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	<title>Comments on: ब्लागरों का उत्साह वर्धन के बहाने मुफ़्त सलाह</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: श्रीश शर्मा</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16378</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Oct 2007 01:19:07 +0000</pubDate>
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		<description>जय हो फुरसतिया महाराज की, अच्छा ज्ञान बाँटा। सब बातें नोट कर ली हैं, ज्यादातर को हम पहले से आजमाते रहे हैं, आगे से और ध्यान रखेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जय हो फुरसतिया महाराज की, अच्छा ज्ञान बाँटा। सब बातें नोट कर ली हैं, ज्यादातर को हम पहले से आजमाते रहे हैं, आगे से और ध्यान रखेंगे।</p>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; जीतेंन्द्र, एग्रीगेटर, प्रतिस्पर्धा और हलन्त</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16297</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; जीतेंन्द्र, एग्रीगेटर, प्रतिस्पर्धा और हलन्त</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Oct 2007 02:00:11 +0000</pubDate>
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		<description>[...] एक पोस्ट में ब्लागरों का उत्साह वर्धन के बहाने मुफ़्त सलाह काकेश भाई ने सवाल किया था-आपकी पोस्टों में ज्ञान जी, आलोक जी और समीर जी लगभग स्थायी रूप से किसी ना किसी बहाने लिंकित रहते ही हैं और बेचारे जीतू भाई उनको आप बिना लिंकित किये कलंकित करते रहते हैं.बेचारों की टांग भी खिचती है और लिंक भी नहीं मिलता.इसका कारण क्या है कुछ नये ब्लॉगर स्प्ष्टीकरण चाहते हैं कि एक वरिष्ठ ब्लॉगर को सबको समभाव से देखना चाहिये. [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] एक पोस्ट में ब्लागरों का उत्साह वर्धन के बहाने मुफ़्त सलाह काकेश भाई ने सवाल किया था-आपकी पोस्टों में ज्ञान जी, आलोक जी और समीर जी लगभग स्थायी रूप से किसी ना किसी बहाने लिंकित रहते ही हैं और बेचारे जीतू भाई उनको आप बिना लिंकित किये कलंकित करते रहते हैं.बेचारों की टांग भी खिचती है और लिंक भी नहीं मिलता.इसका कारण क्या है कुछ नये ब्लॉगर स्प्ष्टीकरण चाहते हैं कि एक वरिष्ठ ब्लॉगर को सबको समभाव से देखना चाहिये. [...]</p>
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		<title>By: मसिजीवी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16236</link>
		<dc:creator>मसिजीवी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 15:32:27 +0000</pubDate>
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		<description>हम् मानते हैं कि आलोक पुराणिक् जितनी अच्छा लेखन् करते हैं उनकी टिप्पणियां उससे अच्छी होती हैं। 


लीजिए उन्‍होंने प्रमाण भी दे दिया अपनी टिप्‍पणी से।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हम् मानते हैं कि आलोक पुराणिक् जितनी अच्छा लेखन् करते हैं उनकी टिप्पणियां उससे अच्छी होती हैं। </p>
<p>लीजिए उन्‍होंने प्रमाण भी दे दिया अपनी टिप्‍पणी से।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Dr. Ajit Kumar</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16230</link>
		<dc:creator>Dr. Ajit Kumar</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 13:45:14 +0000</pubDate>
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		<description>आप सभी महानुभावों की बातें मैंने गाँठ बाँध ली है. अपने माल को बेचने के लिए जो जद्दोजहद किया जाय ,कम ही है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप सभी महानुभावों की बातें मैंने गाँठ बाँध ली है. अपने माल को बेचने के लिए जो जद्दोजहद किया जाय ,कम ही है.</p>
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		<title>By: सागर चन्द नाहर</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16227</link>
		<dc:creator>सागर चन्द नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 13:12:31 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/fursatiya/?p=355#comment-16227</guid>
		<description>मैं भी अक्सर टिप्पणियों पर खास ध्यान देता हूँ, और इससे मुझे कई  बढ़िया चिट्ठों का लिंक मिला है। 
हमारी  समस्या बड़ी अजीब है, हम वर्डप्रेस पर लिखते हैं और  जब टिप्पणी करते हैं तो उसका लिंक  देने की कोई सुविधा ब्लॉगर के पास नहीं है। ऐसे मैं पुरानी और बंद पड़ी दुकान  पर एक पोस्ट लिख दी है कि भाई नई दुकान यहाँ है; लोग बेचारे घूमघाम कर आते हैं, नई दुकान तक।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं भी अक्सर टिप्पणियों पर खास ध्यान देता हूँ, और इससे मुझे कई  बढ़िया चिट्ठों का लिंक मिला है।<br />
हमारी  समस्या बड़ी अजीब है, हम वर्डप्रेस पर लिखते हैं और  जब टिप्पणी करते हैं तो उसका लिंक  देने की कोई सुविधा ब्लॉगर के पास नहीं है। ऐसे मैं पुरानी और बंद पड़ी दुकान  पर एक पोस्ट लिख दी है कि भाई नई दुकान यहाँ है; लोग बेचारे घूमघाम कर आते हैं, नई दुकान तक।</p>
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		<title>By: Sanjeet Tripathi</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16221</link>
		<dc:creator>Sanjeet Tripathi</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 06:30:49 +0000</pubDate>
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		<description>जबरिया लिक्खै मा ही ज्ञान की बातें बता गए आप तो!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जबरिया लिक्खै मा ही ज्ञान की बातें बता गए आप तो!!</p>
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		<title>By: alok puranik</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16220</link>
		<dc:creator>alok puranik</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 04:55:01 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/fursatiya/?p=355#comment-16220</guid>
		<description>हाय अब तो आप भी खालिस व्यंग्य पर ही फोकस किये हुए हैं, 
हमरा खोमचा बंद हो जायेगा। 
अपनी टिप्पणी और लेखन जिस स्तर का है, वह हम खूब जानते हैं। 
मैंने लेखन के एक उस्ताद से यही पूछा था कि गुरुवर टिप्पणियों पर फोकस करुं, या अपने लेखन पर, 
उन्होने कहा-बेटा ये आप्शन क्यों नहीं पूछते कि इनमें से कुछ भी ना करुं, तो कैसा रहे। वही सबसे अच्छा आप्शन है। 
एक और उस्ताद से पूछा कि गुरुवर टिप्पणी या लेखन।
वो अनमने भाव से बोले-लेखन पर ही जमे रहो। 
मैंने उत्साह से पूछा-क्या आपने मेरा लेखन देखा है। 
वो निराश होकर बोले नहीं, तुम्हारी टिप्पणियां देखी हैं। 
इन्ही उस्ताद ने मुझे सुझाव दिया कि आप मातृभाषा मराठी भाषा में क्यों नहीं लिखते। 
मैंने फिर उत्साहित होकर पूछा कि क्या आपको मेरा हिंदी का लेखन इत्ता श्रेष्ठ लगता है।
गुरुवर ने बताया-अबे सारे ऐसी-तैसी सिर्फ हिंदी ही क्यों हो। 
साहबजी, अपना अंदाज है हमकू।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हाय अब तो आप भी खालिस व्यंग्य पर ही फोकस किये हुए हैं,<br />
हमरा खोमचा बंद हो जायेगा।<br />
अपनी टिप्पणी और लेखन जिस स्तर का है, वह हम खूब जानते हैं।<br />
मैंने लेखन के एक उस्ताद से यही पूछा था कि गुरुवर टिप्पणियों पर फोकस करुं, या अपने लेखन पर,<br />
उन्होने कहा-बेटा ये आप्शन क्यों नहीं पूछते कि इनमें से कुछ भी ना करुं, तो कैसा रहे। वही सबसे अच्छा आप्शन है।<br />
एक और उस्ताद से पूछा कि गुरुवर टिप्पणी या लेखन।<br />
वो अनमने भाव से बोले-लेखन पर ही जमे रहो।<br />
मैंने उत्साह से पूछा-क्या आपने मेरा लेखन देखा है।<br />
वो निराश होकर बोले नहीं, तुम्हारी टिप्पणियां देखी हैं।<br />
इन्ही उस्ताद ने मुझे सुझाव दिया कि आप मातृभाषा मराठी भाषा में क्यों नहीं लिखते।<br />
मैंने फिर उत्साहित होकर पूछा कि क्या आपको मेरा हिंदी का लेखन इत्ता श्रेष्ठ लगता है।<br />
गुरुवर ने बताया-अबे सारे ऐसी-तैसी सिर्फ हिंदी ही क्यों हो।<br />
साहबजी, अपना अंदाज है हमकू।</p>
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		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16219</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 04:46:51 +0000</pubDate>
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		<description>जी धन्यवाद. सलाह पर अमल करेंगे. टिप्पणीयाँ करते रहें है, अब ज्यादा करेंगे.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जी धन्यवाद. सलाह पर अमल करेंगे. टिप्पणीयाँ करते रहें है, अब ज्यादा करेंगे.</p>
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		<title>By: kakesh</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16218</link>
		<dc:creator>kakesh</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 04:42:33 +0000</pubDate>
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		<description>ज्ञान ले लिया गया.

कुछ बातें : खोमचा शिफ्ट करने वाले हम जैसे लोगों के साथ समस्या यह होती है की कई बार आपको अपने जी मेल अकाउंट से टिपियाना पड़ता है और तब आपका पाठक आपको खोजते हुए ब्लॉगस्पॉट वाले ब्लॉग में चले जाता है. जैसे अनीता जी गयी ,नीरज गोस्वामी जी गये हमारे पुराने ब्लॉग पर और वहीं टिपिया आये. इसका कोई उपाय हो तो बताया जाय.

आपकी पोस्टों में ज्ञान जी,आलोक जी और समीर जी लगभग स्थायी रूप से किसी ना किसी बहाने लिंकित रहते ही हैं और बेचारे जीतू भाई उनको आप बिना लिंकित किये कलंकित करते रहते हैं.बेचारों की टांग भी खिचती है और लिंक भी नहीं मिलता.इसका कारण क्या है कुछ नये ब्लॉगर स्प्ष्टीकरण चाहते हैं कि एक वरिष्ठ ब्लॉगर को सबको समभाव से देखना चाहिये. :-)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ज्ञान ले लिया गया.</p>
<p>कुछ बातें : खोमचा शिफ्ट करने वाले हम जैसे लोगों के साथ समस्या यह होती है की कई बार आपको अपने जी मेल अकाउंट से टिपियाना पड़ता है और तब आपका पाठक आपको खोजते हुए ब्लॉगस्पॉट वाले ब्लॉग में चले जाता है. जैसे अनीता जी गयी ,नीरज गोस्वामी जी गये हमारे पुराने ब्लॉग पर और वहीं टिपिया आये. इसका कोई उपाय हो तो बताया जाय.</p>
<p>आपकी पोस्टों में ज्ञान जी,आलोक जी और समीर जी लगभग स्थायी रूप से किसी ना किसी बहाने लिंकित रहते ही हैं और बेचारे जीतू भाई उनको आप बिना लिंकित किये कलंकित करते रहते हैं.बेचारों की टांग भी खिचती है और लिंक भी नहीं मिलता.इसका कारण क्या है कुछ नये ब्लॉगर स्प्ष्टीकरण चाहते हैं कि एक वरिष्ठ ब्लॉगर को सबको समभाव से देखना चाहिये. <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':-)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: मीनाक्षी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/355/comment-page-1#comment-16217</link>
		<dc:creator>मीनाक्षी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Oct 2007 04:17:43 +0000</pubDate>
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		<description>अभी तो ऐसा हो रहा है कि बहुत दिनों बाद हमें मौका मिला इतना कुछ पढ़ने समझने का तो चिट्ठाजगत की व्यवहार कुशलता , आचार व्यवहार को जानने मे वक्त लगेगा. मुफ्त के मोती चुगने मे लगे है.. सबका बहुत बहुत धन्यवाद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अभी तो ऐसा हो रहा है कि बहुत दिनों बाद हमें मौका मिला इतना कुछ पढ़ने समझने का तो चिट्ठाजगत की व्यवहार कुशलता , आचार व्यवहार को जानने मे वक्त लगेगा. मुफ्त के मोती चुगने मे लगे है.. सबका बहुत बहुत धन्यवाद</p>
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