उंचाई नैनोमीटर में बताना है


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी


नीरज और अंकुर

नीरज रोहिल्ला इलाहाबाद जाने के पहले कानपुर आये थे। आने की सूचना पहले ही दे चुके थे इसलिये इंतजार था। आई.आई.टी. कानपुर से पी.एच.डी. कर रहे अपने दोस्त , अंकुर वर्मा ,के पास रुके थे।

हमको फोन किया तो उनको हम आई.आई.टी. लेने गये। दोस्त के साथ वे हमारे घर आये। घर का लान देखते ही बोले-यहां ही अभयजी ने बालिंग की थी।

नीरज ने हमको दौडा़ने के लिये उकसाने का प्रयास किया। वे अपने यहां मैराथन दौड़ने की योजना बना रहे हैं। हमारे अलावा उनकी दौड़ाने वाली लिस्ट मेंज्ञानदत्तजी और कुंडली/टिप्पणी किंग समीरलाल हैं। इरादे बड़े ऊंचे हैं। समीरलाल को तो कौनो दौड़ा नहीं सकता। काहे से कि वे हमेशा किसी सुंदरी के पीछे रहने में यकीन रखते हैं भले ही बात नाक पर आ जाये। दौड़ने में आगे निकल जाने का खतरा रहता है न!

ज्ञानजी ने भी बड़ी खुशी-खुशी बताया कि उन्होंने नीरज को दौड़ने की बात पर आने ही नहीं दिया।

नीरज से हमारी जिज्ञासा थी कि ये रोहिल्ला क्या होता है भैये? नीरज शाहजहांपुर में काफ़ी दिन रहे हैं। शाहजहांपुर रुहेलखण्ड मंडल में आता है। हमें लगा शायद वहीं से ये रोहिल्ला लिया गया हो।

लेकिन नीरज ने जो हमें बताया वह अलग था। अफ़गानिस्तान में रोह नाम की एक जगह है। वहां के रहने वाले लोग जब हिंदुस्तान आये तो उनके नाम के आगे रोहिल्ला लग गया। रोहिल्ला लोग हिंदू/मुसलमान दोनों होते हैं।

हमारे कई दोस्त ऐसे कम सुने जाने वाले टाइटिल वाले हैं। शाहजहांपुर में हमारे मित्र थे- नीरज केला, के.पी..गैरोला, सुभाष बायला। आप में से कितने लोगों ने इन टाइटिल वाले नाम सुने हैं?

नीरज और उनके मित्र अंकुर वर्मा झांसी के इंजीनियरिंग कालेज से एक साथ पढ़े हैं। केमिकल इंजीनियरिंग में। अब दोनों पी.एच.डी. रत हैं। अंकुर आई.आई.टी. कानपुर से तो नीरज ह्यूस्टन से।

अंकुर ने आई.आई.टी. कानपुर के तमाम किस्से सुनाये। कानपुर में काफ़ी दिन आई.आई.टी. कानपुर के इन्फ़ोठेला का बहुत हल्ला रहा। अब लगता है ठेला पंचर हो गया।

अंकुर हालांकि ब्लाग लिखते नहीं लेकिन उनमें ब्लागिंग में धंसने की पर्याप्त संभावनायें हैं। देखिये कब शुरुआत होती है।

नीरज ने अपने बारे में बताते हुये जानकारी दी कि वे शाहजहांपुर में शिशु मंदिर में पढे फिर इस्लामिया इंटर कालेज में भी। अब उनके दोस्त उनको कम्युनिस्ट कहते हैं। :)

शाहजहांपुर में मैं करीब आठ साल रहा। वहां के साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल मैं अक्सर देता हूं। १९९२ में बाबरी मस्जिद टूटने पर दंगा हुआ था तो लगभग सारे प्रदेश में दंगा हुआ था लेकिन शाहजहांपुर में दंगा नहीं हुआ जबकि वहां हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर है।

नीरज की अपनी उंचाई को नैनोमीटर में व्यक्त करने की योजना है ताकि वो तकनीकी रूप से शानदार दिखे और जानदार लगे।

जब हमारे यहां वे बैठे तकनीकी और अमेरिकी जीवन के किस्से सुना रहे थे उसी समय अभयजी का भी फोन आया। उनसे भी उनकी बातचीत हो गयी। आडियो ब्लागर मुलाकात।

बातों के बीच नीरज ने कहा- बहुत दिन से आपकी फ़ुरसटिया टाइप पोस्ट नहीं आई। हमें यह सुनकर दोहरा झटका लगा। पहला तो इस बात का कि हम ‘टाइप्ड’हो गये। दूसरा कि हम जिस टाइप के माने जाते हैं उस टाइप का लिख नहीं पा रहे।

हमने उनसे कुछ तकनीकी ज्ञान भी ले लिया। हमारी कुछ पाडकास्टिंग की भी योजना रही। सोचता थे कि जो कवितायें हमारे पास हैं उनको डाल के सुना दें। पाठकों को श्रोता भी बना दें। लेकिन अभी तक अपने ब्लाग में आडियो का प्लगइन लगाना है। स्वामीजी को लगा दिया है सो अब प्लग इन लगा हुआ ही समझिये। :)

नीरज को रात को बनारस जाना था सो हम उनको उनके अड्डे छोडकर चले आये। पता लगा कि वे शिवगंगा से वाया बनारस इलाहाबाद में ज्ञानगंगा में भी नहा आये।

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

10 responses to “उंचाई नैनोमीटर में बताना है”

  1. Gyan Dutt Pandey

    1. ऑब्जेक्शन: ” …लेकिन उनमें ब्लागिंग में धंसने की पर्याप्त संभावनायें हैं।” पर। ब्लॉगरी क्या नर्क/पाताल तुल्य है? यह हम जैसे इस जीवन में कैवल्यप्राप्ति की चाह रखने वाले के लिये भयानक आघात है! :-) (ऑब्जेक्शन सस्टेण्ड!)
    2. ऑब्जेक्शन: “…अपनी उंचाई को नैनोमीटर में व्यक्त करने की योजना है”। पर यह तो हम पर भी कटाक्ष है जिसकी लम्बाई केवल 1690,000,000 नैनो मीटर मात्र है। नीरज को प्रसन्न होना चाहिये कि वह नेपोलियन, लालबहादुर शास्त्री और हमारी ऑगस्ट कम्पनी में हैं। (ऑब्जेक्शन सस्टेण्ड!)
    3. और यूं ही – पोस्ट बढ़िया है। फुर्सतियानुरूप! :-)

  2. अनिल रघुराज

    चलिए इसी बहाने नीरज रोहिल्ला, रोहिल्ला शब्द की उत्पत्ति और शाहजहांपुर के सांप्रदायिक सद्भाव से परिचय हो गया। लेकिन सबसे बड़ी बात यह कि फुरसतिया लेखन क्या है, क्या हो सकता है, इसका मॉडल भी देख लिया।

  3. kakesh

    चलिये आपके बहाने नीरज से भी मिल लिये.

  4. संजय बेंगाणी

    सही है, बस व्यंग्य की मार कुछ ज्यादा कम रही या हम समझ नहीं पाये.

  5. अभय तिवारी

    टाइप्ड हो जाने के खतरे के प्रति आप सजग हो गए हैं ये अच्छी बात है.. मगर जो उसकी माँग बन गई हो तो.. जो बन गई है.. तभी तो नीरज ने कहा भी.. अब पसोपेश में रहिये.. वो कुछ नया टाइप होगा..

  6. yunus

    जे तो सही है कि आप की फुरसतिया टाईप पोस्‍टें नहीं आ रही हैं । नीरज के बारे में पढ़कर अच्‍छा लगा ।

  7. सागर चन्द नाहर

    लगता है सबसे ज्यादा चिट्ठाकारों से मुलाकातों का रिकॉर्ड आपही के नाम बनेगा। :)

    आज पहली बार फोटॊ में कुछ दिखा :)

  8. आलोक पुराणिक

    टाइप्ड होने के खतरे हैं, पर टाइप्ड न होने के भी खतरे हैं।
    अब खुद सोचिये, हेलेन अगर निरुपा राय के रोल करने लग जाये, तो क्या हो।
    आप तो जी जो हो, वो रहो।

  9. समीर लाल

    बहुत बढ़िया रहा आपका, नीरज का और अंकुर का मेल मिलाप कार्यक्रम का विवरण पढ़ना.

    अब सुन्दरी के पीछे चल कर देख लिया. दो दिन में नाक की सूजन जा पाई. अब तो दौड़ कर भी देख ही लिया जायेगा. निश्चिंत रहें. आने दिजिये नीरज को यहाँ.

    इन्तजार रहेगा आपकी पॉडकास्टिंग का.

    रोहिल्ला नाम की उत्पत्ति की जानकारी रोचक रही. गैरोला तो हमारे भी मित्र रह चुके हैं. गढ़वाल के मूल होते हैं. एक गैरोला साहब बीएचयू इन्जिन्यरिंग में भी सिनियर प्रोफेसर होते थे. पता नहीं आपके समय थे या नहीं?

    अब पुनः आ जाईये फुरसतिया लेखन पर. :)

  10. बोधिसत्व

    आप जैसा लिख रहे हैं वही हिंदी के तमाम लिक्खाड़ों को सताने के लिए काफी है…..बस दाबे रहिए कलेट्टर गंज ।

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