पता चला कि सचिन रमेश तेंडुलकर का नाम राज्यसभा के लिये प्रस्तावित हो गया। अलग-अलग लोग इस पर अलग-अलग बयान जारी कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि सचिन को वहां जाना चाहिये कोई कह रहा है कत्तई नहीं जाना चाहिये।
अब लोगों को कौन समझाये कि सचिन अपनी मर्जी से कहां जा पाते हैं कहीं। शुरु में वे टेनिस खिलाड़ी बनना चाहते थे लेकिन आ गये क्रिकेट में। क्रिकेट में भी वे तेज बालर बनना चाहते थे लेकिन बनना पड़ा बल्लेबाज। बूस्ट और तमाम चीजें बेचने का काम कौन वे अपने मन से करना चाहते होंगे लेकिन कर रहे हैं। राज्यसभा लिये भी कौन उन्होंने इस्टाम्प पेपर पर लिख कर दरखास्त दी होगी कि हमें बनाओ मेम्बर। अब जब लोगों ने नामित कर दिया तो बनना पड़ेगा। देश के लिये क्या-क्या त्याग नहीं करने पड़ते हैं लोगों को। मजबूरी जो न कराये।
सचिन के राज्यसभा मेम्बर बनने से क्या फ़ायदे-नुकसान होंगे इसका आंकड़ा तो सचिन के स्कोरर रखेंगे। लेकिन कुछ सीन इस तरह के बन सकते हैं:
- सचिन के राज्यसभा में पहुंचने से जनप्रतिनिधियों को नयी प्रेरणा मिलेगी। सचिन पहले ही बयान जारी कर चुके हैं कि उनको जब तक मजा आयेगा क्रिकेट खेलते रहेंगे। उनसे प्रेरणा लेकर बुजुर्ग जनप्रतिनिधि बयान जारी कर सकते हैं- जब तक देश सेवा में मजा आता रहेगा, अपन देश सेवा करते रहेंगे। खबरदार जो किसी ने मेरे रिटायरमेंट की बात चलाई।
- सचिन अपने ऊपर लगाये हर सवाल का जबाब बल्ले से देते आये हैं। वैसे तो वे अपना राज्य सभा का कार्यकाल इंशाअल्ला क्रिकेट खेलते ही गुजार देंगे लेकिन अगर कभी कोई सवाल उनसे पूछा भी गया तो वे कह देंगे कि मैं हर सवाल का जबाब अपने से देता हूं। मेरा बल्ला मंगाइये तो जबाब दूं। सुरक्षा कारणों से ऐसा होगा नहीं और वे बयान देने से बच जायेंगे।
- सचिन के राज्य सभा में पहुंचने से सबसे ज्यादा परेशानी अन्ना की टीम को होगी। वे अब एक सांस में नहीं कह सकेंगे कि सदन में सब भ्रष्टाचारी हैं। उनको सचिन को अपवाद में डालने के लिये अपना आरोप-नारा लम्बा करना पड़ेगा। और यह तो आपको भी पता है कि जब आरोप-नारा लम्बा हो जाता है तो उसकी ताकत कम हो जाती है।
- सचिन खुदा न खास्ता कभी सदन गये भी तो वहां से नये शाट सीख कर बाहर आयेंगे। जिस तरह आरोपों के जबाब में प्रत्यारोप लगाये जाते हैं। ईरान की बात को तूरान से जोड़ा जाता है उससे सचिन को कोई न कोई नया शाट लगाने का तरीका जरूर सीखने को मिलने। कालान्तर में वह शॉट राज्यसभा शॉट के नाम से जाना जायेगा।
- क्या पता सचिन के सदन में पहुंचने से वहां के लोग विज्ञापन की दुनिया में आने लगें। इससे हो सकता है पैसे लेकर सवाल पूछने जैसी चिल्लर हरकतें करने के लिये मजबूर होने वाले जनप्रतिनिधियों का जीवन स्तर कुछ सुधर जाये। हो सकता है कि विज्ञापन की कमाई के चलते ही आगे चलकर छोटे-मोटे घपले कम हो जायें।
सीन तो रेखाजी के राज्यसभा का मेंबर बनने से भी कई खिंचते हैं। लेकिन एक रेखा जी एक तो भली हीरोइन हैं और दूसरे हम आजकल उनके संपर्क में नहीं है इसलिये उनके बारे में हमारा कुछ कहना शोभा नहीं देता। इसलिये उनके बारे में सीन आप अपनी कल्पनाशीलता से खैंचिये।
चलते-चलते
दो दिन पहले ज्ञानजी ने फ़ेसबुक पर अपने पुत्र की सगाई की मंगलमय सूचना दी। कई सालों पहले एक ट्रेन दुर्घटना में उनके पुत्र के सिर में चोट लगने से पूरा परिवार परेशान था। ज्ञानजी का ब्लागजगत से भी जुड़ने का एक कारण हिंदी में शिराघात की जानकारी देने वाली साइट बनाने का उद्देश्य था। समय और उपचार के बाद धीरे-धीरे ज्ञानजी का पुत्र ठीक हुआ। एक पोस्ट में ज्ञानजी ने अपने लड़के के गंगा-सफ़ाई अभियान पर जाने की सूचना दी। अब इसके बाद ज्ञानजी के पुत्र की सगाई का सुखद समाचार सुनकर बहुत अच्छा लगा। पूरे परिवार को इस मंगलमय अवसर पर बधाई। कामना है कि बच्चों का वैवाहिक जीवन मंगलमय हो।
वैसे ससुर बनने के बाद ज्ञानजी के लिये चुनौतियां बढ़ जायेंगी। उनके ऊपर सतीश सक्सेना जी जैसा अच्छा/भला ससुर बनने का दबाब होगा। अपने सतीश जी जितने अच्छे ससुर साबित हो रहे हैं उससे लगता है कि ताज्जुब नहीं कि नेट/ब्लागजगत से जुड़ी बच्चियां जो उनकी पोस्टें पढ़ती हैं वे कल को कहने लगें-हमारा फ़ादर इन लॉ कैसा हो, सतीश सक्सेना जैसा हो।
भारत-रत्न न बनने का खामियाजा राज्यसभा को झेलना ही पड़ेगा.वैसे सचिन तो चुनाव जीतकर भी संसद में पहुँच सकते हैं.राज्यसभा में जाना और राज्यपाल बनना तो वफादारों के लिए पूरी तरह आरक्षित हो जाने चाहिए !
…ससुर बनने की प्रक्रिया में लगे ज्ञान जी को बधाई और सतीश जी तो खुद को सिद्ध कर ही चुके हैं !
रेखा के बारे में ट्विटर पर यह पढ़ने को मिला…
‘जो काम अमिताभ नहीं कर पाए ,सरकार ने रेखा और जया को एक हाउस में लाकर वह कर दिखाया है !’
संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..उभार की सनक या बिकने की ललक !
अब भाई सरकार से राज्यसभा में आरक्षण के लिए हम कैसे प्रस्ताव भेज सकते हैं?
अमिताभ , रेखा, जया वाले में तो यही साबित हुआ की सरकार अमिताभ के मुकाबले ज्यादा असरकारी है!
अगर नारा ही देना होगा तो बेहतर होगा की वे कहें …
हमारा पापा कैसा हो
…
हम अक्सर दो चेहरे लिए होते हैं , बहु को बेटी जैसा रखेंगे और दामाद तो हमारे लड़के जैसा है मगर जब वही कर दिखाने की बात आती है तो बेटी को कैप्री( मिड काफ पैंट ) अच्छी लगती है मगर बहु को शोभा नहीं देता, दामाद के साथ नाटक कितना होता , सबको पता है !
यह रिश्ते हमारी सामाजिक मजबूती की पोल खोलते हैं, इनका तिरस्कार/ बहिष्कार होना चाहिए, मगर उसके लिए हमें अपने गिरेबान में झांकना होगा !
सादर
सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..मैंने तो मन की लिख डाली ( भूमिका मेरे गीत की )
नारे के लिये तो यही कहेंगे कि जो ग्रेस फ़ादर इन लॉ में है वो पापा में कहां? फ़िर पापा तो सम्बोधन है जबकि फ़ादर इन लॉ संबंध है। संबंध बनने के बाद ही तो संबोधन तय होंगे। संभव है कि कोई डैडी कहलवाना पसंद करे, कोई पिताजी, कोई बाबूजी।
बाकी आपकी बहू/बेटी वाली पोस्ट बांचकर मुझे सही में बड़ी घबराहट होती है। कल को हमारी भी बहू किसी भी बात पर हमको ताना देगी – आप सक्सेना अंकल की तरह (स्मार्ट,उदार, भले) क्यों नहीं है तो हम कहां जायेंगे? बताइये भला !
अगर आपका बस चला तो सचिन से जवाब बल्ले से ही दिलवाओगे, मुझे भय है की सचिन कहीं आपको मेरी तरह गुरु ना मान ले ….
सचिन गुरु तो खैर क्या मानेंगे! वैसे हमको तमाम लोग गुरु कहते हैं। कानपुर में गुरु के मतलब लफ़ड़े वाले भी होते हैं। हम यही मानते हैं कि उसई परिभाषा के तहत हमको लोग गुरु मानते हैं। इसमें सीखने/बताने की भावना या कहें ज्ञान जैसी चीज का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
दूसरा-तीसरा मजेदार।
वैसे सचिन महाराज राज्य सभा में जाएंगे कितने दिन साल में?
सचिन राज्य सभा में देखेंगे(देखेगा) कि वह बेचारा कोई शॉट-वॉट नहीं जानता राज्यसभाइयों के सामने।
वैसे इस मुद्दे पर मेरी खिसियानी टिप्पणी जो कुछ दिन पहले लिखी गयी है-
‘सचिन जैसों को राज्य सभा क्या, राज्य सभा के दरवाजे पर भी नही रहना चाहिए। लेकिन सब हो रहा है यहाँ। जो हैं, वे भी वैसे ही हैं। इसलिए सचिन जाये चाहे कोई गोबरगणेश, कोई फ़रक नहीं पड़ता’
चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..स्वामी विवेकानंद का दूसरा पक्ष
आपकी टिप्पणी से बहुत हद तक सहमत ही हूं- और कुछ कर भी तो नहीं सकता हूं!
हुज़ूर , आनंद आना शुरू हुआ और पोस्ट ख़तम हो गयी …
लगता है फुरसतिया जल्दी में है ….
बाकि सचिन के राज्यसभा में जाने पर नो कमेन्ट
आशीष श्रीवास्तव
आनन्द आना शुरु हो गया ये क्या कम है? न्यूटन के जड़त्व के नियम का फ़ायदा घसीटकर आनन्द लेते रहिये जब तक आपके आनन्द के विपरीत कोई दूसरा भाव कब्जा कर ले आपपर!
आप रेखाजी से जब सम्पर्क में थे तब के सन्स्मरण ब्लॉग पर प्रस्तुत करें। वह हिन्दी ब्लॉगरी के लिये अनूठी बात होगी।
सतीश सक्सेना जी तो ब्लॉग-रत्न हैं। उनकी बराबरी भला कौन कर सकता है! हमे अपनी क्षमताओं को ले कर कोई गलतफहमी नहीं है!
Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..लिमिटेड हाइट सब वे (Limited Height Sub Way)
रेखाजी से सम्पर्क की तमाम यादे हैं अपन की लेकिन उनको ब्लागपर लिखकर मैं संबंधों की निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहता। कुछ लिखूंगा तो वे क्या सोचेंगी हमारे बारे में। इसलिये इस मसले पर क्षमा ही कर दें।
सही है सतीश जी की बराबरी थोड़ा-बहुत सतीश जी ही कर सकते हैं। और किसी की क्या बिसात जो इस बारे में सोचे भी।
ज्ञान दत्त जी
शुरू से जिनसे प्रेरणा लेता रहा हूँ, उनमे एक आप हैं और रहेंगे !
आपसे एक शिकायत है कि आपने एक साधारण ब्लोगर के लिए ब्लॉग रत्न जैसा शब्द प्रयोग किया है यह मेरे लिए शर्मिंदा करने के लिए काफी है , अगर मुझसे आपकी शान में कभी गुस्ताखी हुई हो तो हार्दिक क्षमा याचना करता हूँ आशा है बड़े भाई की हैसियत से भुला देंगे !
ब्लॉग जगत में एक से एक विद्वान कार्य रत हैं जिनको पढ़कर अपने आपको भाग्यशाली मानता हूँ ! यहाँ मेरे विचरण का उद्देश्य ही कुछ नया और अच्छा सीखना है जो काफी हद तक संभव हुआ है, कम से कम मैं यहाँ किसी से तुलना के लायक, अपने को नहीं मानता !
सादर
मैने जो लिखा उसमें रंचमात्र भी अतिशयोक्ति नहीं है। आपकी वह पोस्ट आपकी उत्कृष्ट व्यक्तित्व की झलक दिखाती है। बाकी एक अच्छे ब्लॉगर का विद्वान होना कतई जरूरी नहीं। उल्टे, विद्वान अगर सहजता नहीं रखता, तो स्तरीय ब्लॉगर नहीं हो सकता। आप विद्वानों से प्रेरणा लेने के फेर में न पड़िये। लोग आपसे प्रेरणा लेंगें/लेते हैं।
Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..लिमिटेड हाइट सब वे (Limited Height Sub Way)
मेरी कोशिश रहेगी कि आपका स्नेह और अपनापन मिलता रहे , इस स्नेह के नाते आपसे कभी कभी मार्गदर्शन की अपेक्षा अवश्य रखूंगा !
सादर
सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..मैंने तो मन की लिख डाली ( भूमिका मेरे गीत की )
हम आजकल उनके संपर्क में नहीं है
क्या मतलब है इसका?
sanjaybengani की हालिया प्रविष्टी..नितीश का मराठी प्रेम प्रशंसनीय है
इसका मतलब है हम आजकल उनके टच में नहीं है। न फोन न फ़ान। न चिट्ठी न संदेश। टोट्टली कट ऑफ़। बाकी ज्ञानजी को टिप्पणी देते हुये लिखा।
टच को हिंदी में क्या कहते हैं ?? संपर्क और टच में अंतर होता हैं या नहीं
जब टच में थे तब भी क्या संपर्क में थे ??
दूरसंचार से टच में कैसे आ सकते हैं
शब्द का खेला हैं
शब्दों से खेला हैं
निशब्द
rachna की हालिया प्रविष्टी..नज़र अपनी अपनी समझ अपनी अपनी . ६ साल के बाद हिंदी ब्लॉग लेखन
शब्दकोश के अनुसार टच का एक मतलब संपर्क में रहना होता है उसई का अपन नें उपयोग किया है इधर देखिये टच के मतलब शब्द कोश (http://www.shabdkosh.com/s?e=touch&f=0&t=0&l=hi ) में । बाकी अपने मतलब के अर्थ आप खोज लीजिये
:
noun
हलका सा (m)
छूत (f)
तरीका (m)
थोड़ा (m)
पुट (f)
भाव (m)
संबंध (m)
स्पर्श (f)
पार्श्वभूमि (f)
verb
स्पर्श करना
हलकी क्षति पहुँचाना
छूना
दिल को छू लेना
संपर्क में रहना
असर करना
उल्लेख करना
उत्तेजित करना
हाथ लगाना
अनुभव करना
क्या रचना जी..आप भी न, निर्मल हास्य को समझ नहीं पातीं..अरे बहन जी, कित्ते सारे ऐसे शब्द हैं, जिन्हें हम इस्तेमाल करते हैं, और समझने वाला समझ जाता है की हम क्या कहना चाह रहे हैं..आप भी न..बहुत भोली हैं
सच्ची
हर बात को गंभीरता से ले लेतीं हैं. ये हास्य का पन्ना है, हंसिये, और निकल लीजिये, लिखने वाले को सर धुनने पर आमादा मत कीजिये 


है की नहीं?
कल मैंने श्रीमती जी से पूछा- “मेरी चटनी बना दी??’” उसने कहाँ हाँ, कब की
अब यदि वो आपके तेवर की होती तो मुझे भाषा विज्ञान पढ़ाने लगती
ऐसे ही हम पता नहीं कित्ती बातें करते हैं जिनके भयंकर टाइप के मतलब निकल सकते हैं..
सही कहा आपने, सचिन अपने मन से कुछ भी नहीं करते …शायद अपने से आठ साल बड़ी पत्नी से प्यार भी वे अपने मन से नहीं करते होंगे, भगवान् जो ठहरे ! भगवान् हैं तो अंदाज़ जुडा होगा हीं ! खैर छोडिये इन बातों को, हमारे लिए तो महत्वपूर्ण है ज्ञान जी वाली सूचना…….ज्ञान जी को स्वसुर बनने की ढेर सारी बधाई !
सचिन के व्यक्तिगत/ पारिवारिक जीवन के बारे में अपन का कुछ कयास लगाना ठीक नहीं बनता।
रेखा जी से संपर्क न होने का मुद्दा ज्ञान जी ने एक दम सही उठाया है , संस्मरण पेश करने की डिमांड हमारी तरफ से भी
जितना मैंने समझने की कोशिश की है उससे तो यही लगता है की सचिन को राज्यसभा भेजना सोची समझी राजनीतिक चाल है | और अगर ये सही है तो इसे भारतीय खेलों के लिए किये गए गलत सरकारी निर्णयों में से एक कहा जायेगा |
जब बड़े बड़े धुरंधर बैठे हैं तो एक खिलाड़ी जो अभी देश के लिए खेल रहा है उसे राजनीति में लाने की ज़रुरत गले नहीं उतरती !!! खैर अन्दर की कहानी या तो अन्दर के लोग जाने या भगवन जाने !!!! हम तो अब क्रिकेट का भी मजा ढंग से नहीं ले पायेंगे

देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..सखी वे मुझसे लड़ के जाते…
जैसा ज्ञानजी को लिखा रेखाजी वाले संपर्क-संस्मरण में बात वही निजता के उल्लंघन की बनती है।
बाकी सचिन के बारे में राजनीतिज्ञ का काम ही राजनीति करना है। वो करते हैं तो इसका मतलब वे अपना काम कर रहे हैं।
राजनीति में आने/लाने के निर्णय अगर आपके/हमारे गले नहीं उतरते तो यह आपके/हमारे गले की समस्या है- राजनीति की नहीं।
देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..सखी वे मुझसे लड़ के जाते…
सचिन ही क्यों? वह कब खेल रहे होंगे और वह संसद का सत्र चल रहा होगा. शायद उसे राजनीति के क ख ग से भी मतलब नहीं है . ये दलों की राजनैतिक चाल है . वर्ना कितने मनोनीत सदस्य राजनीति में सक्रिय हो पाते हैं. एक सांसद की भूमिका कितने सांसद निभा पाते हैं फिर सचिन क वहां पहुँचाना बुरा तो नहीं लेकिन वह भी लता जी की तरह से वहां सांसद सिद्ध होंगे.
आपकी बात सही है। अब देखिये सचिनजी क्या बन पाते हैं।
एगो सवाल और है कि क्या राज्यसभा क्यों है, उसका काम क्या है जैसे सवाल सचिन जैसों को इतना पता है कि उसमें ढुका दिया जाये इनको!
सचिन बेचारे देशभक्त हैं। देश सेवा के लिये उनको जहां ढुकाना होता है ढुक जाते हैं।
बहुत बढ़िया पोस्ट.
सचिन कहीं भी रहे जवाब तो बल्ला ही देगा. किसी ने बताया कि उनका मनोनयन राज्यसभा टीवी की टी आर पी पढ़ाने के लिए किया गया है.
सक्सेना जी एक आदर्श ब्लॉगर हैं और एक आदर्श फादर-इन-ला भी. उनकी वजह से बाकी लोगों के ऊपर दबाव आ जाना संयोग की बात है.
शिव कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..हम किरपा के बदले दसबंद नहीं देंगे आपको..
सच में, सक्सेना जी की वो पोस्ट पढ़ कर टेन्शन सहज हो जा रहा है।
Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..लिमिटेड हाइट सब वे (Limited Height Sub Way)
सक्सेनाजी भले ब्लागर हैं। आपलोग उनके चलते टेंशन में आयें यह ठीक तो नहीं हैं लेकिन बात सहज-स्वाभाविक है।
सचिन ने राज्यसभा का आमन्त्रण भविष्य की किसी योजना के अन्तर्गत ही किया होगा, खेल को उनकी उपस्थिति से बल मिलेगा। ज्ञानदत्तजी निश्चय ही अच्छे ससुर सिद्ध होंगे, नया दायित्व है।
प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..उन्होनें साथ निभाया
सचिनजी के बारे में आपकी राय के भविष्य बतायेगा। ज्ञानजी के अच्छे ससुर सिद्ध होंने की आपकी बात से सहमत होने के सिवा अभी क्या करता है कोई?
सचिन पर गुड/ बैड राज्यसभा इंट्री पर तफ्सरा(पता नहीं उर्दू का यह शब्द मैंने ठीक से लिखा या नहीं ) और चलते चलाते तक आनंदमयी पोस्ट ….अपुन सतीश भाई निराले हैं -आप कहाँ अनुसरण लाईन में लग रहे हैं !
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arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..वक्ष सुदर्शनाएँ!
तफ़्सरा के बारे में कोई उर्दू जा जानकार अपना बयान जारी करेगा। सतीश भाई के निराले पन से सौ फ़ीसदी इत्तफ़ाक रखते हैं फ़िलहाल! अनुसरण लाईन में अपन कहीं नहीं लगे हैं। उनका अनुसरण करना बहुत मेहनत का काम है जी। हम ठहरे आलसी घराने के जवान।
ओह हो हो ..बड़ा गंभीर मामला लगता है ..सतीश जी अपने को महान मानने को तैयार नहीं ..और अगर वह आम ही रहे तो बाकी लोगों की परेशानी जायज़ है …वह फिर ये नहीं कह पाएंगे की सतीश जी से तुलना न की जाये वे तो महान हैं ..:):),.
shikha varshney की हालिया प्रविष्टी..उम्मीदों का सूरज.
तुलना स्वाभाविक स्वभाव है लोगों का। वैसे सतीश जी कहां तक बचेंगे महान बनने से !
ये ‘इनला’ और ‘आउटला ‘ के चक्कर में क्यों फंसा दिया बेचारे “आईला” को |
amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." स्मृति की एक बूंद मेरे काँधे पे……."
कोई किसी को फ़ंसा कैसे सकता है भाई बिना सहमति के!
सोंचिये सचिन के राज्य सभा में जाने कितने लोगों को चिंतन पथ मिला इससे साफ़ जाहिर है कि सचिन समाजसेवी हैं
सचिन विकट समाज सेवी हैं इससे भला किसे एतराज हो सकता है।
बढिया लगा बांच कर।
ज्ञान जी को बधाई।
मनोज कुमार की हालिया प्रविष्टी..गांधी जी की पहली सेक्रेटरी मिस सोंजा श्लेसिन
शुक्रिया जी।
गंदी बात , गंदी बात. सचिन भगवान हैं, उनका मजाक उड़ाना गंदी बात
aradhana की हालिया प्रविष्टी..बाऊजी की बातें
भगवान से भी कभी-कभी मौज लेना चाहिये नहीं तो उनको खराब लग सकता है न!
सचिन सबसे पहले नैतिकता के आधार पर पेप्सी की संसद के जलपान गृह में उपलब्धता का प्रश्न भी उठा सकते हैं जो की अभी प्रतिबंधित है ‘क्यूंकि वो इसके ब्रांड अम्बेसडर है|
राज्यसभा में सचिन का अच्छा चित्रण किया है मौसा जी…….
satyavrat shukla की हालिया प्रविष्टी..सोशल मीडिया-"आम आदमी की खास आदमी तक पहुचती आवाज़"
सचिन पर अब कोई बॉलर टिप्पणी भी नहीं कर सकेगा… सचिन कह सकेंगे कि ये सदन की अवमानना है…
और बॉलर्स को ’कारण बताओ नोटिस’ भेज दिया जायेगा…
हमेशा की तरह लाजवाब, गुदगुदाती हुयी पोस्ट…
ज्ञानजी को ढेरों बधाईयां।
जब किसी ब्लॉग में आपके कमेंट की धमक-चमक दिखलाई पड़ती है तो अंदाजा हो जाता है कि फुरसतिया में जोरदार बारिश हुई होगी।
सचिन के सदन में भेजने वाले उनके लिए बल्ले का जुगाड़ कर ही देंगे। जब कभी विपक्ष की बॉलिंग शुरू होगी सब के सब सचिन को बल्ले सहित आगे कर बोलेंगे…जनता की समस्याओं को बाउंसर बना कर और फेंको बच्चू.. हमारे पास सचिन है। विपक्ष की भलाई इसी में है कि वे भी इसके मुकाबले दो चार तेज गेंदबाज जुटा लें । सदन में भेजने के लिए।
आदरणीय ज्ञानदत्त जी को जैसी शुभकामनाएं आपने दीं वैसी शुभकामनाएं तो कोई मित्र नहीं दे सकता। मेरा मतबल दूसरा मित्र नहीं दे सकता। अच्छे ससुर वाली पोस्ट का तोहफा और भयानक नारा लगाती बहू। दोनो बड़े बजुर्ग हैं इसलिए मैं तो कोई शरारत नहीं कर सकता। आप हिम्मत वाले हैं..बधाई।
रेखा जी आजकल आपके क्या मेरे संपर्क में भी नहीं हैं।:)
इस पोस्ट में एक साथ कई बातें समेटने का प्रयास किया गया है। आलोचना करनी हो तो यह कहा जा सकता है कि शब्दों का चतुर व्यापारी एक रूपय्यै में तीन अठन्नी भजाने का प्रयास कर रहा है।:)
कोई भी बेचैन व्यक्ति इतना शानदार कमेण्ट नहीं दे सकता। मेरा मतलब है कि वह अपनी बेचैनी में ही लटपटाया रहेगा!
Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..लिमिटेड हाइट सब वे (Limited Height Sub Way)
सचिन बल्ले से अपने विरोधियों को जवाब देता है. सही करता है और अगर आगे भी ऐसी आदत बनी रहे तो और भी सही है| कितना मजा आ जाए कि दूसरी कोइ पार्टी लिम्बा राम, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अनुभव बिंद्रा, दिलीप सिंह @ खली द ग्रेट जैसे विकल्पों पर विचार करें| इस मुद्दे पर अनन्य की क्या फीडबैक है?
ज्ञानदत्त साहब को हार्दिक बधाई,
सतीश सक्सेनाजी जिंदाबाद जिंदाबाद..
sanjay aneja की हालिया प्रविष्टी..कीमत चुकता….
अपन भी सचिन को भगवान ही मानते हैं………..सो, नो कमेन्ट. बस एक डर लग रहा……. गर, कल को कोई जनता का सेवक, उनसे प्रेरणा लेकर ये कहे…………..”ख़बरदार जो कोई हमारे री-टा-यर होने की बात करे…..हम्मे जब तक देश सेवा करने में मजा आएगा, तब तक हम री-टा-यर नहीं होंगे”………………
दद्दा के आगे स्वसुर बन-ने के लिए अग्रिम सुभ:कामनाएं………….और आपका, उनके लिए अच्छे स्वसुर बन-ने के सन्दर्भ में चिंतित होना सहज ही है, खास कर जब कॉम्पिट-एनसी सतीश भाईजी से हो……………….
बकिया, आपके मोजिये पोस्ट पर भाई देवेन्द्रजी के मजेदार कमेन्ट अच्छा गुद-गुदाया….
प्रणाम.
ये क्या भाई जी, इतना संक्षिप्त विवरण….इतने कम सीन दिखा निपटा दिया आपने …और रेखा मौसी को तो ऐसे ही छोड़ दिया…ये तो बड़ी तरफदारी वाली बात हुई…
खूब चौके-छक्के मारे गुरु आपने! सचिन पढ़ लें तो कदम बोसी करने लगें
ज्ञान जी और उनके बेटे को बधाई शुभकामनाओं के साथ
“हमारा फ़ादर इन लॉ कैसा हो, सतीश सक्सेना जैसा हो।” गज्ज़ब नारा ईजाद किये हैं आप . बहुत भले आदमी लगते हैं सतीश भैया
हम तो भाई रेखा जी के टच में हैं बराबर
ज्ञान जी एवं उअन्के परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएँ..
समीर लाल “पुराने जमाने के टिप्पणीकार” की हालिया प्रविष्टी..सेन फ्रेन्सिसको से कविता…
कृपया यह भी पता करने की कोशिश कीजिए कि राज्यसभा में जाने के बाद सचिन के “एण्डोर्समेण्ट का भाव” बढ़ेगा या घटेगा?
क्योंकि ऐसी बातें तो आप तक जल्दी पहुँचती हैं प्रभु… शायद रेखा को ही पता हो, “जरा टच” तो कीजिए…
ब्लोगर एक सामाजिक प्राणी है और सामाजिक जीवन में निजता का कोई स्थान नहीं . आप तो पहले से ही और अब रेखा जी भी सामाजिक हो गई .
dhiru singh की हालिया प्रविष्टी..कैसी कही
[...] सचिन राज्यसभा में- कुछ सीन [...]