता [...]

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