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	<title>Comments on: दातुन कर ब्लॉग लिखने के फायदे</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: सिद्धार्थ जोशी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-38164</link>
		<dc:creator>सिद्धार्थ जोशी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2009 06:23:58 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे पता है मैं बहुत लेट हूं लेकिन रवि रतलामी के एक पोस्‍ट में इस पोस्‍ट का लिंक मिल गया सो यहां आ गया और दांतुन करने के इन चमत्‍कारी सूत्रों को पूरा पढ़े बिना नहीं रहा गया।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे पता है मैं बहुत लेट हूं लेकिन रवि रतलामी के एक पोस्‍ट में इस पोस्‍ट का लिंक मिल गया सो यहां आ गया और दांतुन करने के इन चमत्‍कारी सूत्रों को पूरा पढ़े बिना नहीं रहा गया।</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
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		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Jul 2007 08:01:02 +0000</pubDate>
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		<description>समीर जी वाला प्रश्न मेरा भी है आज पोस्ट किस दातुन से लिखी है कि हलन्त चिपक गया है सब शब्दों के पीछे? :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>समीर जी वाला प्रश्न मेरा भी है आज पोस्ट किस दातुन से लिखी है कि हलन्त चिपक गया है सब शब्दों के पीछे? <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13373</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Jul 2007 15:05:07 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत मजेदार, लगे हाथ ये भी बता देते कि दातुन मे ब्लोग अगर लिखना है तो &quot;सोने के बाद या उठने से पहले ही लिखें&quot;, किसी और वक्त लिखने पर ऊपर बताय सारे फायदे नुकसान पहुँचा सकते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत मजेदार, लगे हाथ ये भी बता देते कि दातुन मे ब्लोग अगर लिखना है तो &#8220;सोने के बाद या उठने से पहले ही लिखें&#8221;, किसी और वक्त लिखने पर ऊपर बताय सारे फायदे नुकसान पहुँचा सकते हैं।</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13326</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 12:16:43 +0000</pubDate>
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		<description>हा हा!! क्या दातून की है रगड़ रगड़ कर. जरा दाँत की फोटू भी लगा देते कि कैसे निखर आये हैं. :) बहुत खूब.

अरे एक बात तो भूले ही जा रहे थे:

&lt;b&gt;अगर् आप् जरा सा भी आर्थिक् समझ् और् रुझान् &lt;/b&gt;

-आज यह पूरी पोस्ट में आधी आधी दातून का क्या माजरा है: र् प् क् झ्  -बारहा इस्तेमाल कर रहे हैं कि हिन्दी लिखने के लिये कोई नई दातून ले आये?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हा हा!! क्या दातून की है रगड़ रगड़ कर. जरा दाँत की फोटू भी लगा देते कि कैसे निखर आये हैं. <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  बहुत खूब.</p>
<p>अरे एक बात तो भूले ही जा रहे थे:</p>
<p><b>अगर् आप् जरा सा भी आर्थिक् समझ् और् रुझान् </b></p>
<p>-आज यह पूरी पोस्ट में आधी आधी दातून का क्या माजरा है: र् प् क् झ्  -बारहा इस्तेमाल कर रहे हैं कि हिन्दी लिखने के लिये कोई नई दातून ले आये?</p>
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		<title>By: Sanjeeva Tiwari</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13325</link>
		<dc:creator>Sanjeeva Tiwari</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 12:10:13 +0000</pubDate>
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		<description>मानुष हौं तो वही रसखान घसौं दातून फुरसतिया के दुवारे । बडे भाई अब हमहू दातून खरीद ही लेते है नहीं तो कौन जाने बजार से सबै दातून दूसरै ले लें और हम खाली की बोर्ड को खटर पटर करते रहें ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मानुष हौं तो वही रसखान घसौं दातून फुरसतिया के दुवारे । बडे भाई अब हमहू दातून खरीद ही लेते है नहीं तो कौन जाने बजार से सबै दातून दूसरै ले लें और हम खाली की बोर्ड को खटर पटर करते रहें ।</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13324</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 11:36:03 +0000</pubDate>
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		<description>वैसे हम दातुन ब्लॉगिंग तो नहीं लेकिन टूथब्रुश ब्लॉगिंग कर चुके हैं। क्या उस हिसाब से हम पहले टूथब्रुश ब्लॉगर हैं या कोई पहले ही यह कारनामा कर चुका है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे हम दातुन ब्लॉगिंग तो नहीं लेकिन टूथब्रुश ब्लॉगिंग कर चुके हैं। क्या उस हिसाब से हम पहले टूथब्रुश ब्लॉगर हैं या कोई पहले ही यह कारनामा कर चुका है।</p>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13323</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 10:03:14 +0000</pubDate>
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		<description>हुम्म.....हम्म..... यानि कि अब फिर एक दूसरा प्रोडक्ट अपनाना पड़ेगा? अभी कुछ वर्ष पहले ही तो पेप्सोडेन्ट से कोलगेट पर आए थे, उससे पहले मिस्वाक से पेप्सोडेन्ट पर, उससे पहले फोरहैन्स से मिस्वाक पर, अब दातुन!! खैर, चलिए ई भी टिराई कर देखते हैं, मतलब टिराई तो किया है पहले, लेकिन उसके बाद बिलागिंग नहीं किए है, अब उ कर देखते हैं, मजा आया तो ठीक नहीं तो अपन कोलगेट से संतुष्ट हैं फिलहाल!! ;)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हुम्म&#8230;..हम्म&#8230;.. यानि कि अब फिर एक दूसरा प्रोडक्ट अपनाना पड़ेगा? अभी कुछ वर्ष पहले ही तो पेप्सोडेन्ट से कोलगेट पर आए थे, उससे पहले मिस्वाक से पेप्सोडेन्ट पर, उससे पहले फोरहैन्स से मिस्वाक पर, अब दातुन!! खैर, चलिए ई भी टिराई कर देखते हैं, मतलब टिराई तो किया है पहले, लेकिन उसके बाद बिलागिंग नहीं किए है, अब उ कर देखते हैं, मजा आया तो ठीक नहीं तो अपन कोलगेट से संतुष्ट हैं फिलहाल!! <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: paramjitbali</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13321</link>
		<dc:creator>paramjitbali</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 07:59:53 +0000</pubDate>
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		<description>आप का दातुन-पुराण बहुत अच्छा है।आप के सुझावों को अपनाने कि कोशिश करेगें।लेकिन उस से पहले मनन करना होगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप का दातुन-पुराण बहुत अच्छा है।आप के सुझावों को अपनाने कि कोशिश करेगें।लेकिन उस से पहले मनन करना होगा।</p>
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		<title>By: आलोक पुराणिक</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13319</link>
		<dc:creator>आलोक पुराणिक</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 07:13:15 +0000</pubDate>
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		<description>भई वाह, बहूत खेंची दातून।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भई वाह, बहूत खेंची दातून।</p>
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		<title>By: विजय वडनेरे</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/303/comment-page-1#comment-13318</link>
		<dc:creator>विजय वडनेरे</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jul 2007 06:23:37 +0000</pubDate>
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		<description>आदरणीय, आपसे एक विनम्र विनती है:
आप इतने बड़े-बड़े लिख ना छापा कीजिये. वो क्या है ना कि, जो आपके मुरीद है (बाई डिफ़ाल्ट और बाई गौड -हम भी) उनको आपकी प्रशंसा करने के लिये इतना लम्बा पढने की कौनो जरुरत नहीं है. और जो (खुदा ना खास्ता) नहीं है, उनको इतनी लम्बी झिलायेगी नहीं. सारांश ये कि - 

रीडर मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?
रीडर अन-मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?

अब ऐसा (याने बड़ा) ना छापा जाये, ये तो आप समझ ही गये होंगे?

अब आते हैं मेन बात पर - सिर्फ़ बड़ा ना छापने की विनती है, बड़ा लिखने पर बाखुदा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है. वैसे भी बड़ा होता है तो बेहतर तो ऑटोमेटिकली हो ही जाता है ना? अब करना ये है कि बाकि बचे हुये आधे पोस्ट को फ़ैकना (सिलेक्ट-डिलीट) नहीं करना है, उसको तो हम आपसी सहयोग से (अब सारा काम आपसे ही थोडे ना करवायेंगे) ’मेरे’ ब्लाग पर छाप देंगे . वो क्या है ना कि इससे आपका भी श्रम और समय (जो आप मेरे ब्लाग पर जा जा के खरचते हो ये देखने को कि मैने कुछ लिखा कि नहीं) भी बचेगा -जिसको आप और बड़ा (और बेहतर -अण्डरस्टुड) लिखने में यूटिलाईज़ कर पाओगे.

वो क्या है  ना कि आजकल ना मौका मिल नहा है ना दस्तुर, सो कुछ कुलबुलाहट नहीं निकल पा रही है. तो अब खुद को ब्लागिंग की रेस में अप-टू-डेट रखने के लिये हमने यह आयडिया सोचा है.

डिस्क्लेमर: ये आयडिया हमारे सोलो दिमाग की उपज है, और हमने इसे पेटेन्ट/कापीराईट (और जो भी करवाते हैं) करवा रखा है. जिस किसी को भी इस आयडिये का पुरा या पार्शियल पर्सनल उपयोग करते पाया जायेगा तो उसे बतौर सज़ा हमारे ब्लाग पर मासिक ११ पोस्ट लिखने का आदेश दिया जाएगा पूरे एक साल तक.

अगेन डिस्क्लेमर: ऑफ़र उन सभी ब्लागरों के लिये भी ओपन है जो ऐसा समझते/सोचते हैं कि वे भी ’बड़ा’ और ’अच्छा’ लिखते हैं.

(वैसे ये (दातुन वाली) पोस्ट अच्छी थी-मज़ा आया पढ़ कर)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय, आपसे एक विनम्र विनती है:<br />
आप इतने बड़े-बड़े लिख ना छापा कीजिये. वो क्या है ना कि, जो आपके मुरीद है (बाई डिफ़ाल्ट और बाई गौड -हम भी) उनको आपकी प्रशंसा करने के लिये इतना लम्बा पढने की कौनो जरुरत नहीं है. और जो (खुदा ना खास्ता) नहीं है, उनको इतनी लम्बी झिलायेगी नहीं. सारांश ये कि &#8211; </p>
<p>रीडर मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?<br />
रीडर अन-मुरीद तो क्यों बड़ी छाप्पें?</p>
<p>अब ऐसा (याने बड़ा) ना छापा जाये, ये तो आप समझ ही गये होंगे?</p>
<p>अब आते हैं मेन बात पर &#8211; सिर्फ़ बड़ा ना छापने की विनती है, बड़ा लिखने पर बाखुदा कोई ऑब्जेक्शन नहीं है. वैसे भी बड़ा होता है तो बेहतर तो ऑटोमेटिकली हो ही जाता है ना? अब करना ये है कि बाकि बचे हुये आधे पोस्ट को फ़ैकना (सिलेक्ट-डिलीट) नहीं करना है, उसको तो हम आपसी सहयोग से (अब सारा काम आपसे ही थोडे ना करवायेंगे) ’मेरे’ ब्लाग पर छाप देंगे . वो क्या है ना कि इससे आपका भी श्रम और समय (जो आप मेरे ब्लाग पर जा जा के खरचते हो ये देखने को कि मैने कुछ लिखा कि नहीं) भी बचेगा -जिसको आप और बड़ा (और बेहतर -अण्डरस्टुड) लिखने में यूटिलाईज़ कर पाओगे.</p>
<p>वो क्या है  ना कि आजकल ना मौका मिल नहा है ना दस्तुर, सो कुछ कुलबुलाहट नहीं निकल पा रही है. तो अब खुद को ब्लागिंग की रेस में अप-टू-डेट रखने के लिये हमने यह आयडिया सोचा है.</p>
<p>डिस्क्लेमर: ये आयडिया हमारे सोलो दिमाग की उपज है, और हमने इसे पेटेन्ट/कापीराईट (और जो भी करवाते हैं) करवा रखा है. जिस किसी को भी इस आयडिये का पुरा या पार्शियल पर्सनल उपयोग करते पाया जायेगा तो उसे बतौर सज़ा हमारे ब्लाग पर मासिक ११ पोस्ट लिखने का आदेश दिया जाएगा पूरे एक साल तक.</p>
<p>अगेन डिस्क्लेमर: ऑफ़र उन सभी ब्लागरों के लिये भी ओपन है जो ऐसा समझते/सोचते हैं कि वे भी ’बड़ा’ और ’अच्छा’ लिखते हैं.</p>
<p>(वैसे ये (दातुन वाली) पोस्ट अच्छी थी-मज़ा आया पढ़ कर)</p>
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