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	<title>Comments on: ब्लाग चोरी से बचने के कुछ सुगम उपाय</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: फ़ुरसतिया-पुराने लेख</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-41681</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया-पुराने लेख</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Jul 2009 07:30:47 +0000</pubDate>
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		<description>[...] ब्लाग चोरी से बचने के कुछ सुगम उपाय  [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] ब्लाग चोरी से बचने के कुछ सुगम उपाय  [...]</p>
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		<title>By: Satish Pancham</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-39016</link>
		<dc:creator>Satish Pancham</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2009 18:23:33 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे तो ये क्लिष्टता वाला सिध्दांत ज्यादा मुफीद नजर आता है। सोचता हूँ बुध्दिजीवी बनकर कुछ ऐसा लिखूं...ऐसा लिखूं कि लोग बिना पढे ही वाह वाह कर उठें और जब आसन से उठें तो कहें - जाने कौन सा आंय बांय बके जा रहा था.....पिनपिना गया है क्या :)

श्रीलाल शुक्ल वाला अंश तो लगता है भगवान भी  लाल रंग से रिमार्क लिखकर वापस दे दें - कि कृपया मादरे हिंद में तर्जुमा करें अन्यथा आपको बदजुबानी और बदगुमानी के अलहदा सूचकों की श्रेणी में रखा जायगा :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे तो ये क्लिष्टता वाला सिध्दांत ज्यादा मुफीद नजर आता है। सोचता हूँ बुध्दिजीवी बनकर कुछ ऐसा लिखूं&#8230;ऐसा लिखूं कि लोग बिना पढे ही वाह वाह कर उठें और जब आसन से उठें तो कहें &#8211; जाने कौन सा आंय बांय बके जा रहा था&#8230;..पिनपिना गया है क्या <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>श्रीलाल शुक्ल वाला अंश तो लगता है भगवान भी  लाल रंग से रिमार्क लिखकर वापस दे दें &#8211; कि कृपया मादरे हिंद में तर्जुमा करें अन्यथा आपको बदजुबानी और बदगुमानी के अलहदा सूचकों की श्रेणी में रखा जायगा <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: Shiv Kumar Mishra</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-35584</link>
		<dc:creator>Shiv Kumar Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jan 2009 12:58:16 +0000</pubDate>
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		<description>लेख पढ़कर बहुत मज़ा आया. बहुत मज़ा.

इसीलिए हम डायरी-वायरी से काम चला लेते हैं. जो चीज एक बार चुरा ली गई हो, उसे चुराकर कोई अपनी भद्द थोड़े न पिटवाएगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लेख पढ़कर बहुत मज़ा आया. बहुत मज़ा.</p>
<p>इसीलिए हम डायरी-वायरी से काम चला लेते हैं. जो चीज एक बार चुरा ली गई हो, उसे चुराकर कोई अपनी भद्द थोड़े न पिटवाएगा.</p>
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		<title>By: Suresh Chiplunkar</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-35571</link>
		<dc:creator>Suresh Chiplunkar</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jan 2009 06:23:38 +0000</pubDate>
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		<description>11 वाँ बिन्दु (सलाह) लिखना भूल गये क्या जी? जब 1 से 10 तक के उपाय नाकाम हों तब &quot;चोर&quot; के ब्लॉग पर जाकर &quot;स्लमडॉग&quot; की भाषा में मधुर भण्डारकर की &quot;सिगनल&quot; से शुरु करके बेनेगल की &quot;मण्डी&quot; स्टाइल में पहुँचे, अगली बार &quot;गोलमाल&quot; करने से बाज तो क्या कौआ भी आयेगा…</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>11 वाँ बिन्दु (सलाह) लिखना भूल गये क्या जी? जब 1 से 10 तक के उपाय नाकाम हों तब &#8220;चोर&#8221; के ब्लॉग पर जाकर &#8220;स्लमडॉग&#8221; की भाषा में मधुर भण्डारकर की &#8220;सिगनल&#8221; से शुरु करके बेनेगल की &#8220;मण्डी&#8221; स्टाइल में पहुँचे, अगली बार &#8220;गोलमाल&#8221; करने से बाज तो क्या कौआ भी आयेगा…</p>
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		<title>By: एक चिट्ठी शिवजी के नाम</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-27385</link>
		<dc:creator>एक चिट्ठी शिवजी के नाम</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Aug 2008 06:44:06 +0000</pubDate>
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		<description>[...] १. ब्लॉगरों में क्या सुर्खाब के पर लगे होते हैं ?  २. कि ब्लॉगर बन गया जेंटलमैन&#8230;.  ३.छुटके से ब्लागर तेरा दरद न जाने कोय  ४. प्रियंकर- एक प्रीतिकर मुलाकात  ५. अथ पूना ब्लागर भेंटवार्ता कथा…  ६.बारिशों का मौसम है&#8230;  ७. सबसे बुरा दिन  ८. ब्लाग चोरी से बचने के कुछ सुगम उपाय [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] १. ब्लॉगरों में क्या सुर्खाब के पर लगे होते हैं ?  २. कि ब्लॉगर बन गया जेंटलमैन&#8230;.  ३.छुटके से ब्लागर तेरा दरद न जाने कोय  ४. प्रियंकर- एक प्रीतिकर मुलाकात  ५. अथ पूना ब्लागर भेंटवार्ता कथा…  ६.बारिशों का मौसम है&#8230;  ७. सबसे बुरा दिन  ८. ब्लाग चोरी से बचने के कुछ सुगम उपाय [...]</p>
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	<item>
		<title>By: monan</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-15368</link>
		<dc:creator>monan</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Oct 2007 10:35:30 +0000</pubDate>
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		<description>ab main bhi jaan gaya kaise kaise dhandhali ho rahi hai blog walon ke saath. aap ka sujhaw achchha laga.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ab main bhi jaan gaya kaise kaise dhandhali ho rahi hai blog walon ke saath. aap ka sujhaw achchha laga.</p>
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		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-6942</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Feb 2007 05:23:40 +0000</pubDate>
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		<description>लेख पढ़ भी लिया और बहुत अच्छा भी लगा -
अनूप जी समझ मे नही आता कि किस मूंह से आपका शुक्रिया अदा करूं। बाकई जानकारी से भरपूर जानदार लेख था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लेख पढ़ भी लिया और बहुत अच्छा भी लगा -<br />
अनूप जी समझ मे नही आता कि किस मूंह से आपका शुक्रिया अदा करूं। बाकई जानकारी से भरपूर जानदार लेख था।</p>
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		<title>By: राजीव</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-6937</link>
		<dc:creator>राजीव</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Feb 2007 19:10:28 +0000</pubDate>
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		<description>अब देखना यह है कि क्या इस पोस्ट की भी &quot;चोरी&quot; होती है या नहीँ


अनूप जी, श्रीलाल जी का उद्धरण तो वास्तव में पूजनीय है। आपसे अनुरोध है कि तनिक इसका अंग्रेज़ी में रूपांतरण तो कर देते, ताकि इसकी भाषा के साथ साथ आशय भी सर्वबोधगम्य हो जाये। नहीं तो इसको एक पहेली के रूप में ही रख दें और हो जाय परीक्षा हम हिन्दी पाठकों (और लेखकों) की!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अब देखना यह है कि क्या इस पोस्ट की भी &#8220;चोरी&#8221; होती है या नहीँ</p>
<p>अनूप जी, श्रीलाल जी का उद्धरण तो वास्तव में पूजनीय है। आपसे अनुरोध है कि तनिक इसका अंग्रेज़ी में रूपांतरण तो कर देते, ताकि इसकी भाषा के साथ साथ आशय भी सर्वबोधगम्य हो जाये। नहीं तो इसको एक पहेली के रूप में ही रख दें और हो जाय परीक्षा हम हिन्दी पाठकों (और लेखकों) की!</p>
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		<title>By: मितुल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-6933</link>
		<dc:creator>मितुल</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Feb 2007 06:19:39 +0000</pubDate>
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		<description>अनूप भाई... आपकी प्रविष्ठी पढ़ कर हम इतना हँसे जितना सालो मे नही। यू आर &#039;द बेस्ट&#039;... :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनूप भाई&#8230; आपकी प्रविष्ठी पढ़ कर हम इतना हँसे जितना सालो मे नही। यू आर &#8216;द बेस्ट&#8217;&#8230; <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/238/comment-page-1#comment-6930</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Feb 2007 02:51:46 +0000</pubDate>
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		<description>@ &lt;b&gt;उन्मुक्तजी,&lt;/b&gt;मुस्कान बड़ी खूबसूरत है। ऐसे ही मुस्कराते रहें।
@ &lt;b&gt;समीरजी, &lt;/b&gt;टिप्पणी, बधाई और शुभकामनाऒं के लिये शुक्रिया। श्रीलाल शुक्ल का लिखा &#039;नैरेशन&#039; समझ में आये तो हमें भी बताना।
@ &lt;b&gt;जगदीश जी, &lt;/b&gt;शुक्रिया। होल सेल का मजा ही कुछ और है।
@ &lt;b&gt; श्रीश शर्मा &#039;ई-पंडित&#039;,&lt;/b&gt;पंकज बेंगाणी,चिंता न करो कुछ दिन बाद तुम्हारी बंदरगीरी भी लुटेगी। निरंतर आने वाला है। तरकश तो शानदार चल ही रहा है बधाई!
@ &lt;b&gt;संजय बेंगाणी&lt;/b&gt;हम किसी को छोड़ने के लिये थोड़ी साथ पकड़ते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री को हम जितना जानते हैं वो अखबार से और मीडिया से। वे उतने ही हमारे हैं जितने कि किसी दूसरे भारतवासी के। गुजरात में होने के कारण वे आपके कुछ और नजदीक हो गये। अगर आपको उनको सही मानते हैं उनके बारे में अच्छी बातें बताते रहिये। बेंगाणी बन्धु कम से कम हमारी निगाह में बदनाम नहीं हैं। उनके प्रयासों की हम सराहना करते हैं। लेकिन एक पाठक की हैसियत से उनका लिखे पर अपनी राय रखना हमारा अधिकार है। तरकश आगे और प्रगति करे यह मेरी शुभकामना है। आपकी इस बात से हम सहमत हैं कि जहां तक संभव हो सके किसी का लेख छापने से पहले उससे पूछ लेना चाहिये। मेरे लिखे पर मेरा अधिकार है। और अगर मेरा लेख कोई मेरी अनुमति के बिना भी छापता तो इस पर मुझे कोई एतराज नहीं है। कहने का मतलब सबको मेरी तरफ़ से खुली छूट है ,जब तक वह उसका दुरुपयोग नहीं करता। लेकिन चूंकि मैं स्वामीजी द्वारा चलाई साइट पर लिखता हूं इसलिये यहां पोस्ट हुये लेख के बारे में स्वामी जी का निर्णय अंतिम होगा। बुरा मानना हम न जाने कब का त्याग चुके हैं। और भी गम हैं जमाने में....।
@ &lt;b&gt;शुऐब,&lt;/b&gt;आशा है अब तक लेख पढ़ लिया होगा!
@ &lt;b&gt;सागर भाई, &lt;/b&gt;पसंद का शुक्रिया! प्रयासों में सफलता के लिये शुभकामनायें!
@ &lt;b&gt;जीतेंद्र,&lt;/b&gt;जवाब का इंतजार है।
@ &lt;b&gt;हिंदी ब्लागर &lt;/b&gt; इंतजार है आपकी शुभकामनाऒं के सफल होने का!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ <b>उन्मुक्तजी,</b>मुस्कान बड़ी खूबसूरत है। ऐसे ही मुस्कराते रहें।<br />
@ <b>समीरजी, </b>टिप्पणी, बधाई और शुभकामनाऒं के लिये शुक्रिया। श्रीलाल शुक्ल का लिखा &#8216;नैरेशन&#8217; समझ में आये तो हमें भी बताना।<br />
@ <b>जगदीश जी, </b>शुक्रिया। होल सेल का मजा ही कुछ और है।<br />
@ <b> श्रीश शर्मा &#8216;ई-पंडित&#8217;,</b>पंकज बेंगाणी,चिंता न करो कुछ दिन बाद तुम्हारी बंदरगीरी भी लुटेगी। निरंतर आने वाला है। तरकश तो शानदार चल ही रहा है बधाई!<br />
@ <b>संजय बेंगाणी</b>हम किसी को छोड़ने के लिये थोड़ी साथ पकड़ते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री को हम जितना जानते हैं वो अखबार से और मीडिया से। वे उतने ही हमारे हैं जितने कि किसी दूसरे भारतवासी के। गुजरात में होने के कारण वे आपके कुछ और नजदीक हो गये। अगर आपको उनको सही मानते हैं उनके बारे में अच्छी बातें बताते रहिये। बेंगाणी बन्धु कम से कम हमारी निगाह में बदनाम नहीं हैं। उनके प्रयासों की हम सराहना करते हैं। लेकिन एक पाठक की हैसियत से उनका लिखे पर अपनी राय रखना हमारा अधिकार है। तरकश आगे और प्रगति करे यह मेरी शुभकामना है। आपकी इस बात से हम सहमत हैं कि जहां तक संभव हो सके किसी का लेख छापने से पहले उससे पूछ लेना चाहिये। मेरे लिखे पर मेरा अधिकार है। और अगर मेरा लेख कोई मेरी अनुमति के बिना भी छापता तो इस पर मुझे कोई एतराज नहीं है। कहने का मतलब सबको मेरी तरफ़ से खुली छूट है ,जब तक वह उसका दुरुपयोग नहीं करता। लेकिन चूंकि मैं स्वामीजी द्वारा चलाई साइट पर लिखता हूं इसलिये यहां पोस्ट हुये लेख के बारे में स्वामी जी का निर्णय अंतिम होगा। बुरा मानना हम न जाने कब का त्याग चुके हैं। और भी गम हैं जमाने में&#8230;.।<br />
@ <b>शुऐब,</b>आशा है अब तक लेख पढ़ लिया होगा!<br />
@ <b>सागर भाई, </b>पसंद का शुक्रिया! प्रयासों में सफलता के लिये शुभकामनायें!<br />
@ <b>जीतेंद्र,</b>जवाब का इंतजार है।<br />
@ <b>हिंदी ब्लागर </b> इंतजार है आपकी शुभकामनाऒं के सफल होने का!</p>
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