बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में

बसंत पंचमी पर निराला जी के बारे में

[आज बसंत पंचमी को निरालाजी का जन्मदिन मनाया जाता है। इस मौके पर पहले यह लेख फ़िर से पोस्ट कर रहा हूं- निरालाजी को विनम्रता पूर्वक याद करते हुये। मास्टर साहब की टिप्पणी ( आज बसंत पंचमी पर सामयिक लगा यह लेख सो खिंचे चले आये !
जानकारी मिली ! आभार!) ने इसके बारे [...]

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नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें

नये साल में और गये साल में कुछ मुलाकातें

गुलाबी शहर में मिलना कुश से और लविजा के पापा से
बीता साल मजेदार बीता। तमाम अच्छे अनुभव जुड़े। उनके बारे में फ़िर कभी विस्तार से लिखेंगे। फ़िलहाल आप गये साल और नये साल के कुछ फ़ोटो देखिये। गये साल के आखिरी दिनों में राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, अजमेर ,पुष्कर जाना हुआ। जयपुर में कुश [...]

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…..जिंदगी धूप तुम घना साया

…..जिंदगी धूप तुम घना साया

सर्दी में चीजें सिकुड़ जाती हैं। यह बात हम तब से जानते हैं जब हमने हाईस्कूल भी नहीं पास किया था। हालांकि यह बात वे भी जानते हैं जिन्होंने कौनौ स्कूल कभी भी नहीं पास किया। सर्दी में लोगों को सिहरते-ठिठुरते भी देखा है। अभी जब यह लिख रहा हूं तो लग रहा है कि [...]

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कविता-फ़विता, ब्लॉगर से मुलाकात और मानहानि

कविता-फ़विता, ब्लॉगर से मुलाकात और मानहानि

आप कुछ कविता-फ़बिता लिखते हैं:
दो दिन पहले गौतम राजरिशी ने एस.एम.एस. करके सूचना दी कि मासिक पत्रिका परिकथा में हमारे ब्लाग का जिक्र है। फोन करके पता किया उनसे तो पता चला कि परसाईजी के बारे में संस्मरण वाली पोस्ट का जिक्र था उसमें। शाम को पत्रिका खरीद कर लाया तो देखा कि पत्रिका में [...]

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सटकर बैठा चांद एक दिन मम्मी से यह बोला

चिठेरा-चिठेरी काफ़ी दिन बाद मिले थे। आपस में बातचीत करने के पहले उन्होंने एक-दूसरे की असलियत पहचानने के लिये पहले से तय पासवर्ड वाक्यों का आदान-प्रदान किया।
चिठेरी:उधार प्रेम की कैंची है!
चिठेरा:यह प्रेम के रिश्तों को काटती ही नहीं संवारती भी है।
 
चिठेरी:आज नकद कल उधार!
चिठेरा:इसी लिये हम पहले ही ले गये यार।
 
चिठेरी:धर्म वह है जो धारण [...]

सीजर हम अब भी तेरे साथ!

विवेक सिंह ने कालजयी कविता ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ? लिख डाली आज। आज हमारे दफ़्तर में ब्रूटस आया और ये कविता देकर निकल लिया। हमसे कहा कि अपने ब्लाग पर काहे नहीं पोस्ट करते! बोला आप कर दो अपने ब्लाग पर। जब अपना ब्लाग बनायेंगे तो पोस्ट करेंगे। [...]

….भेजे क्यों मीठे सपने

रात सो गये थोड़ा जल्दी, हालांकि थके नहीं थे ज्यादा,
तीन हीरोइनें ले गयीं, हमसे सपन-मिलन का वादा।
हमने उनको बहुत बताया, हैं बहुत बिजी हम भईया,
बात न मानी वे सुंदरियां, बोली मत करो निराश फ़ुरसतिया॥
बात बताई श्रीमती को, फ़िर तो उनकी खिलखिल गूंजी,
चले खरीदने चांदमहल हो, है घर में भांग न भूंजी।
मिलना जब उन [...]