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	<title>Comments on: परदे के पीछे-कौन है बे?</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: हिमांशु</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2997</link>
		<dc:creator>हिमांशु</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 18:31:46 +0000</pubDate>
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		<description>अरे भाइयो-बहनो माताओं-पिताओ आकाओं। ऐसी कौनसी मुई इमरजेन्सी आ गयी जो खबरिया के २-३ पेज के लेख पर ही बाहें खुल गयी,भृकुटी तन गयी और तलवारें (कलम पढें) खिँच गयीं। 

हो सकता है वो बच्चे हों, जोश है कुछ करने का। कुछ मौका तो दो। 

लिखते हैं शहसवार मैदाने ब्लॉग में,
वो क्या खाक लिखंगे जो सिर्फ़ औरों की &#039;लिया&#039; करते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे भाइयो-बहनो माताओं-पिताओ आकाओं। ऐसी कौनसी मुई इमरजेन्सी आ गयी जो खबरिया के २-३ पेज के लेख पर ही बाहें खुल गयी,भृकुटी तन गयी और तलवारें (कलम पढें) खिँच गयीं। </p>
<p>हो सकता है वो बच्चे हों, जोश है कुछ करने का। कुछ मौका तो दो। </p>
<p>लिखते हैं शहसवार मैदाने ब्लॉग में,<br />
वो क्या खाक लिखंगे जो सिर्फ़ औरों की &#8216;लिया&#8217; करते हैं।</p>
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		<title>By: anunad</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2996</link>
		<dc:creator>anunad</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 17:40:47 +0000</pubDate>
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		<description>भाई अनूप जी, मैं अनाम रहकर लिखने वालों के बारे में आपके विचारों से सहमत नही हूँ; किन्तु राहुल के विचारों से भी सहमत नहीं हो सकता। राहुल् के लिये यही कहूँगा कि कोई किसी को कुछ बनाता नही है, हर व्यक्ति अपनी क्षमता से कुछ बनता है। अनूप जी ने अपनी काबिलियत से हिन्दी चिट्ठाजगत में एक सम्माननीय जगह बनायी है, आप भी बना सकते हैं।

नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य कृयते मृगै:&#124;
विक्रमार्जितसत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता।।

( वन के जन्तु सिंह का न तो अभिषेक करते हैं, न कोई संस्कार। (किन्तु) अपने विक्रम से अर्जित उसकी शक्ति ही उसे मृगेन्द्र बना देती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाई अनूप जी, मैं अनाम रहकर लिखने वालों के बारे में आपके विचारों से सहमत नही हूँ; किन्तु राहुल के विचारों से भी सहमत नहीं हो सकता। राहुल् के लिये यही कहूँगा कि कोई किसी को कुछ बनाता नही है, हर व्यक्ति अपनी क्षमता से कुछ बनता है। अनूप जी ने अपनी काबिलियत से हिन्दी चिट्ठाजगत में एक सम्माननीय जगह बनायी है, आप भी बना सकते हैं।</p>
<p>नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य कृयते मृगै:|<br />
विक्रमार्जितसत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता।।</p>
<p>( वन के जन्तु सिंह का न तो अभिषेक करते हैं, न कोई संस्कार। (किन्तु) अपने विक्रम से अर्जित उसकी शक्ति ही उसे मृगेन्द्र बना देती है।</p>
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	<item>
		<title>By: प्रमेन्‍्द्र प्रताप सिंह</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2995</link>
		<dc:creator>प्रमेन्‍्द्र प्रताप सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 15:44:32 +0000</pubDate>
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		<description>मै तो यही कहूगां कि छद्म नाम से लिखना गलत नही है परन्‍तु आपको अपने बचाव अर्थात गोपनीय रहने की इतनी आवाश्‍यकत है तो व्‍यक्तिगत रूप से किसी चिठ्ठेकार पर टिप्‍पडी न करे। एक तो गोपनीय रहना चाहते है तथा दूसरे को गाली दे ऐसे दोहरे मापदण्‍ड शोभा नही देता है। अगर आपको आक्षेप करना है तो सामने आना ही होगा। 
इसी से सम्‍बन्धित मेरा लेख है &#039;&#039;अल्प ब्लाग जीवन के फटे में पैबँद&#039;&#039; यहां पर  http://pramendra.blogspot.com</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मै तो यही कहूगां कि छद्म नाम से लिखना गलत नही है परन्‍तु आपको अपने बचाव अर्थात गोपनीय रहने की इतनी आवाश्‍यकत है तो व्‍यक्तिगत रूप से किसी चिठ्ठेकार पर टिप्‍पडी न करे। एक तो गोपनीय रहना चाहते है तथा दूसरे को गाली दे ऐसे दोहरे मापदण्‍ड शोभा नही देता है। अगर आपको आक्षेप करना है तो सामने आना ही होगा।<br />
इसी से सम्‍बन्धित मेरा लेख है &#8221;अल्प ब्लाग जीवन के फटे में पैबँद&#8221; यहां पर  <a href="http://pramendra.blogspot.com" rel="nofollow">http://pramendra.blogspot.com</a></p>
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		<title>By: Anoop Bhargava</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2992</link>
		<dc:creator>Anoop Bhargava</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 10:41:46 +0000</pubDate>
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		<description>अगर जवाबदेही न देनी हो तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है - चाहे सही हो या गलत । बस लिखनें वाले के मन को खुश करना चाहिये । क्या फ़र्क पड़ता है ? कुछ भी तो दाव पर नही है ? ऐसे में उस लेखन की कितनी महत्ता रह जाती है ? मेरे लिये तो बिल्कुल नहीं । 
लेखन में शालीनता का तकाज़ा तो फ़िर भी उठता ही है , चाहे आप नाम से लिखें या बेनाम ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अगर जवाबदेही न देनी हो तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है &#8211; चाहे सही हो या गलत । बस लिखनें वाले के मन को खुश करना चाहिये । क्या फ़र्क पड़ता है ? कुछ भी तो दाव पर नही है ? ऐसे में उस लेखन की कितनी महत्ता रह जाती है ? मेरे लिये तो बिल्कुल नहीं ।<br />
लेखन में शालीनता का तकाज़ा तो फ़िर भी उठता ही है , चाहे आप नाम से लिखें या बेनाम ।</p>
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	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2991</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 08:57:45 +0000</pubDate>
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		<description>बापरे - इतना लम्बा लेख और अब तक 18 टिप्पणीयाँ फिर भी निकाब नही उतारा????

फुरसतिया जीः
इन्टरनेट तो खुली किताब है ना और ब्लॉग तो अपने मन की भडास निकालने के लिए बेहतरीन जगाह है। सबको हक है के अपने ब्लॉग पर खुल कर लिखे और खुल कर लिखने का ये मतलब नही के हर किसी पर कीचड उछाले ये अच्छी बात नही।  मैं शेखचिल्ली और खबरिया के बारे मे जानना नही चाहता मगर अच्छा होता के वोह खुद अपना परिचय करवाते - खैर उन्की अपनी मर्ज़ी।
फुरसतिया जी अपकी बात भी सही है मगर मेरी राए मे आपको चाहिये था के पहले आप उन दोनों को मेल भेज कर फिर चैटिंग से बात चीत बढाते और उन्के बारे मे जानने की कोशिश करते और फिर अप खुद अपने ब्लॉग पर अपने अन्दाज़ मे उनका परिचय करवाते तो पढने वालों को बहुत मज़ा आता और अपने कारनामे पर बधाई पाते।
इस टिप्पणी मे मैं ने वही लिखा जो आपका लेख पढ कर समझ आई - बाकी अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगे तो मैं फुरसतिया जी से क्षमा चाहता हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बापरे &#8211; इतना लम्बा लेख और अब तक 18 टिप्पणीयाँ फिर भी निकाब नही उतारा????</p>
<p>फुरसतिया जीः<br />
इन्टरनेट तो खुली किताब है ना और ब्लॉग तो अपने मन की भडास निकालने के लिए बेहतरीन जगाह है। सबको हक है के अपने ब्लॉग पर खुल कर लिखे और खुल कर लिखने का ये मतलब नही के हर किसी पर कीचड उछाले ये अच्छी बात नही।  मैं शेखचिल्ली और खबरिया के बारे मे जानना नही चाहता मगर अच्छा होता के वोह खुद अपना परिचय करवाते &#8211; खैर उन्की अपनी मर्ज़ी।<br />
फुरसतिया जी अपकी बात भी सही है मगर मेरी राए मे आपको चाहिये था के पहले आप उन दोनों को मेल भेज कर फिर चैटिंग से बात चीत बढाते और उन्के बारे मे जानने की कोशिश करते और फिर अप खुद अपने ब्लॉग पर अपने अन्दाज़ मे उनका परिचय करवाते तो पढने वालों को बहुत मज़ा आता और अपने कारनामे पर बधाई पाते।<br />
इस टिप्पणी मे मैं ने वही लिखा जो आपका लेख पढ कर समझ आई &#8211; बाकी अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगे तो मैं फुरसतिया जी से क्षमा चाहता हूं।</p>
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	<item>
		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2990</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 07:44:12 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/fursatiya/?p=182#comment-2990</guid>
		<description>मैं भी अनूप जी, अतुल जी और ई-स्वामी जी से सहमत हुँ, बहुत पहले यह बात कहना चाहता था, परन्तु खबरिया जी की आज तक वाली पोष्ट पर १५ टिप्पणीयाँ देख कर साहस नहीं जुटा पाया, क्यों कि जब उनकी टिप्पणियों में सारे श्रेष्ठ चिट्ठाकारों कि  टिप्पणियाँ थी और लगभग सबने  उनकी तारीफ़ की थी, फ़िर मेरी क्या हस्ती!!!!
काश मैं अतुल जी की तरह  हिम्मत जुटा पाता।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं भी अनूप जी, अतुल जी और ई-स्वामी जी से सहमत हुँ, बहुत पहले यह बात कहना चाहता था, परन्तु खबरिया जी की आज तक वाली पोष्ट पर १५ टिप्पणीयाँ देख कर साहस नहीं जुटा पाया, क्यों कि जब उनकी टिप्पणियों में सारे श्रेष्ठ चिट्ठाकारों कि  टिप्पणियाँ थी और लगभग सबने  उनकी तारीफ़ की थी, फ़िर मेरी क्या हस्ती!!!!<br />
काश मैं अतुल जी की तरह  हिम्मत जुटा पाता।</p>
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	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2989</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 07:38:27 +0000</pubDate>
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		<description>...There is nothing offensive in those blogs (Khabaria and Shekhchilli) ,we consider them as good humour....

प्रिय मित्र, राहुल.

आप इस चिट्ठे को दुबारा, तिबारा, समझ में आने तक चौबारा और हो सके तो समझ में आने के बाद भी दर्जनों बार पढ़ें.

फिर अपनी राय दें.

इस चिट्ठे पर आपकी राय अंततः वही होगी जो आपका लिखा ऊपर उद्धृत किया गया है. :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>&#8230;There is nothing offensive in those blogs (Khabaria and Shekhchilli) ,we consider them as good humour&#8230;.</p>
<p>प्रिय मित्र, राहुल.</p>
<p>आप इस चिट्ठे को दुबारा, तिबारा, समझ में आने तक चौबारा और हो सके तो समझ में आने के बाद भी दर्जनों बार पढ़ें.</p>
<p>फिर अपनी राय दें.</p>
<p>इस चिट्ठे पर आपकी राय अंततः वही होगी जो आपका लिखा ऊपर उद्धृत किया गया है. <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2987</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 06:02:05 +0000</pubDate>
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		<description>आपने चिट्ठाचर्चा पर राहुल द्वारा अंग्रेज़ी में हड़काने वाली बात लिखी है. मेरा मानना है कि आप उसे यहां उद्धधृत अवश्य करें. तमाम पाठकों तथा इस चिट्ठे पर भी न्याय होगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपने चिट्ठाचर्चा पर राहुल द्वारा अंग्रेज़ी में हड़काने वाली बात लिखी है. मेरा मानना है कि आप उसे यहां उद्धधृत अवश्य करें. तमाम पाठकों तथा इस चिट्ठे पर भी न्याय होगा.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: आशीष</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2985</link>
		<dc:creator>आशीष</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 05:19:34 +0000</pubDate>
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		<description>हम भी आपके इस लेख से  असहमति जाहीर करते हैं। वैसे हम मानते है कि लिखने , पढने और उस पर अपनी राय जाहिर करने के लिये हर कोइ स्वतंत्र है बशर्ते शालीनता की सीमा ना लांघी जाये।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम भी आपके इस लेख से  असहमति जाहीर करते हैं। वैसे हम मानते है कि लिखने , पढने और उस पर अपनी राय जाहिर करने के लिये हर कोइ स्वतंत्र है बशर्ते शालीनता की सीमा ना लांघी जाये।</p>
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	<item>
		<title>By: प्रत्यक्षा</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/182/comment-page-1#comment-2984</link>
		<dc:creator>प्रत्यक्षा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Aug 2006 04:23:11 +0000</pubDate>
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		<description>कोई भी चिट्ठा अगर स्तर हीन है तो पाठक अपने आप एकाध बार को छोडकर पढना , टिप्पणी देना बन्द कर देंगे । कोई चिट्ठा पढे न पढे यह पाठक की अपनी सूझबूझ पर निर्धारित होता है । लिखने की स्वतंत्रता है , विरोध ज़ाहिर करने की भी स्वतंत्रता है । बस भाषा की शालीनता बनी रहे , भावों की शालीनता बनी रहे ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>कोई भी चिट्ठा अगर स्तर हीन है तो पाठक अपने आप एकाध बार को छोडकर पढना , टिप्पणी देना बन्द कर देंगे । कोई चिट्ठा पढे न पढे यह पाठक की अपनी सूझबूझ पर निर्धारित होता है । लिखने की स्वतंत्रता है , विरोध ज़ाहिर करने की भी स्वतंत्रता है । बस भाषा की शालीनता बनी रहे , भावों की शालीनता बनी रहे ।</p>
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