हर सफल ब्लागर एक मुग्धा नायिका होता है

ऐसा हमारे साथ पहली बार नहीं हुआ। होता है। अक्सर होता है।

तीन दिन से अफलातूनजी हमारे पीछे पडे़ हैं कि हम उनकी ब्लाग सम्मोहनी पोस्ट देखें, पढ़ें और उस पर टिपियायें।

जितना परेशान अफलातून भाई ने हमें अपनी पोस्ट पढ़वाने के लिये किया उतना तो शशिसिंह भी जीतेंन्दर चौधरी को इस बात के लिये नहीं करते कि लोकमंच को दुबारा मंच पर लाया जाये, न इतनी मेहनत ब्लागर लोग मोहल्ले को नारद से हटवाने के लिये करते हैं। अगर इससे आधी मेहनत पंगेबाज साथी मोहल्ले के खिलाफ़ कर लेते तो मोहल्ला तो मोहल्ला पूरा शहर बाहर हो जाता।

इसका मतलब यह कतई नहीं कि हम मोहल्ले के खिलाफ़ हैं। या हम पंगेबाज भाई की मेहनत को कम बता रहे हैं। हम तो बात बता रहे हैं कि अफलातूनजी ने बहुत मेहनत करी हमें अपनी पोस्ट को पढ़वाने के लिये।

हमने जब यह पोस्ट पढ़ी तो हमने पास में कोई और न होने के कारण अपना माथा ठोंक लिया। जो ये एन्ड्र्यू साहब कहिनहैं हम उससे आगे की बातें बहुत पहले कह चुके हैं। हमें अफलातूनजी पर भी बहुत झुल्ल सवार हुई। ये बातें समाजवाद, स्वदेशी, स्वभाषा प्रेम जैसी करते हैं लेकिन हरकतें एकदम उलट। जो बात हम डेढ़ साल पहले कह चुके वो एक अंग्रेज कहि दिहिस तो हमका दिखा रहे हैं कि देखो एन्ड्र्यू साहब कहिन हैं। ये कुछ ऐसे ही है जैसे कोई अमेरिका से इम्पोर्टेड हलदी दिखाने के लिये लाये और पैकेट पर लिखा हो मेड एट भन्नाना पुरवा, कानपुर पैक्ड इन अमेरिका।

एन्ड्र्यू जी कहा है कि चिट्ठेकारी का सम्मोहन लोगों में यकीन पैदा कर देता है कि उनके पास बताने के लिए काफ़ी कुछ है जो रुचिपूर्ण भी है , दरअसल ऐसा होता नहीं है ।लोग खुद से खुद के बारे में बतियाते-बतियाते आत्ममुग्धता के शिकार हो रहे हैं। सौन्दर्य शास्त्र में ऐसी स्थिति मुग्धा नायिका की होती है जो स्वयं के सौन्दर्य पर रीझती है। ऐसा ही ब्लागर के साथ भी होता है। हर ब्लागर के अंदर एक अदद मुग्धा नायिका रहती है। जो अपनी खूबसूरती पर फिदा होती है। कोई नायिका किसी से भी पूछे- बताओ मैं कैसी लग रही हूं तो किसी के पास भी -बहुत अच्छी, खूबसूरत कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। ऐसे ही अगर कोई ब्लागर अपनी पोस्ट दिखाता है तो बहुत अच्छा लिखा है से कम कुछ नहीं सुनना चाहता है। अगर उसने सुन भी लिया तो इसके बाद निश्चित तौर पर वह आपके खिलाफ़ राशन पानी लेकर चढ़ जाता है चाहे वह अनाम टिप्पणी के रूप में हो या अनाम ब्लाग के रूप में।

बहरहाल हम यही कहना चाहते हैं कि एन्ड्र्यूजी ने केवल मर्ज बताया कि ब्लागर आत्ममुग्ध हो जाते हैं। हमने मर्ज भी बताया और उसका इलाज भी। दर्द के साथ दवा मुफ़्त। हमने कहा था- अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अपना अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है। मतलब ब्लाग मुग्धावस्था एकमात्र उपाय यह है कि आप ब्लाग लिखना बंद कर दें।

लेकिन यह सब अफलातूनजी को नहीं दिखा। वे अटक-अटक के अंग्रेजी में वही बात पढेंगे और दुनिया को बतायेंगे लेकिन वही बात जो बहुत पहले हिंदी में कही जा चुकी है वो नहीं देखेंगे। ऐसा होता है। योग के प्रचार-प्रसार के लिये उसका योगा होना और राग के जलवे के लिये उसका रागा होना बेहद जरूरी है।

बहरहाल, इतना लिखते-लिखते हमारे अंदर की मुग्धा नायिका अलसाती अंगड़ाई लेती हुयी उठ खड़ी हुयी। हम अपनी एक पोस्ट को दुबारा देखने लगे। इसमें मैंने ब्लाग, ब्लागर, ब्लागिंग पर कुछ सुभाषित लिखे थे। इनको रविरतलामीजी ने झन्नाट कहा था। मुग्धा नायिका जितनी बार दर्पण में अपना सौन्दर्य देखकर रीझती है उतनी बार थोड़ी क्रीम, पाउडर और पोत लेती है। इसी तरह हमने इसमें कुछ सुभाषित और जोड़े हैं। आप इनको देखें-

१.ब्लाग दिमाग की कब्ज़ और गैस से तात्कालिक मुक्ति का मुफीद उपाय है।

२.ब्लाग पर टिप्पणी सुहागन के माथे पर बिंदी के समान होती है।

३.टिप्पणी विहीन ब्लाग विधवा की मांग की तरह सूना दिखता है।

४.अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है।

५.अनावश्यक टिप्पणियों से बचने के लिये किये गये सारे उपाय उस सुरक्षा गार्ड को तैनात करने के समान हैं जो शोहदों से किसी सुंदरी की रक्षा करने के लिये तैनात किये जाते हैं तथा बाद में सुरक्षा गार्ड सुंदरी को उसके आशिकों तक से नहीं मिलने देता।

६.जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।

७.किसी पोस्ट पर आत्मविश्वासपूर्वक सटीक टिप्पणी करने का एकमात्र उपाय है कि आप टिप्पणी करने के तुरंत बाद उस पोस्ट को पढ़ना शुरु कर दें। पहले पढ़कर टिप्पणी करने में पढ़ने के साथ आपका आत्मविश्वास कम होता जायेगा।

८.अगर आपके ब्लाग पर लोग टिप्पणियां नहीं करते हैं तो यह मानने में कोई बुराई नहीं है कि जनता की समझ का स्तर अभी आपकी समझ के स्तर तक नहीं पहुंचा है। अक्सर समझ के स्तर को उठने या गिरने में लगने वाला समय स्तर के अंतर के समानुपाती होता है।

९.जब आप किसी लंबी पोस्ट को बाद में इत्मिनान से पढ़ने के लिये सोचते हैं तो उस पोस्ट की हालत उस अखबार जैसी ही होती है जिसे आप कोई अच्छा लेख पढ़ने के लिये रद्दी के अखबारों से अलग रख लेते हैं लेकिन समय के साथ वह अखबार भी रद्दी के अखबारों में मिलकर ही बिक जाता है-अनपढ़ा।

१०.जब आप कोई टिप्पणी करते समय उसे बेवकूफी की बात मानकर ‘करूं न करूं’ की दुविधा जनक हालत में ‘सरल आवर्त गति’ (Simple Hormonic Motion) कर रहे होते हैं उसी समयावधि में हजारों उससे ज्यादा बेवकूफी की टिप्पणियां दुनिया की तमाम पोस्टों पर चस्पाँ हो जाती हैं।

११.अगर आपके ब्लाग का जलवा पूरी दुनिया में फैला हुआ है तथा कोई आपकी आलोचना करने वाला नहीं है तो यह तय है कि या तो आपने अपने जीवनसाथी को अपना लिखा पढ़ाया नहीं या फिर जीवनसाथी को सुरक्षा कारणों से पढ़ने-लिखने से परहेज है।

१२. अगर आप अपने जीवन साथी से तंग आ चुके हैं तथा उससे निपटने का कोई उपाय आपको समझ में नहीं आ रहा तो आप तुरंत ब्लाग लिखना शुरु कर दीजिये।

१३.नियमित,हरफनमौला तथा बहुत धाकड़ लिखने वाले ब्लाग पढ़ने के बाद अक्सर यह लगता है कि ‘लिंक लथपथ’ यह ब्लाग पढ़ने से अच्छा है कि कोई अखबार पढ़ते हुये कोई बहुत तेज चैनेल क्यों न देखा जाये।

१४.’कामा-फुलस्टाप’,'शीन-काफ’ तक का लिहाज रखकर लिखने वाला ‘परफेक्शनिस्ट ब्लागर’ गूगल की शरण में पहुंचा वह ब्लागर होता हैं जिसने अपना लिखना तबतक के लिये स्थगित कर रखा होता है जब तक कि ‘कामा-फुलस्टाप’ ,’शीन-काफ’ को ‘यूनीकोड’ में बदलने वाला कोई ‘साफ्टवेयर’ नहीं मिल जाता।

१५.अनजान टिप्पणियां अक्सर खुदा के नूर की तरह होती हैं जो आपको तब भी राह दिखाती हैं जबकि आप चारो तरफ से प्रशंसा के कुहासे में घिरे होते हैं।

१६. अगर आप अपने ब्लाग पर हिट बढ़ाने के लिये बहुत ही ज्यादा परेशान हैं तो तमाम लटके-झटकों का सहारा छोड़कर किसी चैट रूम में जाकर उम्र,लिंग,स्थान की बजाय अपने ब्लाग का लिंक देना शुरु कर दें।

१७.अगर आप अपना ब्लाग बिना किसी अपराध बोध के बंद करना चाहते हैं तो किसी स्वनाम धन्य लेखक को अपने साथ जोड़ लें।

१८. अच्छा लिखने वाले की तारीफ करते रहना आपकी सेहत के लिये भी जरूरी है। तारीफ के अभाव में वह अपना ब्लाग बंद करके अलग पत्रिका निकालने लगता है। तब आप उसकी न तारीफ कर सकते हैं न बुराई।

१९.ऊटपटांग लिखने वाले का अस्तित्व आपके बेहतरीन लिखने का खुशनुमा अहसास बनाये रखने के निहायत जरूरी है। घटिया लिखने वाला वह नींव की ईंट है जिसपर आपका बढ़िया लिखने के अहसास का कगूंरा टिका होता है।

२०. बहुत लिखने वाले ‘ब्लागलती’ को जब कुछ समझ में नहीं आता तो वह एक नया ब्लाग बना लेता है,जब कुछ-कुछ समझ में आता है तो टेम्पलेट बदल लेता है तथा जब सबकुछ समझ में आ जाता है तो पोस्ट लिख देता है। यह बात दीगर है कि पाठक यह समझ नहीं पाता कि इसने यह किसलिये लिखा!

२१. जब आपका कोई नियमित प्रशंसक,पाठक आपकी पोस्ट पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करता तो निश्चित मानिये कि वो आपकी तारीफ में दो लाइन लिखने की बजाय बीस लाइन की पोस्ट लिखने में जुटा है। उन बीस लाइनों में आपकी तारीफ में केवल लिंक दिया जाता है जो कि अक्सर गलती संख्या ४०४(HTML ERROR-404) का संकेत देता है।

२२. जब कोई ब्लागर अपना ब्लाग बन्द करने की धमकी देता है तब यह समझ लेना चाहिये कि वह नियमित लेखन के लिये कमर कर चुका है।

२३. अगर आपके ब्लाग पर लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं तो आप अपने ब्लाग पर कोई विवादास्पद बहस शुरू कर दीजिये। अधिक ध्यान आकर्षित करने के लिये भाषा आक्रामक कर लीजिये। खुद यह सब न कर पा रहे हों तो छंटे हुये लोगों से करवाने लगिये।

२४. आपके विरोध में नियमित लिखने वाला ब्लागर आपके लिये बिना पैसे का प्रचारक है।

२५. किसी साझा मंच के बारे में सबसे अधिकार पूर्वक बयान वे लोग देते हैं जिनका उस मंच से कोई ताल्लुक/जुड़ाव नहीं होता।

२६. ब्लाग जगत में सारे सार्वजनिक मंच रेलवे प्लेटफार्म की तरह होते हैं। जहां लोग वे सारे कार्यव्यापार करते हैं जो वे कभी भी अपने ब्लाग पर नहीं करना चाहते।

२७. लोगों को मनमानी करने के आरोप में निकाल बाहर करने वाले वे लोग होते हैं जो खुद अपने साथ मनमानी किये जाने का रोना रोते रहे हैं।

२८. किसी बेसिरपैर की बात को जो जितने अधिक विश्वास से कह सकता है वह उतना ही सफल ब्लागर होता है।

२९. तमाम छोटी-मोटी ऐं-वैं टाइप पोस्टें सड़क पर बिखरी उन कीलों की तरह होती हैं जो किसी बड़े से बड़े ब्लाग-टायर की हवा निकाल देती हैं।

३०. अगर आप निराकार ईश्वर के बारे में कुछ समझने की प्रयास करते-करते थक चुके हैं और आपको उसके बारे में कुछ अहसास नहीं हुआ तो आप अनाम ब्लागर के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दीजिये। निराकार ईश्वर की तरह वह सब जगह है और कहीं नहीं है। घट-घट में भी है और पनघट में भी।

३१. ब्लाग जगत की सेहत को लेकर चिंता करने वाले और उसको नियंत्रित करने वाले के प्रयास उस टिटिहरी के प्रयास की तरह होते हैं जो पैर उलटा करके इसलिये सोती है कि जब आकाश गिरेगा तो वह उसे थाम लेगी।

३२. जब किसी लेखक को कोई विषय नहीं सूझता तो वह संस्मरण लिखने लगता है। संस्मरण में अपने कामों का बखान करते हुआ ब्लागर इतना बांगडू लगता है कि किसी का भी मन उसकी तारीफ़ करके आगे बढ़ने का करने लगता है।

३३.आपका ब्लाग आपके व्यक्तित्व का आइना होता है। जैसे-जैसे आपका व्यक्तित्व चौपट होता जाता है वैसे-वैसे आपको धुंधले आइने पसंद आने लगते हैं-साफ आइने में चेहरे भी नजर आते हैं साफ/ धुंधला चेहरा हो तो धुंधला आइना चाहिये। -वाहिद शाहजहांपुरी

३४. किसी सर्वज्ञानी ब्लागर के ज्ञान बोध और हास्य बोध में हमेशा ३६ का आंकड़ा होता है।

३५. अगर आपसे अनियमित बात करने वाला कोई ब्लागर आपसे बिना किसी काम के नमस्ते करता है तो समझ लीजिये कि अगले संदेश में वह आपको अपने सबसे नये लेख की कड़ी देने वाला है। इसके बाद अगर फिर वह आपको नमस्ते करता है तो इसका मतलब वह टिप्पणी का तकादा करने वाला है। इस तरह के हमलों से बचने का सबसे मुफ़ीद उपाय यही है कि आप किसी भी नमस्ते के जवाब में अपने नयी-पुरानी, ऐसी-वैसी पोस्ट का लिंक थमाने की आदत डाल लें। नमस्ते तो होते रहते हैं।

३६. जैसे हर नया लेखक कालजयी होता है वैसे ही हर ब्लागर जिसके बारे में अखबारों में छपता है वह हिंदी का पहला ब्लागर होता है। जो ब्लागर अखबार में जहां खड़ा हो जाता है लाइन वहीं से शुरू हो जाती है। अब यह अलग बात है कि जितने ब्लागर होते हैं उतनी ही लाइनें होती जाती हैं।

अगर आप इतना पढ़ ही चुके हैं तो यह भी बताते जाइये न कि यह लेख कैसा लगा? बताइये हम अपने तक रखेंगे ,किसी को बतायेंगे नहीं!

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

46 responses to “हर सफल ब्लागर एक मुग्धा नायिका होता है”

  1. सृजन शिल्पी

    ये एक-एक सुभाषित चिट्ठाकारी के रस में डूबे आप जैसे चिट्ठाकार के की-बोर्ड से ही निकल सकते हैं। ब्लॉग जगत की हर खास हलचल, अदा, आदत और प्रवृत्ति का निचोड़ आप अपने सुभाषित के रूप में पेश कर देते हैं। आशा है, इन सुभाषितों की सूची आपके अनुभव के साथ-साथ लगातार लंबी होती जाएगी।

  2. जगदीश भाटिया

    सब की पोलपट्टी बुरी तरह खोल दिये ओ साहब :D

  3. पंकज बेंगाणी

    :)

    अभी इतना ही, चाचु. 35 जोडे पढकर मन प्रसन्न हो गया .

  4. संजय बेंगाणी

    पढ़ने से पहले टिप्पीया रहा हूँ, बाद में पता नहीं अपने आप को इस लायक समझु ना-समझुं.

    सारे सुभाषितो को प्रिंट कर, मढ़वा कर ब्लोग लिखने से पहले अगरबत्ती करेंगे.

  5. abhay tiwari

    बाकी सब तो ठीक है.. पर फ़ुरसतिया को हफ़्ते हफ़्ते भर फ़ुरसत न मिले ये कौन सी बात है..और जब फ़ुरसत मिले भी तो क्या इसलिये कि पुरानी पोस्ट में दो चार बातें जोड़ कर फिर चढ़ा दिया जाय..वैसे आप स्वतंत्र आपकी फ़ुरसत स्वतंत्र.. दोनों मिलकर जो मन चाहे करें..

  6. सागर चन्द नाहर

    ये आपने सही नहीं किया, सुझाव क्रमांक २३ को यहाँ लिखने से पहले ही सार्वजनिक कर दिया। इन्क्वायरी कमिटी बिठानी पड़ेगी कि इतनी मत्वपूर्ण बात लीक कैसे हो गई?
    आजकल जिसे देखो वह टिप्प्णी क्रमांक २३ को आजमा रहा है।
    लगता है इस बात पर हमें भी गौर करना पड़ेगा। :)

  7. रवि

    अब आप ही बतइयो कि आप अपने आपको सफल मानते हैं या बेहद सफल?

  8. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'

    बहुत खूब चाचू मजा आ गया, अगर कभी चिट्ठाकारी एन्साइक्लोपीडिया लिखा गया तो ये फार्मूले उसमें स्वर्ण-अक्षरों में दर्ज होंगे।

    किसी पोस्ट पर आत्मविश्वासपूर्वक सटीक टिप्पणी करने का एकमात्र उपाय है कि आप टिप्पणी करने के तुरंत बाद उस पोस्ट को पढ़ना शुरु कर दें। पहले पढ़कर टिप्पणी करने में पढ़ने के साथ आपका आत्मविश्वास कम होता जायेगा।

    ये नियम पहले भी पढ़ा हुआ था लेकिन क्या करें आपकी पोस्ट पढ़ने का लोभ संवरता नहीं। खैर अगली बार पहले टिप्पणी करेंगे फिर पढ़ेंगे। :)

  9. kakesh

    आपके वचन ब्लागजगत के लिये बड़े काम की चीज हैं .

    कुछ और जोड़ें :-)

    1. हर पुराना ब्लौगर ,हर नये ब्लौगर को बेकार और खुद को तीसमारखां समझता है .
    2. हर नया ब्लौगर लिखने के लिये एक विषय की तलाश में रहता है और इसके लिये वो दूसरों के ब्लौग पर मुँह मारता रहता है .
    3. अधिकतर ब्लौगरों की पत्नियाँ ब्लौग को अपनी सौत की तरह देखती हैं.
    4. जैसे जैसे ब्लौगर पुराना होता उसका किसी भी विषय पर लिखने का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है . लेकिन कई बार वो इस भ्रम का शिकार हो जाता है कि वो जो भी लिखेगा अच्छा ही लिखेगा.
    5. आपकी पोस्ट की लंबाई आपकी टाइपिंग स्पीड के समानुपाती होती है.

  10. masijeevi

    गुड बहुत गुड है। 31,32 काम के हैं, मेरे लिए। बाकी और लोगों के लिए भी और मेरे लिए भी।

    32 दो बार है। कोई टेस्‍ट है कि बोनाफाइड मिस्‍टेक है।

    मजा आया बहुत मजा आया। आपने बताया ही कि जब कोई कह कर पढवाए तो इससे कम नहीं सुनना चाहता।

  11. ghughutibasuti

    बहुत ही मनोरंजक रचना है । कुछ सुझाव मैं भी आजमाऊँगी ।
    घुघूती बासूती

  12. Sanjeeva Tiwari

    मैं नया चिठ्ठाकार हुं , मुझे अभी आप लोगों को पढना व समझना है । आपके आत्म मुग्धता एवं ब्लोग के व्यक्तित्व का आईना होने के सम्बंध में लिखे गये विचार से मैं सौ प्रतिशत सहमत हुं । मेरे ब्लागर बनने के पहले से ही मेरे आलोचक आत्म मुग्धता की दुहाई देते थे, आज ब्लाग जगत को देख कर सब अहसास हो रहा है क्योंकि यहां कोई संपादक नहीं है जो आपके भावों को शिल्प दे सके ।

    हमारे जैसे लोगों के लिये ऐसे ब्लोग्स निरंतर लिखा जाना चाहिये ।

  13. मनीष

    हाँ, सब के साथ होता है ऐसा…अच्छा लेख !

  14. अफ़लातून

    तीन दिन की मेहनत आधी काम आई । यह तो पढ़ी या नहींपता नहीं । महटियाने के भी बहुत श्रेष्ठ पायदान होते हैं ।

  15. समीर लाल

    कंडिका २१ तक इसे आपकी पुरानी पोस्ट ब्लाग, ब्लागर, ब्लागिंग का संस्मरण मानते हुये कंडिका ३२ के मद्देनजर कहना चाहूँगा कि बहुत बेहतरीन और मजेदार पोस्ट रही. :)

    बाकी उसके आगे के नये जोड़-बहुत धांसू, ज्ञानवर्धक, चुलबुले. ३१ बहुत पसंद आया. बधाई.

    अगला लेख (संस्मरण नहीं) जल्दी लिखें. :)

  16. reetesh gupta

    अगर आप इतना पढ़ ही चुके हैं तो यह भी बताते जाइये न कि यह लेख कैसा लगा? बताइये हम अपने तक रखेंगे ,किसी को बतायेंगे नहीं!

    अरे भाइया बहुत खूब कहे हो

  17. तरूण

    अनुप जी, एक बार फिर से कमाल का लेख और ब्लागिंग के बारे में दिये गये प्वाइंट एक से बढ़कर एक।

  18. जीतू

    क्यों दद्दू! नयी बोतल मे पुराना माल?
    मिलावट काहे कर रहे हो।

    वैसे सच बताएं, पुरानी बातें आज के जमाने मे भी सार्थक है और आगे भी रहेंगी।
    सही है। लगे रहो।

  19. mamta

    गजब

  20. अफ़लातून

    ‘विधवा’-विवाह पर रोक तथा ‘सती’ जैसी प्रथाओं का अनूप भी समर्थक नहीं है इसलिए पढ़वाने और टिप्पणी करवाने का आग्रह था ।

  21. rachana

    ६, ७, ८, ९…सारे ही पॉइन्ट मजेदार हैं!!

  22. नीरज दीवान

    क्रमांक २३. और क्रमांक ३१ हा हा
    बहुत जानदार प्रस्तुति रही.. गुदगुदा गया गीता ज्ञान.. रतलामी जी के मरफ़ी नियमों की माफ़िक.. ब्लॉगजगत के गूढ़तम रहस्यों से पर्दा उठ गया और मेरा मन झृंकत हो चुका है. आप निःसंदेह अद्भुत हास्यबोध से सराबोर रचनाकार है. इस अद्वितीय आलेख के लिए बधाई स्वीकार करें.
    > मुझ जैसे लोग नींव की ईंट हैं जिन पर आपका कंगूरा अटका हुआ है. :)

  23. बेजी

    चलो बाद में ..बाद में ..करते करते….इत्ता अच्छा लेख रद्दी में जाने से पहले पढ़ ही लिया!!
    वाह!!

  24. प्रत्यक्षा

    इतना ज़्यादा ज्ञान एक ही बार में । हज़म होते वक्त लगेगा :-)

  25. प्रियंकर

    का बात है! पंडिज्जी !
    जैसे दादी-नानी के नुस्खा बरसों-बरस चलत हैं सबके संगै वैसेइ चलयैं जेउ .अब ऐसो करौ कि आप और रवि रतलामी दोऊ जनै मिल कै अपने-अपने नुस्खा छपवाय लेओ .छोटी-छोटी पहाड़ेनुमा चौपतिया या ई-चौपतिया . बहुतै ज़रूरी काम है .

  26. अरुण

    लानत है आपने हमाये उपर पोस्ट लिख डारि औ हमे पतई नई,जे तो आज गूगल देवता ढूढ लाये भाई धनियावाद,काहे की उसी के पेड[पर अब हम चढने की कोसिस करेगे ना

  27. फुरसतिया » ब्लागिंग छोड़ने के चंद फ़ायदे

    [...] हालांकि आलोक पुराणिक का मानना है कि ब्लागर,आशिक, सिपाही, स्मगलर-ये धंधे ऐसे हैं कि एक बार जो बन गया , सो बन गया, फिर पूरी जिंदगी नहीं छूटता< /strong> लेकिन ऐसा संभव है कि लोग कहें कि अब बस ब्लागिंग बंद। आज से नयी जिंदगी शुरू। ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिये ब्लागिंग छोड़ने के कुछ फ़ायदे यहां बताये जा रहे हैं। इनमें फ़ायदे की मात्रा इस पर निर्भर करती है कि आप ब्लाग नदी में कितना गहरे उतरे हुये हैं। आप ब्लागिंग में जितना गहरे उतरे होंगे ब्लागिंग छोड़ने पर आपको उतने ही अधिक फ़ायदे उतराते दिखेंगे। तो न हो तो बता ही दें कुछ फ़ायदे। इनको हड़बड़ा कर पढ़ने के पहले आप ब्लाग-ब्लागर-ब्लागिंग से संबंधित कुछ जानकारी हासिल करते चलें तो बेहतर होगा। आइये अब बताते हैं आपको कुछ ब्लागिंग छोड़ने के फ़ायदे! [...]

  28. फुरसतिया » नियमित ब्लागिंग करने के कुछ सुगम उपाय

    [...] दोहराना न भूलें। बस यूं हीPopularity: 1% [?]Share This (No Ratings Yet)  Loading …  [...]

  29. फुरसतिया » साइकिल के हैंडल पर सवार फ़ुरसतिया

    [...] जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे। फ़ुरसतिया आज सबेरे मैंने झलक दिखला जा की तरह एक सपना देखा। [...]

  30. फुरसतिया » उल्लू का पठ्ठा शब्द का उद्भव कईसे हुआ?

    [...] यही हाल ब्लागिंग का है। जो अपने को सफ़ल मानता है वह सफ़ल है। मतलब कहने का ई है बालकिशन बाबू कि सफ़ल होना उत्ता जरूरी नहीं जित्ता जरूरी है अपने आप सफ़ल मानना। ब्लागिंग में बारे में और ज्यादा जानकारी आपको के लिये आप हमारा लेख हर सफल ब्लागर एक मुग्धा नायिका होता है बांचिये। आपको एहसास होगा कि आपमें एक सफ़ल ब्लागर बनने के सारे गुण मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ़ आपको अपने ऊपर विश्वास करने की है। चेतावनी: जैसे ही आपको अपने सफ़ल ब्लागर होने का एहसास होने लगे आप इस लेख का नियम संख्या ४ बांच लें- अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है। [...]

  31. खराब लिखने के फ़ायदे

    [...] अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है। 2.जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।-ब्लागिंग के सूत्र [...]

  32. Abhishek Ojha

    इस टिपण्णी कम ब्लॉग पूरण को तो पढने से पहले ही टिपण्णी करना चाहिए था… ब्रेक ले ले के पढ़ा, अब क्या टिपें चलते हैं… सुझावों का भरसक ध्यान रखा जायेगा.

  33. ताऊ रामपुरिया

    जबरदस्त पोस्ट है ! मैं बहुत देर से पढ़ रहा हूँ ! पर आज भी सामयीक यानी ये पोस्ट सर्वकालिक रहेगी ! जैसे जैसे शराब पुरानी होती जाती है उसके गुणों में बढोतरी होती जाती है ! उसी प्रकार ये पोस्ट समय के साथ और उपयोगी होती जायेगी ! बहुत धन्यवाद !

  34. puja

    कसम से गुरुदेव…यकीन नहीं हो रहा की २००७ की पोस्ट है, आप तो कबसे इतने ज्ञानी है, हम तो अभी अभी ऐसी पोस्टें पढ़ कर ब्लॉग जगत के बारे में अपनी जानकारी बढा रहे हैं. आज ताऊ के ब्लॉग से आपकी शरण में आये हैं…बस मोक्ष पाने का खजाना यहीं छुपा है…पता चल गया.
    कमसे कम रास्ता तो पता चला, चलते चलते पहुँच ही जायेंगे हम भी ज्ञान के हिमालय पर :)

  35. Alpana Verma

    अद्भुत पोस्ट!
    भला हो ताऊ जी का जो इतनी बढ़िया पोस्ट से परिचय कराया..उनका लिंक बिना किसी त्रुटी के यहाँ पहुंचा गया.
    इतनी मेहनत,समय और शोध से लिखी गयी पोस्ट पर टैक्स भी लगा देंगे तो bhi isey padhna ‘worth ”है! धन्य है ब्लॉग जगत और इस की महिमा!

  36. Alpana Verma

    badi hi bhayanak thumbnail picture aayee hai comment ke saath!

  37. Ratan Singh

    ये जब्बरदस्त पोस्ट ताऊ ने आज फिर पढ़वा दी | जय हो महाताउओं की !

  38. NirjharNeer

    accha Aina hai ..jismein koi bhi apna chehra dekh sakta hai

    LOL

  39. अब तो कुछ कर गुजरने को दिल मचलता है

    [...] कर पाते। ब्लागिंग के कुछ मूल सूत्र यहां दिये [...]

  40. सिद्धार्थ जोशी

    लो कल्‍लो बात। आप कहते हैं मैं अपने दिल की बात कहूं और उसे आप अपने तक ही रखेंगे। कैसे मान लूं। पहले के 39 की बात तो आप पब्लिश कर चुके हैं। उन्‍हें देखने के बाद तो टिप्‍पणी रूपी रत्‍न रखने का मानस बना पाया हूं। क्‍योंकि अगर आप अपने तक ही रखते यानि मॉडरेट कर देते तो टिपियाने का अर्थ ही खतम हो जाता। सो आपके पूर्व के प्रयासों को देखते हुए टिप्‍पपणी करने का प्रयत्‍न कर रहा हूं।

    और टिप्‍पणी है ….. शानदार। एक साथ ज्ञानवर्द्धक और हास्‍यमूलक।

  41. K M Mishra

    ज्ञानवर्धक सुझाव । अमल में लाऊंगा ।

  42. …एक ब्लागर की डायरी

    [...] पुराना ब्लॉगर रहा हो। देखते हैं कि ब्लॉगिंग के सामान्य सिद्धान्तों में इसका कोई जिक्र है [...]

  43. Saagar

    हे भगवान् हँसते-हँसते हालत ख़राब हो गया है… यह सब ज्ञान २००७ में ही बाँट चूका है हमको तो पता भी भी नहीं था… बहरहाल यह एक सत्य है की ब्लॉगजगत पर आपका ब्लॉग एक दस्तावेज है.

  44. आपके विरोध में नियमित लिखने वाला ब्लागर आपके लिये बिना पैसे का प्रचारक है

    [...] हो तो क्या जबाब दोगे? मैं बोला- ये काम ब्लॉगिंग के सिद्धांत संख्या 24 के अनुसार एकदम उचित है। उसी के अनुसार [...]

  45. pankaj upadhyay

    “जब आप कोई टिप्पणी करते समय उसे बेवकूफी की बात मानकर ‘करूं न करूं’ की दुविधा जनक हालत में ‘सरल आवर्त गति’ (Simple Hormonic Motion) कर रहे होते हैं उसी समयावधि में हजारों उससे ज्यादा बेवकूफी की टिप्पणियां दुनिया की तमाम पोस्टों पर चस्पाँ हो जाती हैं।”

    बस यही पढकर टिप्पणी कर रहा हू वैसे बेहतर होता बिना पढे ही करता.. :)

  46. हिमान्शु मोहन

    जय हो!
    36 बुद्धियों का प्रयोग आंग्लसंज्ञा के हिंदीपति तक सीमित न रहने दे कर उसे आपने मुक्त और ब्लॉग-राष्ट्र को समर्पित किया, बल्कि कर चुके, बरसों पहले।
    आज भी ताज़ा है, कालजयी।
    या फिर यह समझा जाय कि इतने बरसों में तनिक भी न सुधरे ब्लॉगिए ही आपके कालजयी होने का मौलिक तत्व हैं?
    जो भी हो!
    जय हो!
    प्रणाम, शुभेच्छु,

Leave a Reply

गूगल ट्रांसलिटरेशन चालू है(अंग्रेजी/हिन्दी चयन के लिये Ctrl+g दबाएं)