चलो एक कप चाय हो जाये

चलो एक कप चाय हो जाये

आज सुबह जरा और जल्दी उठ गये। अलार्म तो बहुत पहले बजा था पर उसको हम उत्ती ही तवज्जो देते हैं जित्ती सरकारें अदालतों की तल्ख टिप्पणियों को देती हैं। सुनकर मटिया देते हैं। बहुत किया तो फ़ौरन कुछ देर आगे का लगा देते हैं। लेकिन अलार्म के बाद फ़िर फ़ोन भी बजा। हमारे पुराने [...]

Full Story »
हमने कई नजारे देखे

हमने कई नजारे देखे

आज फ़िर सुबह हुई। कसमसाते हुये उठे। पैंट-शर्ट को, अपने लक की तरह, पहिन के टहलने निकले। जूते में पैर घुसा लिया। एक एड़ी बहुत देर तक पूरी तरह से जूते में घुसी नहीं। सोचा कुछ देर में अपने आप एडजस्ट हो जायेगी- जैसे शादी-शुदा जोड़े कुछ दिन में एडजस्ट कर लेते हैं। लेकिन जूते [...]

Full Story »
आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है

आलस्य का वात्सल्य अद्भुत होता है

रोज की तरह आज फ़िर पांच बजे जाग गये। जाग गये लेकिन उठे नहीं। जागने का तो ऐसा है कि अलार्म लगा है। रोज घनघनाता है। वो मोबाइल के हाथ में है। उसको क्या? जबका लगाओ, बज जायेगा। लेकिन अलार्म बजने और उठने में फ़र्क है। उठना मुश्किल काम है जी। जागने के बाद सोचते [...]

Full Story »
धरे गये घूस के नाते में

धरे गये घूस के नाते में

धरे गये घूस के नाते में, पैंट उतर गयी घाते में। हाल-बड़ा बेहाल हुआ जी, नंगा शरम से लाल हुआ जी। कल अखबार में एक खबर पढ़ी। एक पटवारी टाइप कोई पदाधिकारी एक हजार रुपये की घूस लेते पकड़ा गया। पैसे लेकर उसने पैंट की जेब में रख लिये। सोचा आराम से खर्चा करेंगे। लेकिन [...]

Full Story »
बस मुस्कराते रहें ….

बस मुस्कराते रहें ….

अक्सर इधर-उधर पढ़ने को मिल जाता है- मुस्कराते रहें। मुस्कराते रहें मतलब कीप स्माइलिंग। वैसे भी मुस्कराते हुये लोग कित्ते खूबसूरत लगते हैं। मिलकर मुस्कराते हुये तो और अच्छे। और खूबसूरत। आपके हाथ में, हाथ में क्या चेहरे पर भी, बस यही बचा है जो आप धारण कर सकते हैं। मुस्कराते रहें। इसमें न कोई [...]

Full Story »
दफ़्तर पुराण

दफ़्तर पुराण

निकल पड़े घर से मर्दाने अब ये सब दफ़्तर जायेंगे। हंसी-ठहाका सब करेंगे मर्दे काम इधर-उधर सरकायेंगे। अपन का पूरा-पक्का है सब, रामलाल का पिछड़ा है जी। रामलाल का कहना है कि, बाकी का कूड़ा-कचरा है। रोयेंगे सब सुविधाओं को अपने को बेचारा बतलायेंगे। कोसेंगे से उस नौकरिया को, जिसे वे कभी न छोड़ पायेंगे। [...]

दफ़्तर प्रयाण गीत

दफ़्तर प्रयाण गीत

चल बबुबा अब उठ बिस्तर से, हो तैयार औ चल दफ़्तर को। काम-धाम कर खुब अच्छे से, हंसी-खुशी जी ले हर पल को! मस्त मिलो, हंसकर के सबसे, चिंता को रख तू निज ठेंगे पे। काम करो,सब धांस के बच्चा, रहो सजग कोई दे न गच्चा। शाम मिलेंगे तो फ़िर देखेंगे, अभी निकल ले तू [...]

धूप तड़ी पार हुई

धूप तड़ी पार हुई

बर्फ़ का छापा पड़ा चप्पे-चप्पे पे सर्द-पुलिस कोहरे का कर्फ़्यू लगा पहाड़ सब सहम गये। ये धूप तड़ी पार हुई पहुंच गई पहाड़ पार पसर गयी गली,मैदान छत,खेत, खलिहान में। घास पर रही खेलती, सब फ़ूल को हिला दिया, पेड़ खड़ा देखा गुमसुम, प्यार से नहला दिया। धूप के वियोग में , पहाड़ तो ठिठुर [...]