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	<title>Comments on: फ़ुरसतियाजी आप चुगद हैं</title>
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	<description>हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै?</description>
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		<title>By: फुरसतिया &#187; क्रोध किसी भाषा का मोहताज नहीं होता</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16583</link>
		<dc:creator>फुरसतिया &#187; क्रोध किसी भाषा का मोहताज नहीं होता</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Nov 2007 17:15:09 +0000</pubDate>
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		<description>[...] हमारे तमाम दोस्तों ने हम पर गुस्सा करते हुये कहा है कि हमें किसी झग़ड़े में पड़ने की बेवकूफ़ी  नहीं करनी चाहिये। कुछ दोस्तों ने गुस्से वाली पोस्टों  पर भा गुस्सा किया यह कहते हुये कि अजीब बेवकूफ़ी है-त्योहारों मे मौसम में गुस्से की बात करते हो। [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] हमारे तमाम दोस्तों ने हम पर गुस्सा करते हुये कहा है कि हमें किसी झग़ड़े में पड़ने की बेवकूफ़ी  नहीं करनी चाहिये। कुछ दोस्तों ने गुस्से वाली पोस्टों  पर भा गुस्सा किया यह कहते हुये कि अजीब बेवकूफ़ी है-त्योहारों मे मौसम में गुस्से की बात करते हो। [...]</p>
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		<title>By: चौपटस्वामी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16560</link>
		<dc:creator>चौपटस्वामी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Nov 2007 11:19:22 +0000</pubDate>
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		<description>अरे भाई ! समझ काहे नहीं रहे हैं . यह विचार की पश्चिमी दृष्टि है . फ़ुरसतिया महाराज टैक्नोलॉजी पढे हैं अउर कम्प्यूटरवा पर खिट-खिट करते हैं . अब अगर बीएचयू मा पढे हैं तो का जनम-जिंदगी पुरबिया दृष्टि   ( मतबल &#039;ओरिएण्टल&#039;दृष्टि , पूर्वी उत्तमप्रदेश का दिरश्टि नाहीं ) से सोचबे करेंगे . अरे ऊ जानते हैं कि पछांह में ( कठोर-मुलायम अउर हरित-अजित का इलाका नाहीं,यूरोपीय दृष्टि अउर मिथकवा मा ) पारम्परिक रूप से उल्लू होत है ज्ञान अउर बुद्धिमत्ता का प्रतीक, आपन नीर-क्षीर विवेकी हंस की माफ़िक . एही लिये ऊ खुद को चुगद लिखे-बोले हैं . बहुतै शातिर दिमाग का आदमी है ई फ़ुरसतिया. एकदम ब्लॉग जगत का चार्ल्स शोभराज .खुद की खुल्लम-खुला डंके की चोट तारीफ़ कर गया अउर जनता को पतै नहीं चला . ई तौ ज्ञान जी गंगा तट पर चैतन्य अवस्था मा चिलम फूंकत रहे सो ताड़ गये . वरना लोक-जन सब विलापित अवस्था मा बुड़बक का माफ़िक टिपिया रहा था . केतना भोला पब्लिक है इण्डिया का . धन्य हो फ़ुरसतिया गुरू !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे भाई ! समझ काहे नहीं रहे हैं . यह विचार की पश्चिमी दृष्टि है . फ़ुरसतिया महाराज टैक्नोलॉजी पढे हैं अउर कम्प्यूटरवा पर खिट-खिट करते हैं . अब अगर बीएचयू मा पढे हैं तो का जनम-जिंदगी पुरबिया दृष्टि   ( मतबल &#8216;ओरिएण्टल&#8217;दृष्टि , पूर्वी उत्तमप्रदेश का दिरश्टि नाहीं ) से सोचबे करेंगे . अरे ऊ जानते हैं कि पछांह में ( कठोर-मुलायम अउर हरित-अजित का इलाका नाहीं,यूरोपीय दृष्टि अउर मिथकवा मा ) पारम्परिक रूप से उल्लू होत है ज्ञान अउर बुद्धिमत्ता का प्रतीक, आपन नीर-क्षीर विवेकी हंस की माफ़िक . एही लिये ऊ खुद को चुगद लिखे-बोले हैं . बहुतै शातिर दिमाग का आदमी है ई फ़ुरसतिया. एकदम ब्लॉग जगत का चार्ल्स शोभराज .खुद की खुल्लम-खुला डंके की चोट तारीफ़ कर गया अउर जनता को पतै नहीं चला . ई तौ ज्ञान जी गंगा तट पर चैतन्य अवस्था मा चिलम फूंकत रहे सो ताड़ गये . वरना लोक-जन सब विलापित अवस्था मा बुड़बक का माफ़िक टिपिया रहा था . केतना भोला पब्लिक है इण्डिया का . धन्य हो फ़ुरसतिया गुरू !</p>
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		<title>By: neeraj</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16555</link>
		<dc:creator>neeraj</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Nov 2007 05:49:49 +0000</pubDate>
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		<description>अगर शिलालेखों और ताम्रपत्रों पर आप विश्वास करें तो पढ़ें उनपर साफ लिखा है की सबसे पुराने चुगद हम है. सं १९५५ से ही हमारे मास्टरों ने जो हमें चुगद कहना शुरू किया तो ये सिलसिला १९७२ तक जब तक हम पढ़ते रहे चलता रहा. नौकरी के दौरान समझ गए की मास्टर ठीक ही कहते थे हम लक्ष्मी के वाहन ही हैं खट ते रहते रहते हैं लक्ष्मी को अपने अलावा किसी दूसरे के घर पहुँचने को.  
फुरसतिया जी अगर आप चुगद हैं तो आप का नंबर बाद में आता है , दिल के खुश रखने को क्या ये ख्याल अच्छा नहीं? 
नीरज</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अगर शिलालेखों और ताम्रपत्रों पर आप विश्वास करें तो पढ़ें उनपर साफ लिखा है की सबसे पुराने चुगद हम है. सं १९५५ से ही हमारे मास्टरों ने जो हमें चुगद कहना शुरू किया तो ये सिलसिला १९७२ तक जब तक हम पढ़ते रहे चलता रहा. नौकरी के दौरान समझ गए की मास्टर ठीक ही कहते थे हम लक्ष्मी के वाहन ही हैं खट ते रहते रहते हैं लक्ष्मी को अपने अलावा किसी दूसरे के घर पहुँचने को.<br />
फुरसतिया जी अगर आप चुगद हैं तो आप का नंबर बाद में आता है , दिल के खुश रखने को क्या ये ख्याल अच्छा नहीं?<br />
नीरज</p>
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	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16534</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 08:10:03 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindini.com/fursatiya/?p=361#comment-16534</guid>
		<description>जब सब कह रहे हैं, तो फुरसतीया क्यों चुप रहे? आप कहो जी. जी भर कर कहो, सबको अधिकार है. मन ही मन में बातें छोटी से बड़ी हो जाती है, अतः उन्हे बाहर आ जाना चाहिए. 

विश्वसनियता तो हमारी दाँव पर लग गयी जी, आप पर कौन कम्बख्त उँगली उठा रहा है. निश्चिंत रहें. तरोताजा हो ले, अगली बार फिर से मध्यस्त होना है. प्रारम्भिक पोस्ट मैं ही डालूंगा विश्वास रखें :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब सब कह रहे हैं, तो फुरसतीया क्यों चुप रहे? आप कहो जी. जी भर कर कहो, सबको अधिकार है. मन ही मन में बातें छोटी से बड़ी हो जाती है, अतः उन्हे बाहर आ जाना चाहिए. </p>
<p>विश्वसनियता तो हमारी दाँव पर लग गयी जी, आप पर कौन कम्बख्त उँगली उठा रहा है. निश्चिंत रहें. तरोताजा हो ले, अगली बार फिर से मध्यस्त होना है. प्रारम्भिक पोस्ट मैं ही डालूंगा विश्वास रखें <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16533</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 08:01:48 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;strong&gt;रचनाजी&lt;/strong&gt;, शुक्रिया। ब्लागर सोसाइटी बनवाइये। :)

&lt;strong&gt;जीतेंन्द्र&lt;/strong&gt;, हम बिल्कुल टेंशन में नहीं रहते। मस्त हैं। हमें पता है कि तुम बहाने से अपना प्रचार चाहते हो। हम न आयेंगे झांसे में। फिलहाल। :)

&lt;strong&gt;बोधिसत्व, &lt;/strong&gt;हम उलझ नहीं रहे भाई। मौज ले रहे हैं अपने से। :)

&lt;strong&gt;बालकिशनजी&lt;/strong&gt;, ज्ञानजी हमेशा ज्ञान की ही बात करते हैं। सही है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रचनाजी</strong>, शुक्रिया। ब्लागर सोसाइटी बनवाइये। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><strong>जीतेंन्द्र</strong>, हम बिल्कुल टेंशन में नहीं रहते। मस्त हैं। हमें पता है कि तुम बहाने से अपना प्रचार चाहते हो। हम न आयेंगे झांसे में। फिलहाल। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><strong>बोधिसत्व, </strong>हम उलझ नहीं रहे भाई। मौज ले रहे हैं अपने से। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><strong>बालकिशनजी</strong>, ज्ञानजी हमेशा ज्ञान की ही बात करते हैं। सही है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: balkishan</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16532</link>
		<dc:creator>balkishan</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 07:34:59 +0000</pubDate>
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		<description>मैं ज्ञान भइया की बात का पूर्ण रूप से समर्थन करता हूँ कि विवाद भी विकास का वाहक होता है. और आपसे गुजारिश है कि बीती ताहि बिसर दे.  आपकी इस बात का मैं समर्थन करता हूँ कि संकलक वो चाहे नारद हो या चिट्ठाजगत या ब्लागवाणी या कोई और उसको यह बात नहीं भूलनी चाहिये कि ब्लाग के लिये संकलक है न कि संकलक के लिये ब्लाग।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं ज्ञान भइया की बात का पूर्ण रूप से समर्थन करता हूँ कि विवाद भी विकास का वाहक होता है. और आपसे गुजारिश है कि बीती ताहि बिसर दे.  आपकी इस बात का मैं समर्थन करता हूँ कि संकलक वो चाहे नारद हो या चिट्ठाजगत या ब्लागवाणी या कोई और उसको यह बात नहीं भूलनी चाहिये कि ब्लाग के लिये संकलक है न कि संकलक के लिये ब्लाग।</p>
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	<item>
		<title>By: बोधिसत्व</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16529</link>
		<dc:creator>बोधिसत्व</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 05:33:55 +0000</pubDate>
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		<description>फुरसतिया जी काहे को उलझ रहे है....जाने दीजिए और अपनी कलम से अच्छी और रोचक बातें छापिए...</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फुरसतिया जी काहे को उलझ रहे है&#8230;.जाने दीजिए और अपनी कलम से अच्छी और रोचक बातें छापिए&#8230;</p>
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		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16528</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 04:43:31 +0000</pubDate>
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		<description>का हो सुकुल! तो भी टेन्शनियाते रहते हो। छोड़ दो दोनो को अपने अपने विवेक पर। अभी नया खेल है, इसलिए प्रतिस्पर्धा का &quot;प्र&quot; भी इनकी समझ मे नही आने वाला अभी। थोड़े परिपक्व हो जाएंगे और छ महीने बाद ये लोग अपनी पोस्टें दोबारा पढेंगे तो खुद ही शर्मिंदा होंगे। तुम मस्त रहो, एग्रीगेटर का काम सिर्फ़ और सिर्फ़ पाठकों तक ब्लॉग के लिंक पहुँचाना होना चाहिए, बाकी का करवा चौथ की जरुरत ही नही। अच्छे ब्लॉग ना तो किसी एग्रीगेटर के मोहताज है और ना ही पाठकों के। पाठक खुद ब खुद चलकर आएगा, आज नही आएगा तो बाद मे आएगा, लेकिन आएगा जरुर। 

इन सबके चक्कर मे तुम अपना लिखना मत धीमा करों, वर्तमान को तुमसे बहुत आशाएं है, ’भूत’ तो तुम बन ही चुके हो, भविष्य के चंद्रमा तो बन ही जाओगे। अच्छा अब सेंटिआया ना जाए और दन्न से कोई अच्छी सी पोस्ट लिखो, चलो हमारी ही खिंचाई करो।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>का हो सुकुल! तो भी टेन्शनियाते रहते हो। छोड़ दो दोनो को अपने अपने विवेक पर। अभी नया खेल है, इसलिए प्रतिस्पर्धा का &#8220;प्र&#8221; भी इनकी समझ मे नही आने वाला अभी। थोड़े परिपक्व हो जाएंगे और छ महीने बाद ये लोग अपनी पोस्टें दोबारा पढेंगे तो खुद ही शर्मिंदा होंगे। तुम मस्त रहो, एग्रीगेटर का काम सिर्फ़ और सिर्फ़ पाठकों तक ब्लॉग के लिंक पहुँचाना होना चाहिए, बाकी का करवा चौथ की जरुरत ही नही। अच्छे ब्लॉग ना तो किसी एग्रीगेटर के मोहताज है और ना ही पाठकों के। पाठक खुद ब खुद चलकर आएगा, आज नही आएगा तो बाद मे आएगा, लेकिन आएगा जरुर। </p>
<p>इन सबके चक्कर मे तुम अपना लिखना मत धीमा करों, वर्तमान को तुमसे बहुत आशाएं है, ’भूत’ तो तुम बन ही चुके हो, भविष्य के चंद्रमा तो बन ही जाओगे। अच्छा अब सेंटिआया ना जाए और दन्न से कोई अच्छी सी पोस्ट लिखो, चलो हमारी ही खिंचाई करो।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: rachna</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16527</link>
		<dc:creator>rachna</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 03:50:24 +0000</pubDate>
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		<description>a well balance articel on your part sir, but it was bound to happne because aggregators have technically far better knowledge then bloggers and there and on their blogs they are &quot;merely &quot; selling this knowledge . many of them are young and are waiting for major break thrus to come their way because they can show thru thier blogs how smart they are . 
its high time sir indepeendent bloggers should try and make a society for hindi bloggers .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>a well balance articel on your part sir, but it was bound to happne because aggregators have technically far better knowledge then bloggers and there and on their blogs they are &#8220;merely &#8221; selling this knowledge . many of them are young and are waiting for major break thrus to come their way because they can show thru thier blogs how smart they are .<br />
its high time sir indepeendent bloggers should try and make a society for hindi bloggers .</p>
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	<item>
		<title>By: फ़ुरसतिया</title>
		<link>http://hindini.com/fursatiya/archives/361/comment-page-1#comment-16523</link>
		<dc:creator>फ़ुरसतिया</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Oct 2007 02:18:41 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;strong&gt;समीरजी&lt;/strong&gt;, आलोकजी का हमको ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। और वे यह भी समझने में असफ़ल रहे कि वे कुछ भी लिखेंगे पाठक उसको चिट्ठाजगत और ब्लागवाणी के विवाद के रूप में ही देखेंगे। यह समझने भर के लिये घाघ वे नहीं हैं। आलोक ने अपनी पोस्ट संयत भाषा में लिखी। उसके लिये वे बधाई के पात्र हैं। अरुण अरोरा ने कल जो मेरे ब्लाग पर टिप्पणी की वह नहीं करनी चाहिये। उनको यह बात समझनी चाहिये कि उकसाऊ बातें हमेशा अच्छी नहीं होती। लेकिन इसी बहाने सिरिल ने भी अपनी बातें कह लीं। :)

&lt;strong&gt;काकेशजी&lt;/strong&gt;, ये लफ़ड़े तो चलते ही रहेंगे। मध्यस्ता भी आदतन होती है। वैसे इसका फ़ायदा यह हुआ कि बातें सामने आ गयीं। :) 

&lt;strong&gt;ज्ञानजी,&lt;/strong&gt; आपकी बात सही है। इसके धनात्मक असर भी होंगे। सारे संकलक अपनी सेवायें सुधारने में लगें तो अच्छा।

&lt;strong&gt;प्रमेन्द्र&lt;/strong&gt;, तुम समझ गये समझ लो सब समझ गये।


&lt;strong&gt;अभय तिवारी&lt;/strong&gt;, अभी नहीं लेकिन आगे कहोगे। सब गलत है सिवाय शीर्षक के। :)

&lt;strong&gt;अरुण अरोरा&lt;/strong&gt; हमेशा की बचकानी और शरारती टिप्पणी है यह। कुछ गैरजरुरी अंश हमें संपादित भी करना पड़ा। अगर पहले ही &lt;a href=&quot;http://hindini.com/fursatiya/?p=358&quot;&gt;पिछली पोस्ट &lt;/a&gt; में तुम्हारी टिप्पणी सम्पादित कर देता तो शायद यह पोस्ट न लिखनी पड़ती। ऐसा मत लिखा करो कि आग में घी पड़े भाई! :) 

आशा है इस मसले पर और भड़काऊ पोस्ट न आयेंगी। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><strong>समीरजी</strong>, आलोकजी का हमको ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। और वे यह भी समझने में असफ़ल रहे कि वे कुछ भी लिखेंगे पाठक उसको चिट्ठाजगत और ब्लागवाणी के विवाद के रूप में ही देखेंगे। यह समझने भर के लिये घाघ वे नहीं हैं। आलोक ने अपनी पोस्ट संयत भाषा में लिखी। उसके लिये वे बधाई के पात्र हैं। अरुण अरोरा ने कल जो मेरे ब्लाग पर टिप्पणी की वह नहीं करनी चाहिये। उनको यह बात समझनी चाहिये कि उकसाऊ बातें हमेशा अच्छी नहीं होती। लेकिन इसी बहाने सिरिल ने भी अपनी बातें कह लीं। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><strong>काकेशजी</strong>, ये लफ़ड़े तो चलते ही रहेंगे। मध्यस्ता भी आदतन होती है। वैसे इसका फ़ायदा यह हुआ कि बातें सामने आ गयीं। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  </p>
<p><strong>ज्ञानजी,</strong> आपकी बात सही है। इसके धनात्मक असर भी होंगे। सारे संकलक अपनी सेवायें सुधारने में लगें तो अच्छा।</p>
<p><strong>प्रमेन्द्र</strong>, तुम समझ गये समझ लो सब समझ गये।</p>
<p><strong>अभय तिवारी</strong>, अभी नहीं लेकिन आगे कहोगे। सब गलत है सिवाय शीर्षक के। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p><strong>अरुण अरोरा</strong> हमेशा की बचकानी और शरारती टिप्पणी है यह। कुछ गैरजरुरी अंश हमें संपादित भी करना पड़ा। अगर पहले ही <a href="http://hindini.com/fursatiya/?p=358">पिछली पोस्ट </a> में तुम्हारी टिप्पणी सम्पादित कर देता तो शायद यह पोस्ट न लिखनी पड़ती। ऐसा मत लिखा करो कि आग में घी पड़े भाई! <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' />  </p>
<p>आशा है इस मसले पर और भड़काऊ पोस्ट न आयेंगी। <img src='http://hindini.com/fursatiya/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
]]></content:encoded>
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