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	<title>Comments on: कन्हैयालाल नंदन- मेरे बंबई वाले मामा</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: सपनो की डोर पड़ी पलकों का पालना</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-43974</link>
		<dc:creator>सपनो की डोर पड़ी पलकों का पालना</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Nov 2009 09:21:34 +0000</pubDate>
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		<description>[...] ने अकसर अपने भैया  के गीत गुननुनाती हैं। एक फ़ेफ़ड़ा काफ़ी [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] ने अकसर अपने भैया  के गीत गुननुनाती हैं। एक फ़ेफ़ड़ा काफ़ी [...]</p>
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		<title>By: उन दुआओं का मुझपे असर चाहिए</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-40922</link>
		<dc:creator>उन दुआओं का मुझपे असर चाहिए</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jul 2009 03:11:20 +0000</pubDate>
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		<description>[...] नन्दन संबंधित कड़ियां: १.कन्हैयालाल नंदन- मेरे बंबई वाले मामा  २. कन्हैयालाल नंदन की कवितायें ३. [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] नन्दन संबंधित कड़ियां: १.कन्हैयालाल नंदन- मेरे बंबई वाले मामा  २. कन्हैयालाल नंदन की कवितायें ३. [...]</p>
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		<title>By: वनन में बागन में बगर्‌यो बसंत है&#8230;</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-36452</link>
		<dc:creator>वनन में बागन में बगर्‌यो बसंत है&#8230;</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2009 11:02:18 +0000</pubDate>
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		<description>[...] डा.कन्हैयालाल नंदन इस पोस्ट की सारी फो...फ़्लिकर  से साभार [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] डा.कन्हैयालाल नंदन इस पोस्ट की सारी फो&#8230;फ़्लिकर  से साभार [...]</p>
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		<title>By: प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-28744</link>
		<dc:creator>प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2008 10:29:50 +0000</pubDate>
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		<description>आपके मामा हैं तो आप और नंदन जी क्या लगेंगे ? भाई फतेहपुर होने के नाते आपसे इतना तो पूछने का हक मेरा बनता ही है। 
आपने रिश्तेदारी के रूप में ही सही जो जानकारी दी वह  रोचक व मजेदार थी । अच्छा हुआ की इसी बहाने हम फतेहपुर वाले उनके बारे में मामा से न सही भांजे से ही , जा तो पाए ।
मेरा प्रणाम !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके मामा हैं तो आप और नंदन जी क्या लगेंगे ? भाई फतेहपुर होने के नाते आपसे इतना तो पूछने का हक मेरा बनता ही है।<br />
आपने रिश्तेदारी के रूप में ही सही जो जानकारी दी वह  रोचक व मजेदार थी । अच्छा हुआ की इसी बहाने हम फतेहपुर वाले उनके बारे में मामा से न सही भांजे से ही , जा तो पाए ।<br />
मेरा प्रणाम !</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; सम्मान का एरियर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-20099</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; सम्मान का एरियर</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Mar 2008 02:19:36 +0000</pubDate>
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		<description>[...] कलमामाजी को फोन किया तो पता चला वे मुम्बई में थे। पता यह भी चला कि उनको सन २००६ का महाराष्ट्र हिन्दी सेवा सम्मान दिये जाने की घोषणा हुई है। उसी सिलसिले में वे मुम्बई आये हुये थे। वहीं बान्द्रा इलाके के किसी गेस्ट हाउस में ठहरे हुये हैं। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] कलमामाजी को फोन किया तो पता चला वे मुम्बई में थे। पता यह भी चला कि उनको सन २००६ का महाराष्ट्र हिन्दी सेवा सम्मान दिये जाने की घोषणा हुई है। उसी सिलसिले में वे मुम्बई आये हुये थे। वहीं बान्द्रा इलाके के किसी गेस्ट हाउस में ठहरे हुये हैं। [...]</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; सपनो की डोर पड़ी पलकों का पालना</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-17408</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; सपनो की डोर पड़ी पलकों का पालना</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Nov 2007 21:16:36 +0000</pubDate>
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		<description>[...] अम्मा ने अकसर अपने भैया  के गीत गुननुनाती हैं। एक फ़ेफ़ड़ा काफ़ी समय पहले टी.बी. से खराब हो गया था। पिछले साल पैरालिसिस का हमला झेला। आजकल सांस के तकलीफ़ है। आंख का आपरेशन अभी पिछले महीन करवाया। हर दूसरे दिन कहती हैं -अनूप, अभै रोशनी सही नहीं है। हम कहते हैं -अइहै ,तुम तो परेशान हो बिना मतलब अम्मा!   हमारे घर में सबसे ज्यादा &#8216;अवधिंग्लिस&#8217; अगर कोई बोलता है तो वो हमारा अम्मा हैं। टेंशन न लेव, प्रोग्रामै नहीं पता चलत आय, उई लेफ़्फ़्राइट कई के चले गये। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] अम्मा ने अकसर अपने भैया  के गीत गुननुनाती हैं। एक फ़ेफ़ड़ा काफ़ी समय पहले टी.बी. से खराब हो गया था। पिछले साल पैरालिसिस का हमला झेला। आजकल सांस के तकलीफ़ है। आंख का आपरेशन अभी पिछले महीन करवाया। हर दूसरे दिन कहती हैं -अनूप, अभै रोशनी सही नहीं है। हम कहते हैं -अइहै ,तुम तो परेशान हो बिना मतलब अम्मा!   हमारे घर में सबसे ज्यादा &#8216;अवधिंग्लिस&#8217; अगर कोई बोलता है तो वो हमारा अम्मा हैं। टेंशन न लेव, प्रोग्रामै नहीं पता चलत आय, उई लेफ़्फ़्राइट कई के चले गये। [...]</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; ईमानदारी की कीमत</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-14710</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; ईमानदारी की कीमत</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Sep 2007 14:11:28 +0000</pubDate>
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		<description>[...] बहरहाल, जब हम कैलाश बिहार पहुंचे तो सबेरे के नौ बज चुके थे। रास्ते में मामाजी को फोन करके पता कन्फ़र्म किया। घर पहुंचकर सरदारजी आटो वाले का टैक्सी नम्बर नोट किया। उनसे कहा कि अपना आटोग्राफ़ भी दे दें। सरदारजी ने मेरी नोटबुक में लिखा- बलबीर भाटिया DLIRK1651 9910499682 Good man for honesty. हस्ताक्षर बलबीर भाटिया ०९.०९.०७  सरदार जी इस बीच बातचीत करके बहुत प्रभावित हो चुके थे। हमने उनको १२० के अलावा तीस रुपये और दे दिये। ईमानदारी हमारे लिये पचास रुपये महंगी पड़ गयी। इसीलिये लोग ईमानदार बने रहने से बिदकते हैं। लेकिन हम यही सोचकर खुश हैं सरदारजी के दस लाख चले चले गये, हमारे तो सिर्फ़ पचास ही गये। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] बहरहाल, जब हम कैलाश बिहार पहुंचे तो सबेरे के नौ बज चुके थे। रास्ते में मामाजी को फोन करके पता कन्फ़र्म किया। घर पहुंचकर सरदारजी आटो वाले का टैक्सी नम्बर नोट किया। उनसे कहा कि अपना आटोग्राफ़ भी दे दें। सरदारजी ने मेरी नोटबुक में लिखा- बलबीर भाटिया DLIRK1651 9910499682 Good man for honesty. हस्ताक्षर बलबीर भाटिया ०९.०९.०७  सरदार जी इस बीच बातचीत करके बहुत प्रभावित हो चुके थे। हमने उनको १२० के अलावा तीस रुपये और दे दिये। ईमानदारी हमारे लिये पचास रुपये महंगी पड़ गयी। इसीलिये लोग ईमानदार बने रहने से बिदकते हैं। लेकिन हम यही सोचकर खुश हैं सरदारजी के दस लाख चले चले गये, हमारे तो सिर्फ़ पचास ही गये। [...]</p>
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	<item>
		<title>By: फुरसतिया &#187; पूना वाया दिल्ली</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-14524</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; पूना वाया दिल्ली</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Sep 2007 18:05:24 +0000</pubDate>
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		<description>[...] सो सबेरे दिल्ली पहुंचेगे नौ सितम्बर को। वहां सबसे पहले अपने मामाजी मुलाकात करेंगे। मामाजी हमारे रहते हैं कैलाश हिल्स में। पास ही में मैथिलीजी का आफ़िस है। सो वहीं विचार बनाये हैं कि जो साथी लोग आ सके उनका-उनका दर्शन कर लें। इतवार है सो ज्यादा लोगों का छुट्टिये होगा लेकिन बहुत सारा कामकाज रहता है। फिर भी टाइम निकल पाये तो आइयेगा। तमाम साथियों के फोन नम्बर हमको जीतू ने दिये हैं उनसे बतिया्ने का प्रयास करूंगा। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] सो सबेरे दिल्ली पहुंचेगे नौ सितम्बर को। वहां सबसे पहले अपने मामाजी मुलाकात करेंगे। मामाजी हमारे रहते हैं कैलाश हिल्स में। पास ही में मैथिलीजी का आफ़िस है। सो वहीं विचार बनाये हैं कि जो साथी लोग आ सके उनका-उनका दर्शन कर लें। इतवार है सो ज्यादा लोगों का छुट्टिये होगा लेकिन बहुत सारा कामकाज रहता है। फिर भी टाइम निकल पाये तो आइयेगा। तमाम साथियों के फोन नम्बर हमको जीतू ने दिये हैं उनसे बतिया्ने का प्रयास करूंगा। [...]</p>
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		<title>By: Sanjeet Tripathi</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-13803</link>
		<dc:creator>Sanjeet Tripathi</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 05:20:15 +0000</pubDate>
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		<description>शानदार!!
तहेदिल से शुक्रिया!! दिल खुश हो गया इसे पढ़कर!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शानदार!!<br />
तहेदिल से शुक्रिया!! दिल खुश हो गया इसे पढ़कर!!</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; जिन्दगी जिंदादिली का नाम है</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/151/comment-page-1#comment-13795</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; जिन्दगी जिंदादिली का नाम है</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Aug 2007 02:33:18 +0000</pubDate>
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		<description>[...] यह मन की ताकत है जिसकी बदौलत हमारे मामा नंदनजी ७४ साल की उमर में हफ़्ते में दो दिन डायलिसिस करवाने के बावजूद बात करने पर दूसरे का हाल-चाल पहले पूछते हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने के लिये न्यूयार्क तक टहल आते हैं, अक्सर खुद गाड़ी चलाते हैं। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] यह मन की ताकत है जिसकी बदौलत हमारे मामा नंदनजी ७४ साल की उमर में हफ़्ते में दो दिन डायलिसिस करवाने के बावजूद बात करने पर दूसरे का हाल-चाल पहले पूछते हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लेने के लिये न्यूयार्क तक टहल आते हैं, अक्सर खुद गाड़ी चलाते हैं। [...]</p>
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