फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

18 Comments

  1. alok puranik

    मेरा सवाल है कि उल्लू का पठ्ठा शब्द का उद्भव कईसे हुआ।

  2. bhuvnesh

    ऐसी चिरकुटई पे तो दुनिया कायम है…

    कविता बेहद अच्‍छी लगी…पर आप कन्‍हैयालाल नंदन की जगह वाजपेयी लिख गये..

  3. balkishan

    हम तो जब से यंहा(ब्लाग दुनिया) में पधारे है सिर्फ़ इसी प्रश्न से परेशान है आप तनी हल करदें तो बड़ी मेहरबानी होगी साहेब.
    प्रश्न: ब्लाग जगत मे सफल कौन है और उस सफलता को अर्जित करने के रास्ते कौन-कौन से है?
    विस्तारपूर्वक रौशनी डालें.

  4. Gyan Dutt Pandey

    वाह, वाह, सभी समासों में चिरकुट के रूप कण्ठस्थ हो गये! बड़ा अच्छा पढ़ाते हैं मास्टर फुरसतिया जी!

  5. नितिन

    हे गुरुवर, आपने इस चिरकुट और दुनिया के तमाम चिरकुटों को इस महान उपाधि के बारे में विस्तार से ज्ञानवर्धन किया। इस
    पुण्य कार्य के लिये चिरकुट समाज आपको सादर नमन करता है।

    हे मुनिवर, अब आप मुझे इन दो प्रश्नों का उत्तर समान आर्शीवाद प्रदान करें –

    १. आदम समाज के तथाकथित बुध्दीजन कई बार किसी भी चिरकुट की तुलना “गधे” नामक विशाल ह्रदय के सामाजिक प्राणी से क्यों कर देते है?
    २. क्या गर्दभ समाज में भी “आदमी चिरकुट कहीं का” समान कोई उपाधि का प्रावधान है?

  6. अंतर्मन

    मस्त पोस्ट! वाजपेई जी की कविता बहुत अच्छी है!

  7. Neeraj Rohilla

    बहुत सही पोस्ट, पढ़कर ऐसा लगा कि कहीं गलती से अजित जी की शब्दावली तो नहीं पढ़ रहे हैं :-)

    चिरकुटों में भी कई प्रकार के चिरकुट होते हैं और इनका आपस में निम्न सम्बन्ध होता है

    दर चिरकुट = १० चिरकुट
    बम चिरकुट = १०० चिरकुट
    वज्र चिरकुट = १००० चिरकुट
    परम चिरकुट = १०००० चिरकुट

  8. yunus

    बड़ा चक्‍कर है भाई ।
    हम सोच रहे थे ये पूछेंगे वो पूछेंगे ।
    अचानकए आप सुरू हो गये तो हम कन्‍फुजिया और फुजिया गये हैं ।
    भींगे हुए हैं । फुरसत से सवाल पूछेंगे ।
    चिन्‍ता कीजिए ।
    बहुतए पूछेंगे ।

  9. anitakumar

    मास्टर साहब पढ़ाते अच्छा हैं इसमें कोई दो राय नहीं , लेकिन मास्टर साहब एक लेक्चर 50 मिनिट का ही होता है आप का लेक्चर तो जरा लंबा खिच गया न, उदाहरण थोड़े और ज्यादा दिया किजिए, बोल कन्हैया लाल की जय्। कविता में आप की पसंद का जवाब नहीं।
    अब ये बताइए कि लोग ब्लोगिंग में भी प्रतिस्पर्धा क्युं करते हैं किसका ब्लोग सबसे अच्छा और क्युं? क्या फ़रक पड़ जाएगा?

  10. समीर लाल

    बड़ा जबरदस्त रहा जी, आनन्द आ गया. जारी रखिये. प्रश्न आते रहेंगे.

  11. संजय बेंगाणी

    सवाल है मगर इतना लम्बा जवाब पढ़ने की हिम्मत नहीं. इतनी हिम्मत कहाँ मिलती है? :)

  12. G Vishwanath

    वाह रे फ़ुरसतियाजी!
    आप तो सचमुच नटखट नारद निकले!
    चिरकुट?
    इस शब्द से मैं भी परेशान हूँ।
    सही अर्थ और प्रयोग ढूँढते ढूँढते थक गया था।
    किसी से पूछने की हिम्मत भी नहीं हुई।
    क्या पता उत्तर मिले: “अरे, इतना भी नहीं जानते? चिरकुट हो क्या?”
    जब नितिन भाई ने भी अपना अज्ञान सार्वजनिक किया तो थोड़ी सी सांत्वना हुई। चलो एक और बुद्धु मिल गया। अब दोनों फ़ुर्सतियाजी के अपार ज्ञान का लाभ उठाएंगे।

    बडे चाव से आपका गहरा विश्लेषण पढ़ने लगा और पढ़ते पढ़ते अज्ञान की खाई में और नीचे उतरता गया।
    आपने आदम की बात छेडी। सोचा, चलो शायद चिरकाल से चला आ रहा शब्द है यह। फ़ुर्सतियाजी इसके इतिहास से शुरू कर रहे हैं।
    फ़िर आपने सेव की बात की। सो़चा चलो, इसका सच्चा अर्थ शायद इसके बीज के अन्दर छुपा है और आप बीज को कुरेदकर इस रहस्यमय अर्थ को ढूंढ निकालने जा रहे हैं।
    ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हमें अज्ञान की खाइ में और गहरा धकेलकर आप चल दिये।

    है कोई जो अंग्रे़ज़ी की रस्सी फ़ेंककर मुझे इस खाई से निकलने में मदद कर सके?
    बस चिरकुट का अंग्रेज़ी शब्द क्या है? हिन्दी में समझाना असंभव लगता है।

    लिखते रहिये, और आज से मेरी टिप्पणियाँ भी झेलते रहिए।
    नमस्कार और शुभकामनाएँ
    गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु

  13. abha

    फोटू में बेचारे तीन- जो चिरकुट पहने हैं ,बाकी चिरकुट विवरण भी अच्छा है ।यहाँ अपनी बात भी कहना चाहती हूँ कि मै बोधि के अजीबो -अजीब सवाल का जवाब नहीं दे पाती या नहीं चाहती तो कहती हूँ तुम चिरकुट हो पर जब बोधि चुप रह जाता है तो भी अच्छा नहीं लगता … पर सच तो यह है कि बोधि चिरकुट नही बल्कि हाडमास सहित लोहे की कवच वाला एक इन्साल है और क्या क्या लिखूँ .. स्माइली कैसे लगाऊँ …..

  14. abha

    अच्छी कविता …….

  15. डा० अमर कुमार

    यहाँ बड़े दिनों बाद हौसले से आया था ।
    पाया कि निहायत चिरकुटई चल रही है !

    सत्य वचन, सारा गोरखधँधा चिरकुटई पर ही टिका है ।
    By the चिरकुट्स For theचिरकुट्स.. और भी न जाने क्या क्या ?

    किंतु यह प्रामाणिक चिरकुट चिंतन बहुत कुछ कह रहा है, बड़े महीन हो गुरु !

  16. Shashi singhal

    फुरसतिया मास्टरजी ,
    चिरकुटई का पाठ खूब बढिया पढाया है ।चिरकुट आम बोल – चाल की भाषा मे खूब प्रयोग करते रहे है लेकिन कभी इसके गूढ अर्थ के बारे मे कभी ध्यान ही नही दिया । शब्द ग्यान के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद ! पाठ को कुछ ज्यादा लम्बा खीचने से पढ्ने मे थोडी दिक्कर हुई । आगे से शार्ट मे जवाब दे तो पढ्ने मे आनन्द आएगा ।
    मास्टर जी जरा यह बताए कि आप इतने फुरसतिया कैसे है ?

  17. Shashi singhal

    फुरसतिया मास्टरजी ,
    चिरकुटई का पाठ खूब बढिया पढाया है ।चिरकुट आम बोल – चाल की भाषा मे खूब प्रयोग करते रहे है लेकिन कभी इसके गूढ अर्थ के बारे मे कभी ध्यान ही नही दिया । शब्द ग्यान के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद ! पाठ को कुछ ज्यादा लम्बा खीचने से पढ्ने मे थोडी दिक्कर हुई । आगे से शार्ट मे जवाब दे तो पढ्ने मे आनन्द आएगा ।
    मास्टर जी जरा यह बताए कि आप इतने फुरसतिया कैसे है ?
    दूसरा सवाल है कि ये साला – साली शब्द का उद्भव कैसे हुआ ?

  18. ghughutibasuti

    वाह! आपने तो हमारे ग्यान चक्षु खोल दिए। मस्तिष्क में ग्यान का प्रकाश प्रदीप्त कर दिया। इस शब्द ने तो हमें परेशान कर दिया था। गुरु दक्षिणा में हम टिप्पणियाँ देने का वचन देते हैं।
    घुघूती बासूती

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    [...] यह हमारा पहला ड्राफ़्ट है। प्रकाशित कर रहा हूं। इसलिये ताकि कल कह सकूं कि एक और चिरकुट पोस्ट हमारे खाते में जुड़ गयी जिसको शायद हम दुबारा न पढ़ना चाहें। संबंधित कड़ी: पूछिये फ़ुरसतिया से- एक चिरकुट चिंतन [...]

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