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	<title>Comments on: इंडीब्लागीस चुनाव चर्चा</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: roshan premyogi</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-17554</link>
		<dc:creator>roshan premyogi</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Dec 2007 07:55:50 +0000</pubDate>
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		<description>ham sath-sath hai</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ham sath-sath hai</p>
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		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7191</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Feb 2007 18:13:02 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;strong&gt;@शुऐब भाई&lt;/strong&gt;,किसी को दे दो वोट! अब तक तो वो दे भी चुके होगे।
&lt;strong&gt;@ अनिल सिन्हाजी&lt;/strong&gt;, आपका अधिकार आपके द्वारा प्रयोग किये जाने की बधाई!
&lt;strong&gt;@सुनीलदीपकजी&lt;/strong&gt;, आपका गदगदाय मान मन ही मेरे लिये आपका आशीर्वाद है।
&lt;strong&gt;@शशि सिंह&lt;/strong&gt;,ये भाईचारे की भावना भी एक बड़ा कारण है जो मैं लगातार हिंदी ब्लागिंग से जुड़ा हूं।
&lt;strong&gt;@रचनाजी&lt;/strong&gt;,आपके विचार का शुक्रिया कि हम सब जीते हैं। इसी बहाने मैंने सबके परिचय करा दिये।
&lt;strong&gt;@संजय बेंगाणी&lt;/strong&gt;, धन्यवाद कि आपको परिचय अच्छे लगे।
&lt;strong&gt;@प्रियंकर&lt;/strong&gt;, आपके वोट और समर्थन का शुक्रिया!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>@शुऐब भाई</strong>,किसी को दे दो वोट! अब तक तो वो दे भी चुके होगे।<br />
<strong>@ अनिल सिन्हाजी</strong>, आपका अधिकार आपके द्वारा प्रयोग किये जाने की बधाई!<br />
<strong>@सुनीलदीपकजी</strong>, आपका गदगदाय मान मन ही मेरे लिये आपका आशीर्वाद है।<br />
<strong>@शशि सिंह</strong>,ये भाईचारे की भावना भी एक बड़ा कारण है जो मैं लगातार हिंदी ब्लागिंग से जुड़ा हूं।<br />
<strong>@रचनाजी</strong>,आपके विचार का शुक्रिया कि हम सब जीते हैं। इसी बहाने मैंने सबके परिचय करा दिये।<br />
<strong>@संजय बेंगाणी</strong>, धन्यवाद कि आपको परिचय अच्छे लगे।<br />
<strong>@प्रियंकर</strong>, आपके वोट और समर्थन का शुक्रिया!</p>
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		<title>By: प्रियंकर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7174</link>
		<dc:creator>प्रियंकर</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Feb 2007 08:50:45 +0000</pubDate>
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		<description>गंभीरता उर्फ़ मनहूसी के बढते मरुस्थलीय समय में नेट पर हिंदी के आनंदपूर्ण,नटखट और खिलंदड़े गद्य को बनाये और बचाये रखने के लिये पं० सुकुल को और फोटोब्लॉग श्रेणी में सुंदर छायाचित्रों के छायाचित्रकार सुनील दीपक को अपना वोट और शुभकामनाएं दोनों देता हूं .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>गंभीरता उर्फ़ मनहूसी के बढते मरुस्थलीय समय में नेट पर हिंदी के आनंदपूर्ण,नटखट और खिलंदड़े गद्य को बनाये और बचाये रखने के लिये पं० सुकुल को और फोटोब्लॉग श्रेणी में सुंदर छायाचित्रों के छायाचित्रकार सुनील दीपक को अपना वोट और शुभकामनाएं दोनों देता हूं .</p>
]]></content:encoded>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7167</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Feb 2007 05:09:22 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत अच्छा परिचय, ब्लोगर एवार्ड व नामांकित चिट्ठाकारों का.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत अच्छा परिचय, ब्लोगर एवार्ड व नामांकित चिट्ठाकारों का.</p>
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		<title>By: rachana</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7158</link>
		<dc:creator>rachana</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 17:50:36 +0000</pubDate>
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		<description>वोट तो मै कभी का कर चुकी! लेकिन आपके मित्रो के बारे मे खयाल जान कर खुशी हुई. हमारे लिये तो आप सभी जीते हुए हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वोट तो मै कभी का कर चुकी! लेकिन आपके मित्रो के बारे मे खयाल जान कर खुशी हुई. हमारे लिये तो आप सभी जीते हुए हैं.</p>
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		<title>By: शशि सिंह</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7156</link>
		<dc:creator>शशि सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 13:36:15 +0000</pubDate>
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		<description>अति सुंदर! इस चुनाव में जैसा भाईचारा आपके पोस्ट में देखने को मिला उसे देखकर सबके दिल में ये उम्मीद घर कर गई होगी कि काश हमारे देश के आम चुनाव में ये देखने को मिले. अब ये चुनाव है, कोई एक ही जीतेगा... लेकिन आपने तो सबका दिल पहिले ही जीत रखा है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अति सुंदर! इस चुनाव में जैसा भाईचारा आपके पोस्ट में देखने को मिला उसे देखकर सबके दिल में ये उम्मीद घर कर गई होगी कि काश हमारे देश के आम चुनाव में ये देखने को मिले. अब ये चुनाव है, कोई एक ही जीतेगा&#8230; लेकिन आपने तो सबका दिल पहिले ही जीत रखा है.</p>
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	<item>
		<title>By: सुनील</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7155</link>
		<dc:creator>सुनील</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 13:16:31 +0000</pubDate>
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		<description>धार्मिक किताबों में बहुत सी कहानियाँ हैं कि किसी ने कितने सालों तक तप किया और आखिर में तपस्या से खुश हो कर प्रभु स्वयं प्रकट हुए और बोले, &quot;भक्त, तुम्हारी भक्ती से मन बहुत प्रसन्न हुआ, मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूँ, माँगों क्या चाहते हो&quot;.

बिल्कुल कुछ ऐसा ही कहने का मन किया जब अपने बारे में लिखे शब्द पढ़े, और मन गदगद हो गया.:-)

बहुत दिनों से काम में व्यस्त चल रहा हूँ और कुछ भी लिखने पढ़ने का समय बहुत कठिनाई से निकाल पाता हूँ, कुछ भी चिट्ठे पढ़े जाने कितने दिन हो गये थे. जब यह लेख पढ़ा तो लगा कि मुझे इंडीब्लोगीज़ के सारे इनाम मिल गये हों. धन्यवाद अनूप. मेरे बस में किसी को कोई वरदान देना नहीं है पर अगर दे सकता तो अवश्य तुम्हें ही देता! :-)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धार्मिक किताबों में बहुत सी कहानियाँ हैं कि किसी ने कितने सालों तक तप किया और आखिर में तपस्या से खुश हो कर प्रभु स्वयं प्रकट हुए और बोले, &#8220;भक्त, तुम्हारी भक्ती से मन बहुत प्रसन्न हुआ, मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूँ, माँगों क्या चाहते हो&#8221;.</p>
<p>बिल्कुल कुछ ऐसा ही कहने का मन किया जब अपने बारे में लिखे शब्द पढ़े, और मन गदगद हो गया.:-)</p>
<p>बहुत दिनों से काम में व्यस्त चल रहा हूँ और कुछ भी लिखने पढ़ने का समय बहुत कठिनाई से निकाल पाता हूँ, कुछ भी चिट्ठे पढ़े जाने कितने दिन हो गये थे. जब यह लेख पढ़ा तो लगा कि मुझे इंडीब्लोगीज़ के सारे इनाम मिल गये हों. धन्यवाद अनूप. मेरे बस में किसी को कोई वरदान देना नहीं है पर अगर दे सकता तो अवश्य तुम्हें ही देता! <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: अनिल सिन्‍हा</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7151</link>
		<dc:creator>अनिल सिन्‍हा</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 09:19:18 +0000</pubDate>
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		<description>आपके लेख से जानकारी मिली तो आज ही अपना पंजीकरण कराया है। अपने मताधिकार का अवश्‍य प्रयोग करूंगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आपके लेख से जानकारी मिली तो आज ही अपना पंजीकरण कराया है। अपने मताधिकार का अवश्‍य प्रयोग करूंगा।</p>
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		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7149</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 07:04:22 +0000</pubDate>
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		<description>चिट्ठाकारों का परिचय बहुत ख़ूबसूरती से लिखा आपने। बाक़ी पहली बार मुझे इंडीब्लागीस के बारे मे इतनी बढिया जानकारी मिली। आपने जितने भी चिट्ठाकार उम्मीदवार हैं, मैं सभी के लेखों का कायल हूं। लेकिन तैय नही कर पारहा कि किसको वोट देना है!इस जानकारी के लिए अनूपजी आपका धन्यवाद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चिट्ठाकारों का परिचय बहुत ख़ूबसूरती से लिखा आपने। बाक़ी पहली बार मुझे इंडीब्लागीस के बारे मे इतनी बढिया जानकारी मिली। आपने जितने भी चिट्ठाकार उम्मीदवार हैं, मैं सभी के लेखों का कायल हूं। लेकिन तैय नही कर पारहा कि किसको वोट देना है!इस जानकारी के लिए अनूपजी आपका धन्यवाद</p>
]]></content:encoded>
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		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/245/comment-page-1#comment-7146</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Feb 2007 02:54:48 +0000</pubDate>
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		<description>@&lt;strong&gt;प्रेमेंन्द्र&lt;/strong&gt;, सही है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता लेकिन भाड़ फोड़ने वाले चनों की शुरुआत एक से ही होती है।
@&lt;strong&gt;जीतेंन्द्र&lt;/strong&gt;, हमपर बेवफाई का इल्जाम लगाऒगे तो चैन से सो नहीं पाऒगे फिर कहोगे सोने के उपाय बताऒ!
@&lt;strong&gt;अफलातूनजी&lt;/strong&gt;, यह अच्छा है कि आपने वोट डाल दिया। वैसे यह जानकारी उन लोगों के लिये खासतौर पर है जिन लोगों ने अभी तक वोट नहीं डाले हैं। आप अभी भी लोगों को बोलिये। मैंने खुद अभी तक अपना वोट नहीं डाला।
@&lt;strong&gt;जगदीश भाटिया&lt;/strong&gt;, अफलातूनजी क्या पता आपको ही वोट देकर आये हों।
@&lt;strong&gt;रवि भाई&lt;/strong&gt;, हमारे समर्थन में बैठिये मत। खड़े रहिये कुछ देर और एक ही दिन की तो और बात है। यह तो मैंने अपनी राय बताई। कोई हमारे-आपके कहने से थोड़े ही वोट करेगा।
@&lt;strong&gt;श्रीश पंडितजी&lt;/strong&gt;, जैसा मैंने कहा कि मेरा जोर वोटिंग पर है। ज्यादा से ज्यादा लोग वोट करें। मैंने अपनी राय बताई। आप अपने मन के हिसाब से वोट दें। आपकी पोस्ट देखी, पसंद आई और मैंने तारीफ़ भी की।
@&lt;strong&gt;हिंदी ब्लागर&lt;/strong&gt;, हां वोटिंग का मामला कुछ कठिन है। मेरे पास ही वोटिंग के लिये कल ही लिंक आ पाई जब मैंने देबाशीष से अनुरोध किया अलग से।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@<strong>प्रेमेंन्द्र</strong>, सही है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता लेकिन भाड़ फोड़ने वाले चनों की शुरुआत एक से ही होती है।<br />
@<strong>जीतेंन्द्र</strong>, हमपर बेवफाई का इल्जाम लगाऒगे तो चैन से सो नहीं पाऒगे फिर कहोगे सोने के उपाय बताऒ!<br />
@<strong>अफलातूनजी</strong>, यह अच्छा है कि आपने वोट डाल दिया। वैसे यह जानकारी उन लोगों के लिये खासतौर पर है जिन लोगों ने अभी तक वोट नहीं डाले हैं। आप अभी भी लोगों को बोलिये। मैंने खुद अभी तक अपना वोट नहीं डाला।<br />
@<strong>जगदीश भाटिया</strong>, अफलातूनजी क्या पता आपको ही वोट देकर आये हों।<br />
@<strong>रवि भाई</strong>, हमारे समर्थन में बैठिये मत। खड़े रहिये कुछ देर और एक ही दिन की तो और बात है। यह तो मैंने अपनी राय बताई। कोई हमारे-आपके कहने से थोड़े ही वोट करेगा।<br />
@<strong>श्रीश पंडितजी</strong>, जैसा मैंने कहा कि मेरा जोर वोटिंग पर है। ज्यादा से ज्यादा लोग वोट करें। मैंने अपनी राय बताई। आप अपने मन के हिसाब से वोट दें। आपकी पोस्ट देखी, पसंद आई और मैंने तारीफ़ भी की।<br />
@<strong>हिंदी ब्लागर</strong>, हां वोटिंग का मामला कुछ कठिन है। मेरे पास ही वोटिंग के लिये कल ही लिंक आ पाई जब मैंने देबाशीष से अनुरोध किया अलग से।</p>
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