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	<title>Comments on: सबको सम्मति दे भगवान</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: हरि प्रकाश गर्ग</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-16150</link>
		<dc:creator>हरि प्रकाश गर्ग</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Oct 2007 13:41:01 +0000</pubDate>
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		<description>निस्संदेह प्रदीप जी एक बहुत अच्छे गीतकार व गायक थे और संभवतः चापलूस भी न रहे हों और अपनी नीयत से पूर्णतः इमानदार भी रहे हों लेकिन अन्य करोड़ों भारतवासियों के ही समान भ्रम का शिकार रहे हों।

विश्व में कोई भी देश अहिंसा से स्वतंत्र हो जाए यह वास्तव में यह संभव ही नहीं है। अहिंसा से स्वतन्त्रता केवल किताबी सिद्धान्त है। किसी को गुलाम बनाने की मानसिकता रखने वाले लोगों का नैतिक स्तर इतना ऊंचा नहीं होता कि वे अहिंसा जैसे विचारों या व्यवहारों से प्रभावित हो कर किसी को आज़ाद कर दें। बल्कि ग़ुलामों की अहिंसा तो उनके कार्य को और सरल व निष्कंटक बना देती है और उन्हे और लंबे समय तक उन्हे जमाए रखने में मदद करती है। गांधी जी की अहिंसा ने यही किया भी। 
अहिंसा का अर्थ किसी निरीह, निरपराध व निर्बल पर अपनी शक्ति या साधनों का दुरुपयोग करके उसका अकारण अनिष्ट न करना है न कि आतताय़ी को छूट दे कर उसका उत्साह बढ़ाना। यदि गांधी जी वाली अहिंसा को मानें तो आपके सारे अवतार नृसिंह, वाराह, राम, कृष्ण, हनुमान आदि सबसे बड़े हिंसक थे, जिनमें से राम नाम का सहारा ले कर गांधी जी को महात्मा बनाया गया। इस हिसाब से तो गांधी जी ठीक थे और उनके आराध्य ऱाम ग़लत।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>निस्संदेह प्रदीप जी एक बहुत अच्छे गीतकार व गायक थे और संभवतः चापलूस भी न रहे हों और अपनी नीयत से पूर्णतः इमानदार भी रहे हों लेकिन अन्य करोड़ों भारतवासियों के ही समान भ्रम का शिकार रहे हों।</p>
<p>विश्व में कोई भी देश अहिंसा से स्वतंत्र हो जाए यह वास्तव में यह संभव ही नहीं है। अहिंसा से स्वतन्त्रता केवल किताबी सिद्धान्त है। किसी को गुलाम बनाने की मानसिकता रखने वाले लोगों का नैतिक स्तर इतना ऊंचा नहीं होता कि वे अहिंसा जैसे विचारों या व्यवहारों से प्रभावित हो कर किसी को आज़ाद कर दें। बल्कि ग़ुलामों की अहिंसा तो उनके कार्य को और सरल व निष्कंटक बना देती है और उन्हे और लंबे समय तक उन्हे जमाए रखने में मदद करती है। गांधी जी की अहिंसा ने यही किया भी।<br />
अहिंसा का अर्थ किसी निरीह, निरपराध व निर्बल पर अपनी शक्ति या साधनों का दुरुपयोग करके उसका अकारण अनिष्ट न करना है न कि आतताय़ी को छूट दे कर उसका उत्साह बढ़ाना। यदि गांधी जी वाली अहिंसा को मानें तो आपके सारे अवतार नृसिंह, वाराह, राम, कृष्ण, हनुमान आदि सबसे बड़े हिंसक थे, जिनमें से राम नाम का सहारा ले कर गांधी जी को महात्मा बनाया गया। इस हिसाब से तो गांधी जी ठीक थे और उनके आराध्य ऱाम ग़लत।</p>
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	<item>
		<title>By: Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; गांधी की डगर और मैं</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-15438</link>
		<dc:creator>Srijan Shilpi &#187; Blog Archive &#187; गांधी की डगर और मैं</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Oct 2007 16:57:46 +0000</pubDate>
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		<description>[...] बाद में, पत्रकारिता और जनांदोलनों में मेरी सक्रियता के दौरान कई गांधीवादी विद्वानों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क हुआ और समय-समय पर संगोष्ठियों-साक्षात्कारों में गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों के संबंध में उनके साथ संवाद करने के अवसर भी मिलते रहे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और आजादी के लड़ाई में भगत सिंह एवं नेताजी सुभाष जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका के बारे में विशेष अध्ययन करने के बाद महात्मा गांधी के संबंध में मेरे विचारों में कुछ परिवर्तन जरूर हुआ और इस चिट्ठे पर मैंने यदा-कदा अपनी टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें व्यक्त भी किया। दुर्भाग्य से मेरी ऐसी कुछ टिप्पणियों के बहाने चिट्ठा जगत में विवाद के कुछ अप्रिय प्रसंग भी छिड़े। लेकिन, मेरे जीवनचर्या और मेरी सोच पर बापू के जीवन और विचारों का असर अब भी मेरे अन्य प्रेरणास्रोतों की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने से पहले मैं अपने जीवन-संघर्ष की राह में गांधीवादी सिद्धांतों पर अमल की उपादेयता को एक बार फिर कसौटी पर कसना चाहता हूँ। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] बाद में, पत्रकारिता और जनांदोलनों में मेरी सक्रियता के दौरान कई गांधीवादी विद्वानों और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क हुआ और समय-समय पर संगोष्ठियों-साक्षात्कारों में गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों के संबंध में उनके साथ संवाद करने के अवसर भी मिलते रहे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और आजादी के लड़ाई में भगत सिंह एवं नेताजी सुभाष जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका के बारे में विशेष अध्ययन करने के बाद महात्मा गांधी के संबंध में मेरे विचारों में कुछ परिवर्तन जरूर हुआ और इस चिट्ठे पर मैंने यदा-कदा अपनी टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें व्यक्त भी किया। दुर्भाग्य से मेरी ऐसी कुछ टिप्पणियों के बहाने चिट्ठा जगत में विवाद के कुछ अप्रिय प्रसंग भी छिड़े। लेकिन, मेरे जीवनचर्या और मेरी सोच पर बापू के जीवन और विचारों का असर अब भी मेरे अन्य प्रेरणास्रोतों की तुलना में कहीं अधिक है। लेकिन जीवन में आगे बढ़ने से पहले मैं अपने जीवन-संघर्ष की राह में गांधीवादी सिद्धांतों पर अमल की उपादेयता को एक बार फिर कसौटी पर कसना चाहता हूँ। [...]</p>
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	<item>
		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-14181</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Aug 2007 02:00:48 +0000</pubDate>
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		<description>यह पुनः प्रकाशित क्यूँ की गई, वजह बताई जाये..वरना विवाद होगा..हा हा!!! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह पुनः प्रकाशित क्यूँ की गई, वजह बताई जाये..वरना विवाद होगा..हा हा!!! <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: अनूप भार्गव</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6356</link>
		<dc:creator>अनूप भार्गव</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jan 2007 07:07:18 +0000</pubDate>
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		<description>एक और अच्छे लेख के लिये बधाई । मुझे प्रेमलता जी की बात भी बहुत अच्छी लगी, 
&quot;गांधी एक दृष्टिकोण है&quot; । 
बहुत कम शब्दों में बहुत गहरी बात .....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक और अच्छे लेख के लिये बधाई । मुझे प्रेमलता जी की बात भी बहुत अच्छी लगी,<br />
&#8220;गांधी एक दृष्टिकोण है&#8221; ।<br />
बहुत कम शब्दों में बहुत गहरी बात &#8230;..</p>
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		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6328</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 16:40:34 +0000</pubDate>
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		<description>आज इतने सालों बाद, गाँधी पर चिल्लमचिल्ली क्यों? गाँधीवाद एक दृष्टिकोण है, इसके मानने वाले और ना मानने वाले कई होंगे। इसलिए मानो तो ठीक, ना मानो तो कम से कम अनुचित शब्दों का प्रयोग तो मत करो।

रही बात गलतियों की, गाँधी भी एक इन्सान थे, वे खुद कहते थे, अनुभव ही सबकुछ सिखाता है। हो सकता है कुछ गलतिया उनसे भी हो गयी है, लेकिन किसी मृत-आत्मा के बारे मे कोई अनुचित बात करना ठीक नही, वो भी तब, जब उससे कुछ हासिल नही होना। रही बात कांग्रेस की, तो भैया, उसके बारे मे चर्चा करो ना, गाँधीजी को बीच मे काहे घसीट रहे हो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज इतने सालों बाद, गाँधी पर चिल्लमचिल्ली क्यों? गाँधीवाद एक दृष्टिकोण है, इसके मानने वाले और ना मानने वाले कई होंगे। इसलिए मानो तो ठीक, ना मानो तो कम से कम अनुचित शब्दों का प्रयोग तो मत करो।</p>
<p>रही बात गलतियों की, गाँधी भी एक इन्सान थे, वे खुद कहते थे, अनुभव ही सबकुछ सिखाता है। हो सकता है कुछ गलतिया उनसे भी हो गयी है, लेकिन किसी मृत-आत्मा के बारे मे कोई अनुचित बात करना ठीक नही, वो भी तब, जब उससे कुछ हासिल नही होना। रही बात कांग्रेस की, तो भैया, उसके बारे मे चर्चा करो ना, गाँधीजी को बीच मे काहे घसीट रहे हो।</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6327</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 16:39:18 +0000</pubDate>
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		<description>एक और उत्तम लेख के लिये बधाई. काफी गहराई में चले गये आप अपने पूर्व लेख पर आई टिप्पणियों में.. :)

मुझे कभी कभी लगता है टिप्पणी के रुप में कुछ चर्चा लोगबाग सिर्फ़ चर्चा करने के लिये करते हैं. आप कुछ भी विचार रखें, सहमती और असहमती वाले दोनों पक्ष तो हमेशा मौजूद रहेंगे ही. सब मात्र व्यक्तिगत नज़रिये की बात है.

&lt;b&gt;प्रदीप ने जितने अच्छे और सरल शब्दों के गीत लिखे है शायद ही किसी ने लिखे होंगे। &lt;/b&gt; यह एकदम सत्य वचन है.

सार्थक लेखन के लिये पुनः बधाई.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक और उत्तम लेख के लिये बधाई. काफी गहराई में चले गये आप अपने पूर्व लेख पर आई टिप्पणियों में.. <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>मुझे कभी कभी लगता है टिप्पणी के रुप में कुछ चर्चा लोगबाग सिर्फ़ चर्चा करने के लिये करते हैं. आप कुछ भी विचार रखें, सहमती और असहमती वाले दोनों पक्ष तो हमेशा मौजूद रहेंगे ही. सब मात्र व्यक्तिगत नज़रिये की बात है.</p>
<p><b>प्रदीप ने जितने अच्छे और सरल शब्दों के गीत लिखे है शायद ही किसी ने लिखे होंगे। </b> यह एकदम सत्य वचन है.</p>
<p>सार्थक लेखन के लिये पुनः बधाई.</p>
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	<item>
		<title>By: प्रेमलता</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6307</link>
		<dc:creator>प्रेमलता</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 09:13:16 +0000</pubDate>
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		<description>गांधी &#039;व्यक्ति&#039; की आड़ में हम अपने या सामने वाले को सही या ग़लत बता देते हैं, परंतु  &#039;गांधी एक दृष्टिकोण&#039; है  व्यापक रूप में जिससे हरेक को किसी ना किसी समय सहमत होना पड़ता है।   किसी एकबात या उदाहरण की अपेक्षा हमें समग्र रूप में उस दृष्टिकोण को लेना चाहिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गांधी &#8216;व्यक्ति&#8217; की आड़ में हम अपने या सामने वाले को सही या ग़लत बता देते हैं, परंतु  &#8216;गांधी एक दृष्टिकोण&#8217; है  व्यापक रूप में जिससे हरेक को किसी ना किसी समय सहमत होना पड़ता है।   किसी एकबात या उदाहरण की अपेक्षा हमें समग्र रूप में उस दृष्टिकोण को लेना चाहिए।</p>
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	<item>
		<title>By: पंकज बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6304</link>
		<dc:creator>पंकज बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 05:20:21 +0000</pubDate>
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		<description>किसी के सिद्धांत को सम्पूर्ण रूप से अपनाना असम्भव है। सिर्फ गान्धीगिरी के भरोसे पाकिस्तान और चीन से खुद को बचा लेने की सोच &quot;बचकानी&quot; होगी।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>किसी के सिद्धांत को सम्पूर्ण रूप से अपनाना असम्भव है। सिर्फ गान्धीगिरी के भरोसे पाकिस्तान और चीन से खुद को बचा लेने की सोच &#8220;बचकानी&#8221; होगी।</p>
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	<item>
		<title>By: अफलातून</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6303</link>
		<dc:creator>अफलातून</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 04:41:02 +0000</pubDate>
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		<description>तरुण जी, 
आजादी के बाद जो लोग सत्तासीन हुए उनके और गांधी की विकास की अवधारणा अलग-अलग थी &#124;गांधी के सचिव प्यारेलाल की पुस्तक &#039;पूर्णाहुति&#039; मेँ गांधी-नेहरू के दृष्टिभेद का तफसील से हवाला दिया है&#124; आप इसे यहां देख सकते हैं - http://samatavadi.wordpress.com/2006/10/01/gandhi-nehru-debate/
आजादी के बाद नेहरू ने गांधी को उतना महत्व दिया जितना जनता पार्टी के हुक्मरानों ने १९७७ के बाद जयप्रकाश नारायण को दिया था &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>तरुण जी,<br />
आजादी के बाद जो लोग सत्तासीन हुए उनके और गांधी की विकास की अवधारणा अलग-अलग थी |गांधी के सचिव प्यारेलाल की पुस्तक &#8216;पूर्णाहुति&#8217; मेँ गांधी-नेहरू के दृष्टिभेद का तफसील से हवाला दिया है| आप इसे यहां देख सकते हैं &#8211; <a href="http://samatavadi.wordpress.com/2006/10/01/gandhi-nehru-debate/" rel="nofollow">http://samatavadi.wordpress.com/2006/10/01/gandhi-nehru-debate/</a><br />
आजादी के बाद नेहरू ने गांधी को उतना महत्व दिया जितना जनता पार्टी के हुक्मरानों ने १९७७ के बाद जयप्रकाश नारायण को दिया था |</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/225/comment-page-1#comment-6300</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Jan 2007 04:11:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/fursatiya/?p=225#comment-6300</guid>
		<description>टिप्पणी में ज्यादा लिखा नहीं जा सकता, मैं तरूण की बात से सहमत हूँ. उससे आगे लिखना चाहता हूँ की जब भगतसिंह को फाँसी लगी उसके बाद इस बात को लेकर गाँधीजी ने उपवास वगेरे किया था क्या? सामान्यतः वे हिंसक घटनाओं के बाद ऐसे कमद उठाते रहे थे. आपको मलुम हो तो जरूर लिखे. जानना चाहता हूँ.
दुसरी बात गाँधीगीरी से अंग्रेजों को भगा दिया था, उसी गाँधीगीरी से हमे हमारी ज़मीन जो चीन ने जीत ली है उसे बचा सकते थे? या वापस पा सकते है?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>टिप्पणी में ज्यादा लिखा नहीं जा सकता, मैं तरूण की बात से सहमत हूँ. उससे आगे लिखना चाहता हूँ की जब भगतसिंह को फाँसी लगी उसके बाद इस बात को लेकर गाँधीजी ने उपवास वगेरे किया था क्या? सामान्यतः वे हिंसक घटनाओं के बाद ऐसे कमद उठाते रहे थे. आपको मलुम हो तो जरूर लिखे. जानना चाहता हूँ.<br />
दुसरी बात गाँधीगीरी से अंग्रेजों को भगा दिया था, उसी गाँधीगीरी से हमे हमारी ज़मीन जो चीन ने जीत ली है उसे बचा सकते थे? या वापस पा सकते है?</p>
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