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	<title>Comments on: चल पड़े जिधर दो डग-मग में</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: फ़ुरसतिया-पुराने लेख</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-41682</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया-पुराने लेख</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Jul 2009 07:31:06 +0000</pubDate>
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		<description>[...] 2.पुनि-पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं 3.चल पड़े जिधर दो डग-मग में 4.सबको सम्मति दे भगवान 5..आग का दरिया, [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] 2.पुनि-पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं 3.चल पड़े जिधर दो डग-मग में 4.सबको सम्मति दे भगवान 5..आग का दरिया, [...]</p>
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		<title>By: Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; गांधी की डगर और मैं</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-15443</link>
		<dc:creator>Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; गांधी की डगर और मैं</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Oct 2007 17:11:22 +0000</pubDate>
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		<description>[...] बाद में, पत्रकारिता और जनांदोलनों में मेरी सक्रियता के दौरान कई गांधीवादी विद्वानों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क हुआ और समय-समय पर संगोष्ठियों-साक्षात्कारों में गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों के संबंध में उनके साथ संवाद करने के अवसर भी मिलते रहे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और आजादी के लड़ाई में भगत सिंह एवं नेताजी सुभाष जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका के बारे में विशेष अध्ययन करने के बाद महात्मा गांधी के संबंध में मेरे विचारों में कुछ परिवर्तन जरूर हुआ और इस चिट्ठे पर मैंने यदा-कदा अपनी टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें व्यक्त भी किया। दुर्भाग्य से मेरी ऐसी कुछ टिप्पणियों के बहाने चिट्ठा जगत में विवाद के कुछ अप्रिय प्रसंग भी छिड़े। लेकिन, मेरे जीवनचर्या और मेरी सोच पर बापू के जीवन और विचारों का असर अब भी मेरे अन्य प्रेरणास्रोतों की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने से पहले मैं अपने जीवन-संघर्ष की राह में गांधीवादी सिद्धांतों पर अमल की उपादेयता को एक बार फिर कसौटी पर कसना चाहता हूँ। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] बाद में, पत्रकारिता और जनांदोलनों में मेरी सक्रियता के दौरान कई गांधीवादी विद्वानों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क हुआ और समय-समय पर संगोष्ठियों-साक्षात्कारों में गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों के संबंध में उनके साथ संवाद करने के अवसर भी मिलते रहे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और आजादी के लड़ाई में भगत सिंह एवं नेताजी सुभाष जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका के बारे में विशेष अध्ययन करने के बाद महात्मा गांधी के संबंध में मेरे विचारों में कुछ परिवर्तन जरूर हुआ और इस चिट्ठे पर मैंने यदा-कदा अपनी टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें व्यक्त भी किया। दुर्भाग्य से मेरी ऐसी कुछ टिप्पणियों के बहाने चिट्ठा जगत में विवाद के कुछ अप्रिय प्रसंग भी छिड़े। लेकिन, मेरे जीवनचर्या और मेरी सोच पर बापू के जीवन और विचारों का असर अब भी मेरे अन्य प्रेरणास्रोतों की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने से पहले मैं अपने जीवन-संघर्ष की राह में गांधीवादी सिद्धांतों पर अमल की उपादेयता को एक बार फिर कसौटी पर कसना चाहता हूँ। [...]</p>
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		<title>By: चिठ्ठा चर्चा में एक बेहूदा मजाक &#171; ॥दस्तक॥</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6354</link>
		<dc:creator>चिठ्ठा चर्चा में एक बेहूदा मजाक &#171; ॥दस्तक॥</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jan 2007 05:09:08 +0000</pubDate>
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		<description>[...] गाँधी पर बहस बढ़ी जा रही है। पहले अनूप ने सृजन शिल्पी को छेड़ दिया, उसके बाद सागर के बाबा रामदेव द्वारा कवि प्रदीप को चापलूस पुकारने के वक्तव्य का समर्थन करने पर ऐसी खबर ली कि वे बीमार ही पड़ गये। अब अगला जवाबी चिट्ठा किसका होगा इंतज़ार रहेगा। चिट्ठा चर्चा दिनांक 13जनवरी 2007 [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] गाँधी पर बहस बढ़ी जा रही है। पहले अनूप ने सृजन शिल्पी को छेड़ दिया, उसके बाद सागर के बाबा रामदेव द्वारा कवि प्रदीप को चापलूस पुकारने के वक्तव्य का समर्थन करने पर ऐसी खबर ली कि वे बीमार ही पड़ गये। अब अगला जवाबी चिट्ठा किसका होगा इंतज़ार रहेगा। चिट्ठा चर्चा दिनांक 13जनवरी 2007 [...]</p>
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		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6276</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jan 2007 21:03:10 +0000</pubDate>
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		<description>सभी साथियों का उनके प्रोत्साहन के लिये शुक्रिया! कुछ सवाल अनुराग श्रीवास्तव के हैं और कुछ बातें शिल्पीजी,
सागरजी और श्रीशजी की हैं। इनके बारे में &lt;a href=&quot;http://hindini.com/fursatiya/?p=225&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;अगली पोस्ट&lt;/a&gt; में जिक्र किया गया है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सभी साथियों का उनके प्रोत्साहन के लिये शुक्रिया! कुछ सवाल अनुराग श्रीवास्तव के हैं और कुछ बातें शिल्पीजी,<br />
सागरजी और श्रीशजी की हैं। इनके बारे में <a href="http://hindini.com/fursatiya/?p=225" rel="nofollow">अगली पोस्ट</a> में जिक्र किया गया है।</p>
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	<item>
		<title>By: फुरसतिया &#187; सबको सम्मति दे भगवान</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6271</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; सबको सम्मति दे भगवान</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jan 2007 19:34:17 +0000</pubDate>
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		<description>[...] मैंने अपने पिछले लेख में गांधीजी के बारे में अपने कुछ बेतरतीब से विचार बताये! इस पर कुछ साथियों की टिप्पणियों में सवाल थे कुछ में असहमतियां। मैं इस बारे मे और कुछ कहने-लिखने से बचना चाहता था लेकिन लगता है सवाल का जो जवाब अनुराग श्रीवास्तव भाई ने मांगा है उसके चलते मेरा मन कर रहा है अपने से पूछने और लिखने का। अनुराग श्रीवास्तव के सवाल का जवाब देने से पहले मैं सृजन शिल्पी, सागर चन्द नाहर और और श्रीश चंद की कुछ बातों का जवाब देना चाहता हूं। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] मैंने अपने पिछले लेख में गांधीजी के बारे में अपने कुछ बेतरतीब से विचार बताये! इस पर कुछ साथियों की टिप्पणियों में सवाल थे कुछ में असहमतियां। मैं इस बारे मे और कुछ कहने-लिखने से बचना चाहता था लेकिन लगता है सवाल का जो जवाब अनुराग श्रीवास्तव भाई ने मांगा है उसके चलते मेरा मन कर रहा है अपने से पूछने और लिखने का। अनुराग श्रीवास्तव के सवाल का जवाब देने से पहले मैं सृजन शिल्पी, सागर चन्द नाहर और और श्रीश चंद की कुछ बातों का जवाब देना चाहता हूं। [...]</p>
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		<title>By: मितुल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6259</link>
		<dc:creator>मितुल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jan 2007 21:56:52 +0000</pubDate>
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		<description>अनूप भाई,
आपके लेख ने तो बिलकुल मेरे विचारो को सामने रखा। 

गांधीजी आज भी लोगो के बीच चर्चा का विषय है। सरल सोच रखे तो यह इसलिए है क्योकि उन्होने बाकी लोगो से अलग सोचा, अपने विचारो पर भरोसा रखा और उनपर अमल किया। जब लोगो को लगता था कि कुछ गलत है, कोई ताकत उनपर जुल्म कर रही है। या तो वे उसे मान लेते थे बिना किसी विरोध के। &quot;ऐसा ही होता है&quot;, या &quot;यही भाग्य है&quot; जैसे वाक्यो का साहारा लेकर। या वे इसका विरोध करते थे हिंसक तरीके से। गांधी जी ने एक और पक्ष सामने रखा कि न हम मानेगे कि यह सही है और न ही हम तुम्हे पीटेगें। अहिंसक विरोध का। और उनकी कूटनिती, नेतृत्व क्षमता और अन्य व्यक्तित्व विशेषताओ के कारण उन्होने काफी सफलता हासिल की। इसके लिए जो पीड़ा उन्हे सहनी पडी, उसकी क्षमता कुछ गिने-चुने लोगो के पास ही होती है।

हमे आपके विचार जो आपने लेख पर लिखे है काफी पसंद आए। यह प्रविष्ठी काफी अच्छी है। बधाई।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनूप भाई,<br />
आपके लेख ने तो बिलकुल मेरे विचारो को सामने रखा। </p>
<p>गांधीजी आज भी लोगो के बीच चर्चा का विषय है। सरल सोच रखे तो यह इसलिए है क्योकि उन्होने बाकी लोगो से अलग सोचा, अपने विचारो पर भरोसा रखा और उनपर अमल किया। जब लोगो को लगता था कि कुछ गलत है, कोई ताकत उनपर जुल्म कर रही है। या तो वे उसे मान लेते थे बिना किसी विरोध के। &#8220;ऐसा ही होता है&#8221;, या &#8220;यही भाग्य है&#8221; जैसे वाक्यो का साहारा लेकर। या वे इसका विरोध करते थे हिंसक तरीके से। गांधी जी ने एक और पक्ष सामने रखा कि न हम मानेगे कि यह सही है और न ही हम तुम्हे पीटेगें। अहिंसक विरोध का। और उनकी कूटनिती, नेतृत्व क्षमता और अन्य व्यक्तित्व विशेषताओ के कारण उन्होने काफी सफलता हासिल की। इसके लिए जो पीड़ा उन्हे सहनी पडी, उसकी क्षमता कुछ गिने-चुने लोगो के पास ही होती है।</p>
<p>हमे आपके विचार जो आपने लेख पर लिखे है काफी पसंद आए। यह प्रविष्ठी काफी अच्छी है। बधाई।</p>
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		<title>By: अनुराग</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6201</link>
		<dc:creator>अनुराग</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jan 2007 17:50:43 +0000</pubDate>
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		<description>A great post, no doubt. I agree with most of what is said by Anup Jee.  The post answers most of the questions I have in mind. I am also one of the persons impressed with Gandhijee, however, I do not agree with many actions and activities of Gandhijee during the administrative process of independence in India, especially persisting with Nehru as Prime Minister.  I would suggest the readers to watch the movie &quot;Sardar.&quot;  

More than congrats I want to express thanks to Anup Jee for such a great post.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>A great post, no doubt. I agree with most of what is said by Anup Jee.  The post answers most of the questions I have in mind. I am also one of the persons impressed with Gandhijee, however, I do not agree with many actions and activities of Gandhijee during the administrative process of independence in India, especially persisting with Nehru as Prime Minister.  I would suggest the readers to watch the movie &#8220;Sardar.&#8221;  </p>
<p>More than congrats I want to express thanks to Anup Jee for such a great post.</p>
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	<item>
		<title>By: श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6199</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jan 2007 17:00:57 +0000</pubDate>
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		<description>भाई सभी यहाँ पर गांधी जी के पक्ष में खड़े हैं, फिर हम काहे विलेन बनने लगे। 

गांधी जी की महानता पर किसी को संदेह नहीं, उनकी देशभक्ति, उनकी निष्ठा और उनके इरादों पर भी कोई शक नही। लेकिन उनकी नीतियां कितनी सही थीं, कितनी कामयाब थीं, उनके फैसले कितने सही थे इस पर विचार अवश्य किया जा सकता है।

लेकिन एक बात मैं डंके की चोट पर कह सकता हूँ कि गांधी भी इंसान ही थे, उन्होंने भी गल्तियाँ कीं, वे जिद्दी थे अपने अलावा किसी की नहीं सुनते थे, अपना निर्णय सब पर थोपते थे, उनका ख्याल था कि केवल एकमात्र वे ही सही थे। उनके प्रयोग लाखों भारतीयों की लाशों पर किए गए। अंत मैं एक बात और यदि गांधी को गोडसे ने नहीं मारा होता वे आज इतने &#039;महान&#039; व्यक्ति नहीं होते।

अगर सीता मैया को त्यागने के लिए भगवान राम पर अंगुली उठाई जा सकती है तो एक बात पक्की है कि रामभक्त गांधी बाबा पर भी बहस होनी ही चाहिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाई सभी यहाँ पर गांधी जी के पक्ष में खड़े हैं, फिर हम काहे विलेन बनने लगे। </p>
<p>गांधी जी की महानता पर किसी को संदेह नहीं, उनकी देशभक्ति, उनकी निष्ठा और उनके इरादों पर भी कोई शक नही। लेकिन उनकी नीतियां कितनी सही थीं, कितनी कामयाब थीं, उनके फैसले कितने सही थे इस पर विचार अवश्य किया जा सकता है।</p>
<p>लेकिन एक बात मैं डंके की चोट पर कह सकता हूँ कि गांधी भी इंसान ही थे, उन्होंने भी गल्तियाँ कीं, वे जिद्दी थे अपने अलावा किसी की नहीं सुनते थे, अपना निर्णय सब पर थोपते थे, उनका ख्याल था कि केवल एकमात्र वे ही सही थे। उनके प्रयोग लाखों भारतीयों की लाशों पर किए गए। अंत मैं एक बात और यदि गांधी को गोडसे ने नहीं मारा होता वे आज इतने &#8216;महान&#8217; व्यक्ति नहीं होते।</p>
<p>अगर सीता मैया को त्यागने के लिए भगवान राम पर अंगुली उठाई जा सकती है तो एक बात पक्की है कि रामभक्त गांधी बाबा पर भी बहस होनी ही चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: डा प्रभात टन्डन</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6195</link>
		<dc:creator>डा प्रभात टन्डन</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jan 2007 14:59:29 +0000</pubDate>
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		<description>गाँधी जी के बारे मे एक स्वस्थ दृष्टिकोणात्मक लेख लिखने के लिये बधाई!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गाँधी जी के बारे मे एक स्वस्थ दृष्टिकोणात्मक लेख लिखने के लिये बधाई!</p>
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	<item>
		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/224/comment-page-1#comment-6191</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jan 2007 14:05:10 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे शब्दों में वो क्षमता नहीं, जो इस लेख की सारगर्भिता की प्रशंसा कर सकें. इतना कुछ समय-बेसमय पढ़ा गाँधी जी पर. मगर सहज और सरल शब्दों की इस बहती नदी के प्रवाह में मन प्रसन्न हो गया. ऐसे ही शुद्ध लेखन का इंतजार हमेशा रहेगा. बहुत साधुवाद और असीम लेखन क्षमता के लिये बधाई. शुभकामनायें.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे शब्दों में वो क्षमता नहीं, जो इस लेख की सारगर्भिता की प्रशंसा कर सकें. इतना कुछ समय-बेसमय पढ़ा गाँधी जी पर. मगर सहज और सरल शब्दों की इस बहती नदी के प्रवाह में मन प्रसन्न हो गया. ऐसे ही शुद्ध लेखन का इंतजार हमेशा रहेगा. बहुत साधुवाद और असीम लेखन क्षमता के लिये बधाई. शुभकामनायें.</p>
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