जबलपुर में आये हफ़्ता हो गया। एक हफ़्ता यहां बिता के आज कानपुर लौट रहे हैं। जब यह सूचना आशीष राय को दिये तो उन्होंने फ़रमाइश की कि घर से बाहर जाता आदमी के तर्ज पर एक कविता घर लौटते आदमी को भी लिखनी चाहिये। मन तो हमारा भी किया कि निकाल दी जाये एक [...]
घर से बाहर निकलकर अपन जबलपुर आ गये। पिछले इतवार को बैठ गये चित्रकूट एक्सप्रेस में और सोमवार सबेरे पहुंच गये जबलपुर! नयी फ़ैक्ट्री में ज्वाइन भी कर लिया उसई दिन! कानपुर की हथियार बनाने वाली फ़ैक्ट्री से निकल जबलपुर की वाहन बनाने वाली फ़ैक्ट्री में एक हफ़्ता बिता भी दिया- देखते-दाखते। घूमते-फ़िरते। इस बीच [...]
घर से बाहर जाता आदमी घर लौटने के बारे में सोचता है। घर से निकलते समय याद आते हैं तमाम अधूरे छूटे काम सोचता है एकाध दिन और मिलता तो पूरा कर लेता ये भी और वो भी। तमाम योजनायें बनाता है मन में सब कुछ एक आदर्श योजना जैसी बातें। घर से बाहर जाता [...]
आजकल जाड़े का मौसम है। सब कुछ सिकु्ड़ा-सिकु्ड़ा सा हो रखा है। सर्दी के पहले अन्ना जी का आन्दोलन और क्रिकेट टीम की जीत की भूख बहुत फ़ैली थी। जाड़े के आते ही दोनों सिकुड़ गये। और तो और जाड़े के चलते मंहगाई के आंकड़े तक थोड़ा सिकुड़ गये। तेल के दाम ऊपर जाने वाले [...]
नया साल कल से शुरु हो गया। हमने भी इसके स्वागत की तैयारियां कर रखीं थी। मोबाइल में संदेश बाउचर भरवा लिये और पैसे भी। सोचा कुछ को फ़ोनियायेंगे, कुछ को अपनी तरफ़ से संदेशा भेजेंगे। बाकी जिसका जैसा होगा वैसा ही थैंक्यू, सेम टू यू कर देगे। नये साल के संदेशिया हमले का मुकाबले [...]
[कल जागरण समूह की संस्था लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी में स्व. श्रीलाल शुक्ल की स्मृति का आयोजन किया गया। लोगों ने उनके बारे में अपनी राय रखी। मैंने भी अपने संस्मरण सुनाये। वहीं पर प्रसिद्ध आलोचक स्व. देवी शंकर अवस्थी की पत्नी आदरणीया कमलेश अवस्थी जी भी आईं थीं। श्रीलाल शुक्ल जी बेटी रेखा [...]
प्रसिद्ध लेखक श्रीलाल शुक्ल जी का पिछ्ले दिनों 86 वर्ष की अवस्था में देहान्त हो गया। उनके साथ की तमाम यादों के साथ उनकी रचनायें देखते हुये मन किया कि उनकी एक रचना पोस्ट की जाये। साहित्य के लिये अपनी कसौटी बताते हुये श्रीलाल शुक्ल जी ने कैसे अच्छी किस्म से घटिया साहित्य से बचने [...]
इतवार का दिन नौकरी पेशा वालों के लिये आराम का दिन माना जाता है। कुछ इसे बचे काम निपटाने का दिन भी मानते हैं। लेकिन यह वैचारिक मतभेद हर इतवार को खतम हो जाता है क्योंकि बचे काम निपटाने वाले भी अपने काम निपटाने का काम अक्सर अगले इतवार तक के लिये स्थगित कर देते [...]
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