कनाडा-अमेरिका न जाओ श्याम पैंया पड़ूं…

कनाडा अमेरिका न जाओ श्याम पैंया पड़ूंइंकब्लागिंग-प्रथम, किंतु अंतिम नहीं,प्रयास

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फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

24 Comments

  1. अरुण

    वाह दादा टिपयाने को भी इंक से ही मन कर रहा है इसका भी कुछ जुगाड सोचना,मजा आ गया,ये समीर भाइ बहुत उछल रहे थे कविता सुनाने कॊ अब चार छै दिन नींद नही आयेगी,तो यहा पढायेगे ही मजबूरी मे क्या खयाल है,
    आपकी और समीर भाई की फ़ोटो यहा भी है देखे http://images.google.co.in/images?q=गदहे&svnum=10&um=1&hl=en&start=18&sa=N&filter=0&ndsp=18

  2. आलोक

    वाह। क्या कहने।

  3. मैथिली

    आपकी इंक ब्लागिग बहुत अच्छी लगी.

  4. जीतू

    बहुत अच्छा लगा। शुकुल तुम्हारी हैंडराइटिंग देखकर पंडित गिरिजाशकर की याद आ गयी, बचपन में, वो हमें पंचाग लिखकर देते है, घर घर पहुँचाने के लिए। हम उसमे गोले (Circles) लगाया करते थे। बहुत मजा आता था, इच्छा तो हो रही है इसमे भी गोले, वर्गाकार खाने बनाए, एक सिरे से दूसरे सिरे को जोड़े, कार्टून बनाने, लेकिन तकनीक ने हाथ बांध दिए, उस जमाने मे पीडीएफ़ होती तो हम शरारत ना कर सकते।

    अच्छा प्रयास है, राइटिंग भी काफी अच्छी है। लगे रहो……

  5. PRAMENDRA PRATAP SINGH

    अच्‍छा लिखा है बधाई

  6. संजय बेंगाणी

    हस्तलेख देख कर प्रसन्नता हो रही है. मन कर रहा है अभी कुछ लिख कर चिपका दूँ, मगर हमारी लिखावट जरा…. :)

    हाथे से लिखने के कारण लेख की लम्बाई कंट्रोल में रही. :)

  7. श्रीश शर्मा

    मजा आ गया लेख पढ़कर, वाकई हाथ से लिखे की बात ही कुछ अलग है। लेख के साथ बनाए कार्टून ने लेख का आनंद बढ़ा दिया।

    आपकी पहली इंकब्लॉगिंग एक लिए शुभकामनाएं, आगे भी लिखते रहिए, हम इंतजार कर रहे हैं।

  8. समीर लाल

    बहुत सही, महाराज. क्या लिखाई है भाई, वाह!! ये जो हमारी तस्वीर बनाई गई है..आपके मुँह में घी-शक्कर. क्या दुबला किया है भाई!!! साधुवाद. :)

    आप अब फिल्मों में गाने लिखना शुरु हो ही जायें. अच्छा लिखे हैं…श्याम पैंय्या पडूँ !!!

    सारा कुछ पढ़ने के बाद शराफत मोड में आ कर टिपिया रहा हीँ…हा हा!!! :)

    अच्छी वाली ही तो कविताऐं छापी हैं…अब और कहाँ से लाऊँ. :(

  9. जगदीश भाटिया

    एक बार शायद देबू दा ने टिप्पणी की थी कि आपको हाथ से लिखेने की क्या जरूरत है आप तो लिखने से ज्यादा स्पीड से टाईप कर लेते हैं।
    मगर यहां देख कर कहना पड़ रहा है कि आपको टाईप करने की क्या जरूरत है आप तो टाईप से ज्यादा सुंदर लिख लेते हैं।
    अच्छा है, कभी कभी हर तरह के बदलाव और प्रयोग होते रहने चाहियें।

  10. manya

    मज़ा आया पढकर. ह्स्तलेख तो अच्छा है ही.. और भी अच्छा हो जयेगा.. आपकी लेखन शैली गुदगुदा जाती है हर बार.. :)

  11. ratna

    बढ़िया है, लेख भी ,इंक ब्लोगिग भी औऱ हस्तलिपी भी।

  12. रचना

    आपका यह प्रथम, किन्तु अन्तिम नही, प्रयास बहुत अच्छा लगा..आप आगे भी इसी तरह सफ़ल प्रयास करते रहे‍..:)

  13. अभिनव

    आपका तो बिल्कुल एक नंबर का मामला है। इंकियाने का मजा ही कुछ अऊर है, हमरी भी आदत छूट गई है पर कोशिश अवश्य करेंगे। कभी न कभी। बाकी समीरजी तो अच्छा लिखते ही हैं इस पर कुछ अधिक बात नहीं हो सकती। हाँ वे कविताएँ ज्यादा अच्छी लिखते हैं या व्यंग्य यह विवाद का विषय हो सकता है। :)

  14. mamta

    इंक ब्लोगिग अच्छी लगी। बहुत ही रोचक अंदाज मे लिखा है।

  15. Raman Kaul

    बहुत खूब। जितना सुन्दर लेखन, उतनी ही सुन्दर लेखनी। कौन सी चक्की का पिसा खाते हैं, शुक्ल जी?
    अब इमेज मैप भी बढ़िया बन गया है। फ्लिकर का लिंक हटा दें।

  16. नितिन

    बहुत खूब!!

  17. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    ये तकनीक के मारे तो नाक में दम है. यहां अच्छा भला लेख पढ़ने आये थे पर क्यूरियॉसिटी चालू हो गयी इंक-ब्लॉगिंग की. एक तकनीक सीखो; तब तक वो कन्डम हो जाती है. फिर नया नाम/नयी तकनीक.
    ये कविता सुनाओ, सुनैबे करो;
    नयी तकनीक न चमकाओ श्याम पैंया पड़ूं.

  18. sujata

    बहुत बढिया जनाब । हाथ के लेख मे अपनापन होता है । लेख मे व्यक्तित्व झलकता है टाइप मे ऐसा कहाँ । अतिउत्तम ! :)

  19. eswami

    अरे वाह! आपकी हैंडराईटिंग तो सचमुच सुंदर है! :)

  20. राजीव

    बहुत ख़ूब।

  21. चौपटस्वामी

    चलिए इस नई तकनीक के बहाने आपका हस्तलेख देखने का मौका मिला . वरना अब सम्पादक के पास भी टाइप या शब्द-संयोजित लेख-कविताऎ ही आते हैं . अच्छे और विद्वान लोगों का सुंदर हस्तलेख देखने के लिए आंखें तरस जाती हैं . सुलेखन-खुशखत-कैलीग्राफी तो अब बीते जमाने की बात हो चली है .

  22. masijeevi

    भई वाह।।।
    पर एक चेतावनी आपने समीर जी क‍ि कविताई को कूड़ा कहा…हम नहीं जानते कि वह कूड़ा है कि नहीं पर तुलसी और पंत के काव्‍य को कूड़ा कहे जाने पर आप के प्रदेश में खूब उफनाई हो रही है। जेल और अदालत का चक्‍कर चल रहा है…संभल कर रहें। :)

  23. सागर चन्द नाहर

    इंक ब्लॉगिंग या मसिचिट्ठाकारी का जिक्र हो और स्वामी देवाशीष के (ना)लायक शिष्य सागर का जिक्र ना हो तो यह तो बहुत बड़ा जुल्म होगा। :)

    संजय जी का कहना भी सही है।
    बहुत सुन्दर हस्तलिपी और उतना ही सुन्दर लेख। अगले लेख का इंतजार है।

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